सोमवार, 7 सितंबर 2026

Lokoktiyan in Hindi (लोकोक्तियाँ / कहावतें) | अर्थ, वाक्य प्रयोग, मुहावरे से अंतर व List | UPP, UPSI, UPSSSC

लोकोक्तियाँ (Lokoktiyan / Proverbs in Hindi): अर्थ, परिभाषा, वाक्य प्रयोग, मुहावरे एवं लोकोक्ति में अंतर और PYQs | प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए संपूर्ण मार्गदर्शिका


यदि आप UPP (UP Police Constable/SI/ASI), UPSI, UPSSSC (PET/VDO/Junior Assistant/Lekhpal), SSC GD, UPTET, SUPERTET या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो हिंदी व्याकरण का अध्याय 'लोकोक्तियाँ या कहावतें' (Proverbs in Hindi) अत्यंत महत्वपूर्ण है। परीक्षाओं में लोकोक्तियों के सटीक अर्थ, वाक्य प्रयोग, मुहावरे से अंतर और समानार्थक कहावतों से संबंधित 2 से 3 प्रश्न सीधे पूछे जाते हैं।

यहाँ इस पूरे अध्याय को परीक्षा के दृष्टिकोण से मानक व्याकरणिक नियमों, सुव्यवस्थित संरचना, वर्गीकृत तालिकाओं और SEO फ्रेंडली प्रारूप में प्रस्तुत किया गया है।

1. लोकोक्ति क्या है? (Definition & Etymology)

  • शाब्दिक व्युत्पत्ति: 'लोकोक्ति' शब्द दो शब्दों के योग से बना है — लोक + उक्ति

    • लोक = समाज / जन-सामान्य

    • उक्ति = कथन या कही गई बात

    • अर्थ: जन-सामान्य में परंपरागत रूप से प्रचलित कथन।

  • परिभाषा: लोक-जीवन के दीर्घकालिक अनुभवों और जन-साधारण के कथन पर आधारित वह स्वतंत्र वाक्य जो किसी स्थिति, घटना या सत्य को स्पष्ट करने के लिए दृष्टान्त या उदाहरण के रूप में प्रयुक्त होता है, उसे लोकोक्ति या कहावत कहते हैं।

  • मुख्य विशेषताएँ:

    1. लोकोक्ति अपने आप में एक पूर्ण वाक्य (Complete Sentence) होती है।

    2. इसका स्वतंत्र रूप से प्रयोग किया जा सकता है।

    3. वाक्य में प्रयोग होने पर इसके लिंग, वचन या क्रिया का रूप नहीं बदलता (अपरिवर्तित रहता है)।

    4. इसके पीछे कोई न कोई पौराणिक, ऐतिहासिक या लोक कथा जुड़ी होती है।

2. लोकोक्ति और मुहावरे में अंतर (Difference Table)

प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर लोकोक्ति और मुहावरे के बीच तुलनात्मक अंतर पूछा जाता है:

अंतर का आधारलोकोक्ति / कहावत (Proverb)मुहावरा (Idiom)
प्रकृतियह एक पूर्ण वाक्य होती है।यह केवल एक वाक्यांश (Sentence Fragment) होता है।
प्रयोगइसका स्वतंत्र प्रयोग हो सकता है।इसका स्वतंत्र प्रयोग नहीं होता; यह वाक्य का अंग बनता है।
रूप परिवर्तनलिंग, वचन या काल के अनुसार नहीं बदलतीवाक्य के लिंग, वचन व काल के अनुसार बदल जाता है
क्रिया पद (ना)अंत में 'ना' होना अनिवार्य नहीं है।अंत में प्रायः क्रियापद 'ना' आता है (जैसे: भागना)।
उदाहरणअधजल गगरी छलकत जायनौ दो ग्यारह होना

3. लोकोक्ति पहचान की Short Trick

Master Trick:

  • यदि कोई कथन स्वतंत्र रूप से बोला जा सके और पूरा अर्थ दे $\rightarrow$ लोकोक्ति (उदा. "अधजल गगरी छलकत जाय")

  • यदि कथन अधूरा लगे और वाक्य में जोड़े बिना अर्थ न दे $\rightarrow$ मुहावरा (उदा. "छाती पर मूँग दलना")

4. परीक्षाओं के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण लोकोक्तियाँ (100+ Classified List)

क्र.सं.लोकोक्ति / कहावतअर्थवाक्य प्रयोग
1अधजल गगरी छलकत जायकम ज्ञान/गुण वाला व्यक्ति अधिक दिखावा करता है।थोड़ा-सा धन क्या आ गया, वह तो इठलाने लगा; सच है — अधजल गगरी छलकत जाय
2अपनी करनी पार उतरनीमनुष्य को अपने कर्मों का ही फल मिलता है।परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने पर दूसरों को दोष मत दो, क्योंकि अपनी करनी पार उतरनी
3आम के आम गुठलियों के दामदोहरा लाभ होना।पुरानी कार अच्छे दामों में बिकी और नई भी सस्ती मिल गई, इसे कहते हैं — आम के आम गुठलियों के दाम
4उल्टा चोर कोतवाल को डाँटेअपना अपराध स्वीकार न करके उल्टा पूछने वाले को दोष देना।गलती तुमने की और आँखें मुझे दिखा रहे हो! यह तो वही बात हुई — उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे
5एक पंथ दो काजएक ही उपाय से दो कार्य सिद्ध होना।दिल्ली जाकर परीक्षा भी दे दी और रिश्तेदार से भी मिल आया; इसे कहते हैं — एक पंथ दो काज
6ऊँट के मुँह में जीराआवश्यकता से बहुत कम वस्तु का मिलना।दो रोटियाँ पहलवान की भूख मिटाने के लिए ऊँट के मुँह में जीरा के समान हैं।
7कंगाली में आटा गीलामुसीबत पर और मुसीबत आना।नौकरी छूट ही गई थी कि बीमारी का खर्च भी आ गया, यानी कंगाली में आटा गीला
8कहीं का ईंट कहीं का रोड़ा, भानुमति ने कुनबा जोड़ाअनमेल वस्तुओं या बेमेल चीजों को एक जगह एकत्र करना।बिना किसी योजना के बनाई गई यह समिति केवल भानुमति का कुनबा है।
9काला अक्षर भैंस बराबरबिलकुल अनपढ़ होना।उसके सामने पुस्तक रखना व्यर्थ है, उसके लिए तो काला अक्षर भैंस बराबर है।
10खिसियानी बिल्ली खंभा नोचेअपनी असफलता या शर्म छिपाने के लिए व्यर्थ गुस्सा करना।प्रतियोगिता में हारने के बाद वह निर्णायकों को दोष देने लगा, मानो खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे
11गरजने वाले बादल बरसते नहींकेवल डींग हाँकने वाले वास्तव में काम नहीं करते।वह केवल बातें बनाता है, करेगा कुछ नहीं; क्योंकि गरजने वाले बादल बरसते नहीं
12घर का भेदी लंका ढाएआपसी फूट/घर का भेद जानने वाला सर्वनाश का कारण बनता है।विभीषण की तरह घर का भेदी लंका ढाए वाली कहावत यहाँ चरितार्थ होती है।
13चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाएअत्यधिक कंजूस होना।वह बीमार होने पर भी दवाई नहीं खरीदता, उसके लिए तो चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए
14चिराग तले अँधेराअपनी बुराई या दोष स्वयं न दिखना / निकटस्थ व्यक्ति का लाभ से वंचित रहना।शिक्षक का अपना बेटा ही पढ़ाई में कमजोर है, इसे कहते हैं — चिराग तले अँधेरा
15चोर की दाढ़ी में तिनकाअपराधी सदैव सशंकित / आशंकित रहता है।पुलिस को देखते ही वह घबरा गया, सच ही कहा है — चोर की दाढ़ी में तिनका
16जल में रहकर मगर से बैरआश्रयदाता या शक्तिशाली व्यक्ति से शत्रुता करना।अपने अधिकारी से झगड़ा मत करो, जल में रहकर मगर से बैर ठीक नहीं।
17जिसकी लाठी उसकी भैंसबलवान / शक्ति संपन्न व्यक्ति की ही विजय होती है।दबंगों ने गरीब की जमीन हड़प ली, सच है — जिसकी लाठी उसकी भैंस
18दूर के ढोल सुहावने लगते हैंदूर से देखने पर वस्तुएँ/स्थितियाँ आकर्षक लगती हैं।विदेश में रहने की बातें अच्छी लगती हैं, परंतु दूर के ढोल सुहावने ही होते हैं
19नाच न जाने आँगन टेढ़ाअपनी अयोग्यता छिपाने के लिए दूसरों या साधनों को दोष देना।काम करना आता नहीं और औजारों को खराब बता रहा है — नाच न जाने आँगन टेढ़ा
20हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े लिखे को फारसी क्याप्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती।अपनी क्षमता साबित करने के लिए काम करके दिखाओ, हाथ कंगन को आरसी क्या

5. विषयवार वर्गीकृत लोकोक्तियाँ (Categorized Proverbs)

(A) ज्ञान व गुण से संबंधित

  • अधजल गगरी छलकत जाय: कम ज्ञान वाला अधिक प्रदर्शन करता है।

  • नीम हकीम खतरे जान: अधूरा ज्ञान खतरनाक होता है।

(B) कर्म व भाग्य से संबंधित

  • बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय: जैसा कर्म करोगे वैसा ही फल मिलेगा।

  • जैसा नागनाथ वैसे सांपनाथ: दो समान रूप से बुरे व्यक्ति।

6. विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्न (Previous Year Solved MCQs)

Q1. 'काठ की हाँडी बार-बार नहीं चढ़ती' लोकोक्ति का सही अर्थ है: (UP Police Constable)

  • (A) बुरे दिन हमेशा नहीं रहते

  • (B) छल-कपट का व्यवहार हमेशा नहीं चलता

  • (C) लकड़ी का बर्तन अग्नि से जल जाता है

  • (D) दुर्भाग्य की मार बार-बार नहीं होती

    उत्तर: (B) छल-कपट का व्यवहार हमेशा नहीं चलता

Q2. 'अधजल गगरी छलकत जाय' क्या है? (UPSSSC VDO / PET)

  • (A) पदबंध

  • (B) मुहावरा

  • (C) लोकोक्ति

  • (D) शब्द-युग्म

    उत्तर: (C) लोकोक्ति (यह एक पूर्ण वाक्य है)

Q3. 'अपनी करनी पार उतरनी' का अर्थ है: (UPSI)

  • (A) दूसरे के कर्म का फल भुगतना

  • (B) अपने कर्म का फल स्वयं भोगना पड़ता है

  • (C) दान करने से सफलता मिलती है

  • (D) चालाकी से काम निकालना

    उत्तर: (B) अपने कर्म का फल स्वयं भोगना पड़ता है

7. अभ्यास प्रश्नोत्तरी (Practice Quiz for Exams)

  1. 'आम के आम गुठलियों के दाम' लोकोक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

  2. लोकोक्ति और मुहावरे में एक प्रमुख व्याकरणिक अंतर बताइए।

  3. 'नाच न जाने आँगन टेढ़ा' कहावत का प्रयोग किस परिस्थिति में किया जाता है?

उत्तर कुंजी (Self Check):

  1. दोहरा लाभ होना

  2. लोकोक्ति एक पूर्ण वाक्य होती है, जबकि मुहावरा एक वाक्यांश होता है।

  3. जब कोई व्यक्ति अपनी कमी या अयोग्यता छिपाने के लिए साधनों/दूसरों को दोष देता है।




क्र. सं.
लोकोक्तिअर्थ
1अरहर की टट्टी गुजराती तालाछोटी वस्तु की सुरक्षा में अधिक खर्च करना
2आसमान से गिरा खजूर पर अटकाएक समस्या से निकलकर दूसरी में फँसना
3अंधेर नगरी चौपट राजासब के सब मूर्ख (जैसा राजा वैसी ही प्रजा)
4ऊँची दुकान फीका पकवाननाम बहुत बड़ा, पर काम बहुत छोटा
5का बरखा जब कृषि सुखानेउचित समय बीत जाने पर सहायता मिलने का कोई लाभ न होना
6जैसा देश वैसा भेषपरिस्थिति के अनुसार ढल जाना
7दाल-भात में मूसलचंदअनावश्यक हस्तक्षेप करना
8न नौ मन तेल होगा, न राधा नाचेगीन बड़ी व्यवस्था हो पाएगी और न ही कार्य होगा
9नौ दिन चले अढ़ाई कोसबहुत धीमी गति से कार्य करना
10नाच न जाने आँगन टेढ़ाअपनी कमी को छिपाने के लिए दूसरों पर दोष लगाना
11मान न मान, मैं तेरा मेहमानजबरदस्ती किसी के गले पड़ना
12छछूँदर के सिर पर चमेली का तेलअयोग्य व्यक्ति को उच्च पद या वस्तु प्राप्त हो जाना
13दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँककर पीता हैएक बार नुकसान हो जाने पर व्यक्ति बहुत सोच-विचारकर कदम उठाता है
14दुधारू गाय की लात भी सहनी पड़ती हैजिससे बहुत लाभ होता हो, उसकी कुछ कमियों को नजरअंदाज करना
15दूध का दूध, पानी का पानीनिष्पक्ष और सच्चा न्याय करना
16देसी कौवा विलायती बोलबेमेल या अनहोना कार्य करना
17नेकी कर दरिया/नदी में डालभलाई करके भूल जाना चाहिए
18कछुआ की चाल चलनाअत्यधिक धीमी गति से कार्य करना
19नौ की लकड़ी नब्बे का खर्चकाम से अधिक उसकी सुरक्षा या रखरखाव पर खर्च होना
20नौ नगद न तेरह उधारनकद व्यवहार उधार के सौदे से बेहतर होता है
21पूत के पाँव पालने में ही नज़र आते हैंगुणवान व्यक्ति के लक्षण बचपन में ही दिखाई दे जाते हैं
22पत्थर को जोंक नहीं लगतीहठी या निर्दयी व्यक्ति पर किसी बात का प्रभाव नहीं पड़ता
23पढ़े फ़ारसी बेचे तेल, यह देखो कुदरत का खेलयोग्यता होने के बावजूद भाग्य साथ न देना या छोटा काम करना
24पर उपदेश कुशल बहुतेरेदूसरों को सीख देना आसान है, परंतु स्वयं अपनाना कठिन
25पल में तोला, पल में माशास्वभाव का बहुत जल्दी-जल्दी बदलना
26फिसल गए तो हर-हर गंगेअसावधानी से हुई गलती को भी अवसर में बदल लेना
27मुख में राम, बगल में छुरीदिखावटी मित्रता रखना और मौका मिलते ही नुकसान पहुँचाना
28बंदर क्या जाने अदरक का स्वादअज्ञानी व्यक्ति किसी वस्तु की असली विशेषता नहीं पहचान सकता
29बालू की भीतिअत्यधिक अस्थिर या क्षणभंगुर वस्तु
30बासी बचे न कुत्ता खाएजरूरत के अनुसार ही बहुत सीमित खर्च या प्रबंधन करना
31मुल्ला की दौड़ मस्जिद तकसीमित पहुँच या सीमित क्षेत्र तक ही कार्य कर पाना
32न रहेगा बाँस, न बजेगी बाँसुरीसमस्या के मूल कारण को ही समाप्त कर देना
33यथा नाम तथा गुणजैसा नाम हो, वैसा ही गुण या व्यवहार होना
34राम-राम जपना, पराया माल अपनाऊपर से धार्मिक या साधु बनना और मन में कपट रखना
35राम मिलाई जोड़ी, एक काना एक कोढ़ीदो एक जैसे अयोग्य या विचित्र लोगों का मेल होना
36लकीर का फ़कीर होनापुरानी परंपराओं और रीति-रिवाजों पर ही चलते रहना
37साँप भी मर जाए और लाठी भी न टूटेकाम भी पूरा हो जाए और कोई नुकसान भी न हो
38आँख का अंधा नाम नयनसुखगुणों के बिलकुल विपरीत नाम होना
39लड़कों में लड़का, बूढ़ों में बूढ़ाहर परिस्थिति और उम्र के लोगों में आसानी से घुल-मिल जाना
40ढाक के तीन पातस्थिति में कोई बदलाव न आना, ज्यों का त्यों बने रहना
41साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पापसत्य से बढ़कर कोई तपस्या नहीं और झूठ से बड़ा कोई पाप नहीं
42न सावन सूखा, न भादों हराहमेशा एक समान स्थिति में बने रहना
43हींग लगे न फिटकिरी, रंग चोखा ही आएबिना किसी खास खर्च के बेहतरीन परिणाम प्राप्त होना
44पेड़ से गिरा खजूर पर अटकाएक बड़ी मुसीबत से निकलकर दूसरी में फँस जाना
45सीधी अँगुली से घी नहीं निकलताअत्यधिक विनम्रता से कठिन कार्य पूरे नहीं होते
46रात पड़े उपासी, दिन में खोजे बासीअत्यधिक निर्धनता या कंगाली की स्थिति होना
47बिन माँगे मोती मिले, माँगे मिले न भीखभाग्य में हो तो बिना माँगे मिलता है, न हो तो माँगने पर भी नहीं मिलता
48भागते भूत की लँगोट ही सहीजहाँ सब कुछ डूब रहा हो, वहाँ जो थोड़ा-बहुत मिल जाए वही सही

प्रतियोगी परीक्षाओ के प्रश्न और उत्तर

20. 'कौओं के कोसे ढोर नहीं मरते।' लोकोक्ति का अर्थ है :

UPSSSC Junior Assistant 29 June 2025

(A) बुरे की बुराई से अच्छे को हानि न होना

(B) बुरा सदैव बुरा ही रहता है अच्छा नहीं होता

(C) काले लोगों के कारनामे से सफेद को हानि न होना

(D) पक्षियों से ढोर का नहीं मरना

(E) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Ans (A) बुरे की बुराई से अच्छे को हानि न होना

निष्कर्ष (Conclusion)

लोकोक्तियाँ जन-सामान्य के अनुभवों का निचोड़ हैं जो हिंदी भाषा को अधिक प्रामाणिक और प्रभावशाली बनाती हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में लोकोक्तियों से संबंधित प्रश्नों में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने के लिए प्रमुख कहावतों के अर्थ और वाक्य प्रयोग का नियमित अभ्यास करें। 

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