संदेश

सितंबर, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

संधि: परिभाषा, प्रकार, नियम और उदाहरण | संधि किसे कहते हैं

  Home > हिंदी > हिंदी व्याकारण   संधि: परिभाषा, प्रकार, नियम और उदाहरण - हिंदी व्याकरण की संपूर्ण गाइड यह हिंदी व्याकरण का मूलभूत और महत्वपूर्ण अध्याय है जो प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, SSC, CTET, राज्य PSCs) में अक्सर पूछा जाता है। यह दो शब्दों के मेल से नए शब्द बनाने की प्रक्रिया है। आइए, इसकी परिभाषा, प्रकारों, नियमों और उदाहरणों को विस्तार से समझें। संधि किसे कहते हैं शब्दों के मेल को संधि कहते है पहले शब्द का अंतिम वर्ण और दूसरे शब्द का प्रथम वर्ण  मिलकर संधि का निर्माण करते है उदाहरण विद्या + आलय = विद्यालय सचिव + आलय = सचिवालय देव + आलय = देवालय सत् + जन = सज्जन संधि के भेद इसके तीन प्रकार की होती हैं - स्वर संधि व्यंजन संधि विसर्ग संधि स्वर संधि दो स्वरों के मेल से होने वाले विकार को स्वर संधि कहा जाता है उदाहरण हिम + आलय = हिमालय मुनि + इंद्र = मुनींद्र विधु + उदय = विधूदय स्वर संधि के प्रकार इसके संधि पांच  प्रकार के होते है दीर्घ गुण वृद्धि यण आयदि संधि नियमों का सारांश संधि सूत्र उदाहरण दीर्घ अ/आ + अ/आ = आ महा + आत्मा = महात्मा गुण अ/आ + इ/ई = ए देव...

विभावना अलंकार क्या है? परिभाषा, विशेषताएं और 10+ उदाहरणों से समझें | Vibhavna Alankar

विभावना अलंकार: परिभाषा, प्रकार और उदाहरण   Home > हिंदी > हिंदी व्याकारण > अलंकार विभावना अलंकार क्या है? विभावना अलंकार हिंदी काव्य का एक विशेष अर्थालंकार है जिसमें बिना कारण के ही किसी विशेष परिणाम की उत्पत्ति दिखाई जाती है। यह अलंकार काव्य में चमत्कारिक प्रभाव उत्पन्न करता है। विभावना अलंकार की परिभाषा "जहाँ कारण के अभाव में ही किसी विशेष परिणाम की उत्पत्ति दिखाई जाए, वहाँ विभावना अलंकार होता है।" विभावना अलंकार की मुख्य विशेषताएं: कारण के बिना परिणाम की प्रस्तुति चमत्कारिक प्रभाव की उत्पत्ति काव्य को अद्भुत और रोचक बनाना पाठक की कल्पना शक्ति को उत्तेजित करना भावों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करना विभावना अलंकार के प्रकार: कारणाभाव विभावना हेतु विभावना कारणाभाव विभावना अलंकार जब कारण के अभाव में ही परिणाम दिखाया जाए। उदाहरण : "बिना बादल के बरसा जल" हेतु विभावना अलंकार जब कारण और परिणाम में असंगति हो। उदाहरण: "चंदन से आग लग गई" विभावना अलंकार के उदाहरण बिना बादल के बरसा जल चंदन से आग लग गई बिना धूप के खिले कमल बिना हवा के हिले पेड़ बिना तेल क...

विप्सा अलंकार क्या है? जानिए इस दुर्लभ अलंकार की पूरी जानकारी उदाहरण सहित

 विप्सा अलंकार: परिभाषा, विशेषताएं और उदाहरण | हिंदी व्याकरण   Home > हिंदी > हिंदी व्याकारण > अलंकार विप्सा अलंकार क्या है? विप्सा अलंकार हिंदी काव्य शास्त्र का एक दुर्लभ और विशिष्ट अर्थालंकार है जिसमें किसी वस्तु या व्यक्ति के प्रति अत्यधिक लालसा या ललक को व्यक्त किया जाता है। यह अलंकार मनुष्य की गहरी इच्छाओं और आकांक्षाओं को काव्यात्मक ढंग से प्रस्तुत करता है। विप्सा अलंकार की परिभाषा "जहाँ किसी वस्तु, व्यक्ति या स्थिति के प्रति अत्यधिक लालसा, तीव्र इच्छा या गहन आकांक्षा व्यक्त की जाए, वहाँ विप्सा अलंकार होता है।" विशेषताएं: अत्यधिक लालसा या ललक का वर्णन गहन भावनात्मक अभिव्यक्ति मनोवैज्ञानिक तत्वों का समावेश काव्य को भावुक और प्रभावशाली बनाना दुर्लभ प्रयोग वाला अलंकार अन्य उदाहरण "पानी-पानी करती वह प्यासी चकी, पर न मिला जल कहीं भी उसको" (पानी के लिए तीव्र लालसा) "दिन रात वह उस दर्शन को तरसता, पर देव न आए उसकी झोंपड़ी में" (दर्शन की लालसा) "खोजता फिरता वह सुख के सागर को, पर मिला केवल दुख की लहरें उसे" (सुख की तीव्र इच्छा) "चाहता...

वक्रोक्ति अलंकार क्या है? परिभाषा, प्रकार और 10+ उदाहरणों से समझें

 वक्रोक्ति अलंकार: परिभाषा, प्रकार और उदाहरण | पूरी जानकारी   Home > हिंदी > हिंदी व्याकारण > अलंकार वक्रोक्ति अलंकार क्या है? वक्रोक्ति अलंकार हिंदी काव्य का एक विशेष अर्थालंकार है जिसमें शब्दों के टेढ़े या द्वयर्थी अर्थ निकाले जाते हैं। यह एक प्रकार की चतुराईपूर्ण अभिव्यक्ति है जहाँ वक्ता के कथन का सतही अर्थ और गहरा अर्थ अलग-अलग होता है। परिभाषा: "जहाँ शब्दों के दो अर्थ निकलें - एक सीधा स्पष्ट अर्थ और दूसरा टेढ़ा या व्यंग्यपूर्ण अर्थ, वहाँ वक्रोक्ति अलंकार होता है।" वक्रोक्ति अलंकार की विशेषताएँ: शब्दों के दोहरे अर्थ का प्रयोग चतुराईपूर्ण अभिव्यक्ति व्यंग्य या हास्य का तत्व सतही और गहरे अर्थ में अंतर काव्य को रोचक बनाना वक्रोक्ति अलंकार के प्रकार श्लेष वक्रोक्ति अर्थ वक्रोक्ति श्लेष वक्रोक्ति जब श्लेष (द्वयर्थी) शब्दों का प्रयोग हो। उदाहरण: "तुम मोहन कहलाओ या मधुसूदन कहलाओ" (मोहन - मोहित करने वाला/कृष्ण, मधुसूदन - मधु नामक राक्षस को मारने वाला/कृष्ण) अर्थ वक्रोक्ति जब वाक्य के अर्थ में चतुराई हो। उदाहरण: "राजा ने कहा - यह तो बहुत सुंदर है! मंत्री न...

अतिशयोक्ति अलंकार क्या है? परिभाषा, प्रकार और 10+ असरदार उदाहरण

 अतिशयोक्ति अलंकार: परिभाषा, प्रकार और प्रभावशाली उदाहरण   Home > हिंदी > हिंदी व्याकारण > अलंकार अतिशयोक्ति अलंकार क्या है? अतिशयोक्ति अलंकार हिंदी काव्य का एक प्रमुख अर्थालंकार है जिसमें किसी वस्तु, व्यक्ति या स्थिति का वर्णन वास्तविकता से कहीं अधिक बढ़ा-चढ़ाकर किया जाता है। यह अलंकार काव्य को अधिक प्रभावशाली और रोचक बनाता है। अतिशयोक्ति अलंकार की परिभाषा "जहाँ किसी वस्तु या व्यक्ति का वर्णन सामान्य सीमा से अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर किया जाए, वहाँ अतिशयोक्ति अलंकार होता है।" अतिशयोक्ति अलंकार की विशेषताएँ: वास्तविकता से परे वर्णन प्रभाव बढ़ाने के लिए उपयोग कल्पना शक्ति का विस्तार काव्य को रोचक बनाना भावों को तीव्रता से व्यक्त करना अतिशयोक्ति अलंकार के प्रकार यह दो प्रकार का होता है मात्रात्मक अतिशयोक्ति गुणात्मक अतिशयोक्ति मात्रात्मक अतिशयोक्ति जब मात्रा या संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाए। उदाहरण: "सहस्र बाहु भुजा लंबी करौ" गुणात्मक अतिशयोक्ति जब किसी के गुणों को असामान्य रूप से बढ़ाकर दिखाया जाए। उदाहरण: "उसकी मुस्कान से सारा उजाला हो गया" ...

विरोधाभास अलंकार क्या है? परिभाषा, विशेषताएँ और 10+ प्रभावशाली उदाहरण

 विरोधाभास अलंकार: विपरीत का सामंजस्य   Home > हिंदी > हिंदी व्याकारण > अलंकार विरोधाभास अलंकार क्या है? विरोधाभास अलंकार हिंदी काव्य का एक विशेष अर्थालंकार है जिसमें दो विरोधी या परस्पर विपरीत अर्थ वाले शब्दों का प्रयोग करके एक गहन और चमत्कारिक अर्थ प्रकट किया जाता है। यह अलंकार काव्य को विशिष्ट गहराई प्रदान करता है। विरोधाभास अलंकार की परिभाषा "जहाँ विरोधी अर्थ वाले शब्दों के प्रयोग से एक नया, गहन और सार्थक अर्थ उत्पन्न हो, वहाँ विरोधाभास अलंकार होता है।" विरोधाभास अलंकार की विशेषताएँ: विपरीत अर्थ वाले शब्दों का प्रयोग सतही तौर पर विरोधी लेकिन गहरे अर्थ में सार्थक चमत्कारिक अर्थ की उत्पत्ति काव्य को गहराई और विशिष्टता प्रदान करना विरोधाभास अलंकार के प्रकार शाब्दिक विरोधाभास आभासी विरोधाभास शाब्दिक विरोधाभास जब शब्दों का सतही अर्थ विरोधी हो। उदाहरण: "मरना वही जो जिएँ दिन दस" आभासी विरोधाभास जहाँ विरोध केवल आभासी हो। उदाहरण : "अन्धकार ही प्रकाश है" 10+ उदाहरण सहित समझें "जिसको न निज गौरव तथा निज देश पर अभिमान वह नर नहीं, नर पशु निरा है और म...

पुनरुक्ति अलंकार क्या है? परिभाषा, प्रकार और 10+ प्रभावी उदाहरण

 पुनरुक्ति अलंकार: परिभाषा, प्रकार और उदाहरण पुनरुक्ति अलंकार क्या है?   Home > हिंदी > हिंदी व्याकारण > अलंकार पुनरुक्ति अलंकार हिंदी काव्य का एक प्रमुख शब्दालंकार है जिसमें एक ही शब्द या शब्द समूह की पुनरावृत्ति से काव्य में लय और सौंदर्य उत्पन्न किया जाता है। यह अलंकार काव्य को संगीतमय और प्रभावशाली बनाता है। पुनरुक्ति अलंकार की परिभाषा "जहाँ एक ही शब्द या शब्द समूह की बार-बार आवृत्ति से काव्य में विशेष प्रभाव उत्पन्न हो, वहाँ पुनरुक्ति अलंकार होता है।" पुनरुक्ति अलंकार की विशेषताएँ: शब्दों या वाक्यांशों की पुनरावृत्ति काव्य में लय और संगीतात्मकता उत्पन्न करना भावों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करना काव्य को यादगार बनाना पाठक पर स्थायी प्रभाव छोड़ना पुनरुक्ति अलंकार के प्रकार शुद्ध पुनरुक्ति विवर्ती पुनरुक्ति शुद्ध पुनरुक्ति जब एक ही शब्द की बार-बार आवृत्ति हो। उदाहरण: बार-बार बारिश हो रही है विवर्ती पुनरुक्ति जब थोड़े बदले हुए रूप में शब्द की पुनरावृत्ति हो। उदाहरण: धीरे-धीरे धीमे स्वर में अन्य उदाहरण धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय जाते-जाते वह मुड़कर देखता रहा ...

मानवीकरण अलंकार क्या है? परिभाषा, विशेषताएँ और 10+उदाहरण

 मानवीकरण अलंकार: प्रकृति को मानव रूप देने की काव्यात्मक शैली   Home > हिंदी > हिंदी व्याकारण > अलंकार मानवीकरण अलंकार क्या है? मानवीकरण अलंकार हिंदी काव्य का एक विशेष अर्थालंकार है जिसमें निर्जीव वस्तुओं, प्रकृति या पशु-पक्षियों को मानवीय गुण, भाव या क्रियाएँ प्रदान की जाती हैं। यह अलंकार काव्य को सजीव और रोचक बनाता है। मानवीकरण अलंकार की परिभाषा "जहाँ निर्जीव वस्तुओं, प्रकृति या जीव-जंतुओं को मानव के समान सोचने, बोलने या कार्य करने की क्षमता दी जाए, वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।" मानवीकरण अलंकार की विशेषताएँ: निर्जीव वस्तुओं को जीवित बनाना प्रकृति को मानवीय भाव देना पशु-पक्षियों को मानवीय विचारशक्ति प्रदान करना काव्य को सजीव और रोचक बनाना मानवीकरण अलंकार के प्रकार पूर्ण मानवीकरण आंशिक मानवीकरण पूर्ण मानवीकरण जब निर्जीव वस्तु को पूर्णतः मानव के समान व्यवहार करते हुए दिखाया जाए। उदाहरण : "बादल बोले गरज-गरज कर" आंशिक मानवीकरण जब केवल किसी एक मानवीय गुण को प्रदर्शित किया जाए। उदाहरण: "पेड़ों ने हिल-हिल कर हमें बुलाया" 10+ उदाहरण सहित समझें चाँदनी ...

अनुप्रास अलंकार क्या है? | Anupras Aalankar

 अनुप्रास अलंकार: परिभाषा, प्रकार और उदाहरण | पूर्ण मार्गदर्शिका   Home > हिंदी > हिंदी व्याकारण > अलंकार अनुप्रास अलंकार क्या है अनुप्रास अलंकार हिंदी साहित्य का एक प्रमुख शब्दालंकार है, जिसमें एक ही वर्ण या वर्ण समूह की आवृत्ति से काव्य में लय और मधुरता उत्पन्न होती है। यह काव्य को संगीतमय और प्रभावशाली बनाता है। परिभाषा "जहाँ एक ही वर्ण की बार-बार आवृत्ति हो, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।" अनुप्रास अलंकार के प्रकार यह 6 प्रकार का होता है छेकानुप्रास अलंकार वृत्यानुप्रास अलंकार लाटानुप्रास अलंकार अन्त्यानुप्रास अलंकार श्रुत्यानुप्रास अलंकार छेकानुप्रास जब स्वरूप और उच्चारण में समान वर्णों की पुनरावृत्ति हो। उदाहरण: "तरनि-तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए।" वृत्यानुप्रास "जब समान वर्णों का प्रयोग विशेष रीति से किया जाए।" उदाहरण: "मुदित महीपति मंदिर आए।"   लाटानुप्रास "जब एक ही शब्द की बार-बार आवृत्ति हो।" उदाहरण:  "जय जय जय जय जय जय जय हे।" श्रुत्यानुप्रास जब समान ध्वनि वाले भिन्न वर्णों का प्रयोग हो। उदाहरण: "घन ...

रूपक अलंकार क्या है? परिभाषा, प्रकार और 10+ सटीक उदाहरणों से समझें | Rupak Alankar ke Udaharan

 रूपक अलंकार: परिभाषा, प्रकार और प्रभावशाली उदाहरण रूपक अलंकार क्या है? रूपक अलंकार हिंदी काव्यशास्त्र का एक प्रमुख अर्थालंकार है जिसमें उपमेय और उपमान में अभेद (एकरूपता) दर्शाया जाता है। यह उपमा अलंकार का ही विकसित रूप माना जाता है।  रूपक अलंकार की परिभाषा "जहाँ उपमेय को ही उपमान बना दिया जाए अर्थात दोनों में अभेद दर्शाया जाए, वहाँ रूपक अलंकार होता है।"  रूपक अलंकार की विशेषताएँ: उपमेय और उपमान में पूर्ण समानता वाचक शब्द (जैसे, सा, सम) का अभाव अभेदार्थक प्रयोग रूपक अलंकार के प्रकार यह अलंकार दो प्रकार का होता है संपूर्ण रूपक अंश रूपक संपूर्ण रूपक जब वाक्य में पूर्ण अभेद दिखाया जाए। उदाहरण: "चरण कमल बंदौं हरि राई" अंश रूपक जब वाक्य के किसी एक अंश में ही रूपक हो। उदाहरण: "मुख चन्द्रमा और नयन कमल हैं" रूपक अलंकार के 10 उदाहरण 1. पायो जी मैंने राम रतन धन पायो 2. बीती विभावरी जाग री 3. मोर मुकुट मकराकृत 4. नभ सितारों से जड़ा आसन 5. हैं हाथी विशालकाय 6. नीलकंठ कंठ उसका 7. बाल घटा घने 8. वाणी मधु मधुर 9. गति बिजली तीव्र 10. हृदय सागर विशाल 11. चरण कमल बंदौ हरि र...

यमक अलंकार | Yamak Alankar

यमक अलंकार :-   Home > हिंदी > हिंदी व्याकारण > अलंकार यमक शब्द का अर्थ होता है दो, जब एक ही शब्द ज्यादा बार प्रयोग हो, पर हर बार अर्थ अलग-अलग आये वहाँ पर यमक अलंकार होता है। एक शब्द एक से अधिक बार आता है वहाँ यमक अलंकार होता है यमक अलंकार के उदाहरण "कनक कनक ते सौ गुनी , मादकता अधिकाय। या खाये बौराय, जग वा पाये बौराय।" नोट:- कनक शब्द का प्रयोग दो बार हुआ है पहले कनक शब्द का अर्थ है धतूरा  दुसरे कनक शब्द का अर्थ है सोना  "राम राम, रामचरितमानस पढ़ो" नोट:- घटा शब्द का प्रयोग दो बार हुआ है पहले राम शब्द का अर्थ है राम का नाम दुसरे राम शब्द का अर्थ है राम की कृति "काली घटा का घमंड घटा, नभ मंडल तारक वृंद खिले" नोट:- घटा शब्द का प्रयोग दो बार हुआ है पहले घटा शब्द का अर्थ है बादल दुसरे घटा शब्द का अर्थ है घटना अर्थात कम होना "बादल बरसा, बरसा बादल" नोट:- बरसा शब्द का प्रयोग दो बार हुआ है पहले बरसा शब्द  क्रिया के रूप में दुसरे बरसा शब्द क्रिया विशेषण के रूप में "रति-रति सोभा सब रति के सरीर की" नोट:- रति शब्द का प्रयोग तीन बार ह...

श्लेष अलंकार क्या है? परिभाषा, उदाहरण, भेद | Shlesh Alankar

 श्लेष अलंकार: परिभाषा, प्रकार और उदाहरण   Home > हिंदी > हिंदी व्याकारण > अलंकार  श्लेष अलंकार क्या है? श्लेष अलंकार हिंदी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण अलंकार है, जिसमें  एक शब्द के एक से अधिक अर्थ निकलते हैं। यह शब्दालंकार का प्रकार है, जहाँ एक ही शब्द अलग-अलग संदर्भों में विभिन्न अर्थ देता है। श्लेष अलंकार की परिभाषा "जहाँ एक शब्द का प्रयोग होने पर उसके कई अर्थ निकलें, वहाँ श्लेष अलंकार होता है।" श्लेष अलंकार के प्रकार श्लेष अलंकार दो प्रकार का होता है। शब्द-श्लेष अर्थ-श्लेष शब्द-श्लेष जब एक ही शब्द के कई अर्थ निकलते हैं, लेकिन उसका उच्चारण समान रहता है। उदाहरण "रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।  पानी गए न ऊबरै, मोती मानुष चून।" यहाँ "पानी" शब्द के तीन अर्थ हैं: पहले पानी शब्द का अर्थ है जल (पानी) दुसरे पानी शब्द का अर्थ है इज्जत (मान-सम्मान) तीसरे पानी शब्द का अर्थ है चमक (मोती की आभा) अर्थ-श्लेष जब एक ही वाक्य में दो अलग-अलग अर्थ निकलते हैं। उदाहरण "कनक-कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय। वा खाये बौराय नर, या पाए बौराय।" यहाँ " कनक ...

उपमा अलंकार क्या है? परिभाषा, प्रकार और 10+ आसान उदाहरणों से समझें

 उपमा अलंकार: परिभाषा, प्रकार और रोचक उदाहरण   Home > हिंदी > हिंदी व्याकारण > अलंकार उपमा अलंकार क्या है? उपमा अलंकार हिंदी काव्यशास्त्र का एक प्रमुख अर्थालंकार है जिसमें किसी वस्तु या व्यक्ति की तुलना किसी अन्य प्रसिद्ध वस्तु से की जाती है। यह काव्य को सजीव और प्रभावशाली बनाता है। उपमा अलंकार की परिभाषा "जहाँ किसी व्यक्ति या वस्तु की समानता किसी अन्य प्रसिद्ध व्यक्ति या वस्तु से दर्शाई जाए, वहाँ उपमा अलंकार होता है।" उपमा अलंकार के अंग उपमा अलंकार के चार अंग है उपमेय: ⇒ जिसकी उपमा दी जाए उपमान: ⇒ जिससे उपमा दी जाए साधारण धर्म: ⇒ समानता का आधार वाचक शब्द: ⇒ जैसे, सा, सम, सी आदि उपमा अलंकार के प्रकार यह दो प्रकार का होता है पूर्णोपमा लुप्तोपमा पूर्णोपमा जब उपमा के सभी चारों अंग उपस्थित हों। उदाहरण : "सागर-सा गंभीर हृदय हो, गिरी-सा ऊँचा हो जिसका मन" लुप्तोपमा जब उपमा का कोई एक अंग लुप्त हो। उदाहरण : "चरण कमल बंदौं हरि राई" (यहाँ वाचक शब्द लुप्त है) उपमा के उदाहरण "मुख चंद्रमा-सा सुंदर है" "नीलकंठ-सा कंठ उसका" "हैं हाथी-सा...

उत्प्रेक्षा अलंकार क्या है? परिभाषा, प्रकार और 10+ उदाहरण | Utpreksha Alankar ke Udaharan

 उत्प्रेक्षा अलंकार: परिभाषा, प्रकार और प्रभावी उदाहरण   Home > हिंदी > हिंदी व्याकारण > अलंकार उत्प्रेक्षा अलंकार क्या है? उत्प्रेक्षा अलंकार हिंदी काव्य का एक प्रमुख अर्थालंकार है, जिसमें किसी वस्तु या व्यक्ति के बारे में संदेह या कल्पना व्यक्त की जाती है। इसमें उपमेय को उपमान मान लिया जाता है, परंतु वास्तविकता नहीं होती। उत्प्रेक्षा अलंकार परिभाषा: "जहाँ उपमेय में उपमान का आभास हो, किंतु वास्तविक समानता न हो, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।" उत्प्रेक्षा अलंकार के प्रमुख वाचक शब्द मनु (मानो) मनाक (जैसे) इव (मानो) जानो शायद उत्प्रेक्षा अलंकार के प्रकार साधारण उत्प्रेक्षा विभावना उत्प्रेक्षा असंगत उत्प्रेक्षा साधारण उत्प्रेक्षा जब वाक्य में सीधे संदेह या कल्पना व्यक्त की जाए। उदाहरण: "सखि सो सुंदर मुख मनु चंद्रमा है।" विभावना उत्प्रेक्षा जब कारण के बिना ही कल्पना की जाए। उदाहरण: "प्यासे मृग की तृषा मनु, यह मोरनी आई है।" असंगत उत्प्रेक्षा जहाँ उपमेय और उपमान में कोई तार्किक संबंध न हो। उदाहरण: "वह नाचती मनु बिजली है।" उत्प्रेक्षा अलंका...

alankar

  Home > हिंदी > हिंदी व्याकारण   शब्दा अलंकार अनुप्रास अलंकार यमक अलंकार श्लेष अलंकार अर्था अलंकार उपमा अलंकार रूपक अलंकार उत्प्रेक्षा अलंकार अन्योक्ति अलंकार मानवीकरण अलंकार पुनरुक्ति अलंकार विरोधाभास अलंकार अतिशयोक्ति अलंकार विप्सा अलंकार विभावना अलंकार

अन्योक्ति अलंकार क्या है? परिभाषा, प्रकार और 10+ उदाहरणों से समझें | Anyokti Alankar

  Home > हिंदी > हिंदी व्याकारण  > अलंकार अन्योक्ति अलंकार: परिभाषा, प्रकार और उदाहरण अन्योक्ति अलंकार क्या है? अन्योक्ति अलंकार हिंदी काव्य का एक अर्थालंकार है, जिसमें किसी वस्तु, प्राणी या प्राकृतिक घटना के माध्यम से मनुष्य को संदेश दिया जाता है। यह एक प्रकार का प्रतीकात्मक या व्यंग्यात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम है, जिसमें सीधे कहने के बजाय इशारों में बात कही जाती है। परिभाषा: "जहाँ किसी निर्जीव वस्तु, पशु-पक्षी या प्रकृति के माध्यम से मनुष्य को कोई संदेश, शिक्षा या व्यंग्य किया जाए, वहाँ अन्योक्ति अलंकार होता है।" अन्योक्ति अलंकार के प्रकार प्रतीकात्मक अन्योक्ति अलंकार व्यंग्यात्मक अन्योक्ति अलंकार 1. प्रतीकात्मक अन्योक्ति अलंकार जहाँ प्रकृति या वस्तुओं के माध्यम से गहरा संदेश दिया जाता है। उदाहरण: "कोयल काको संदेशा, कहि जात कुहुक-कुहुक" (यहाँ कोयल के माध्यम से प्रेमी-प्रेमिका का संदेश दिया गया है।) 2. व्यंग्यात्मक अन्योक्ति अलंकार जहाँ किसी वस्तु या जीव के माध्यम से मनुष्य की कमियों पर व्यंग्य किया जाता है। उदाहरण: "कागा काको धन हरै, कोयल काको देत। ...