स्वर वर्ण (Swar Varn - अच्): परिभाषा, प्रकार, उच्चारण स्थान, लिंग भेद और Short Tricks | प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष
यदि आप UPP (UP Police Constable/SI), UPSI, UPSSSC (PET/VDO/Lekhpal), SSC (GD), UPTET या SUPERTET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो हिंदी व्याकरण का आधार 'स्वर वर्ण' (Swar Varn / अच्) सबसे महत्वपूर्ण विषय है। वर्णमाला के अंतर्गत केवल स्वर वर्णों से संबंधित 2 से 3 प्रश्न सीधे तौर पर पूछे जाते हैं।
आपके द्वारा दिए गए कच्चे विवरण (Draft) को यहाँ परीक्षा के दृष्टिकोण से पूर्णतः प्रामाणिक, सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक वर्गीकरण के साथ प्रस्तुत किया गया है ताकि आपका एक भी प्रश्न गलत न हो।
1. स्वर वर्ण किसे कहते हैं?
परिभाषा: "जिन ध्वनियों के उच्चारण में किसी अन्य ध्वनि का सहारा न लेना पड़े और जिनका उच्चारण स्वतंत्र रूप से किया जा सके, उन्हें स्वर वर्ण कहते हैं।"
संस्कृत में स्वरों को 'अच्' कहा जाता है।
स्वरों की संख्या: मानक हिंदी में स्वरों की संख्या 11 होती है → (
अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ)।मात्राओं की संख्या: स्वर मात्राओं की संख्या 10 होती है (क्योंकि 'अ' स्वर की कोई अलग मात्रा चिन्ह नहीं होती, इसे उदासीन स्वर या अदृश्य स्वर कहते हैं)।
2. स्वरों का वर्गीकरण
प्रतियोगी परीक्षाओं में स्वरों का वर्गीकरण 6 मुख्य आधारों पर पूछा जाता है:
- उत्पत्ति / रचना के आधार पर भेद (2 भेद)
- कालमान / मात्रा / उच्चारण समय के आधार पर भेद (3 भेद)
- उच्चारण स्थान के आधार पर भेद (6 भेद)
- जीभ (जिह्वा) के प्रयोग के आधार पर भेद (3 भेद)
- ओष्ठ (होंठों) के प्रयोग के आधार पर भेद (2 भेद)
- मुख विवर / मुख आकृति के आधार पर भेद (4 भेद)
(I) उत्पत्ति / रचना के आधार पर भेद (2 भेद)
- उत्पत्ति के आधार पर स्वर के दो मुख्य भेद होते हैं:
मूल स्वर (4): जिनमें केवल एक ही ध्वनि होती है और जो स्वतंत्र होते हैं।
वर्ण:
अ, इ, उ, ऋ
संधि स्वर (7): जो दो ध्वनियों/स्वरों के मेल से बनते हैं।
वर्ण:
आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ
संधि स्वर के 2 उपभेद होते हैं:
A. मूल दीर्घ स्वर (सजातीय स्वर) - 3: दो एक समान (सजातीय) मूल स्वरों के मेल से बनते हैं।
- अ + अ = आ
- इ + इ = ई
- उ + उ = ऊ
B. संयुक्त स्वर / मिश्रित स्वर (विजातीय स्वर) - 4: दो भिन्न (विजातीय) स्वरों के मेल से बनते हैं।
- अ + इ = ए
- अ + ए = ऐ
- अ + उ = ओ
- अ + ओ = औ
(II) कालमान / मात्रा / उच्चारण समय के आधार पर भेद (3 भेद)
- मात्रा की परिभाषा: स्वरों के उच्चारण में लगने वाले समय को मात्रा कहते हैं।
ह्रस्व स्वर (मूल / एकमात्रिक / लघु स्वर):
- जिन स्वरों के उच्चारण में सबसे कम समय लगता है।
अ, इ, उ, ऋदीर्घ स्वर (द्विमात्रिक / गुरु / संधि स्वर):
जिन स्वरों के उच्चारण में ह्रस्व से दुगुना समय लगता है।
संख्या (7):
आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ
प्लुत स्वर (त्रिमात्रिक स्वर):
जिन स्वरों के उच्चारण में तीन मात्राओं का (दीर्घ से अधिक) समय लगता है।
उदाहरण:
ॐ,राम!
(III) उच्चारण स्थान के आधार पर भेद (6 भेद)
हिंदी में स्वरों के उच्चारण स्थान के आधार पर 6 भेद होते हैं:
| उच्चारण स्थान | स्वर वर्ण | तकनीकी नाम |
| कंठ | अ, आ | कंठ्य स्वर |
| तालु | इ, ई | तालव्य स्वर |
| मूर्धा | ऋ | मूर्धन्य स्वर |
| ओष्ठ | उ, ऊ | ओष्ठ्य स्वर |
| कंठ-तालु | ए, ऐ (अ + इ के मेल से) | कंठतालव्य स्वर |
| कंठ-ओष्ठ | ओ, औ (अ + उ के मेल से) | कंठोष्ठ्य स्वर |
(IV) जीभ (जिह्वा) के प्रयोग के आधार पर भेद (3 भेद)
अग्र स्वर: जिन स्वरों के उच्चारण में जीभ का अगला भाग सक्रिय रहता है।
वर्ण:
इ, ई, ए, ऐ
मध्य स्वर (केंद्रीय स्वर): जिन स्वरों के उच्चारण में जीभ का मध्य भाग काम करता है।
वर्ण:
अ(नोट: मानक हिंदी व्याकरण में 'अ' मध्य स्वर है, आ पश्च स्वर के अंतर्गत आता है)
पश्च स्वर: जिन स्वरों के उच्चारण में जीभ का पिछला भाग काम करता है।
वर्ण:
आ, उ, ऊ, ओ, औ
(V) ओष्ठ (होंठों) के प्रयोग के आधार पर भेद (2 भेद)
वृत्तमुखी स्वर (Rounded): जिनके उच्चारण में होंठ गोल हो जाते हैं।
वर्ण (4):
उ, ऊ, ओ, औ
अवृत्तमुखी / अर्द्ध-वृत्तमुखी स्वर (Unrounded): जिनके उच्चारण में होंठ गोल न होकर फैलते हैं।
वर्ण (7):
अ, आ, इ, ई, ऋ, ए, ऐ
(VI) मुख विवर / मुख आकृति के आधार पर भेद (4 भेद)
विवृत स्वर (Open): जिनके उच्चारण में मुख पूरा खुलता है। → आ
अर्द्ध-विवृत स्वर (Half Open): जिनके उच्चारण में मुख आधा खुलता है। → अ, ऐ, औ
अर्द्ध-संवृत स्वर (Half Close): जिनके उच्चारण में मुख आधा बंद रहता है। → ए, ओ
संवृत स्वर (Close): जिनके उच्चारण में मुख लगभग बंद रहता है। → इ, ई, उ, ऊ
3. व्याकरण के अनुसार स्वर वर्णों का लिंग भेद
हिंदी व्याकरण में स्वरों को लिंग के आधार पर भी वर्गीकृत किया जाता है:
स्त्रीलिंग स्वर (3): इ, ई, ऋ (इन स्वरों से बने शब्द या प्रत्यय प्रायः स्त्रीलिंग का बोध कराते हैं)।
पुल्लिंग स्वर (7): आ, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ
(नोट: 'अ' स्वर को उदासीन माना जाता है, किन्तु व्यापक रूप में इसे पुल्लिंग वर्ग में भी गिना जाता है)।
4. परीक्षा हेतु Quick Revision Master Table
| वर्गीकरण का आधार | भेद के नाम | मुख्य वर्ण |
| उत्पत्ति आधार | मूल स्वर (4) | संधि स्वर (7) | मूल: अ, इ, उ, ऋ | संधि: आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ |
| मात्रा आधार | ह्रस्व (1) | दीर्घ (2) | प्लुत (3) | ह्रस्व: अ, इ, उ, ऋ | दीर्घ: आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ | प्लुत: ॐ |
| जिह्वा प्रयोग | अग्र | मध्य | पश्च | अग्र: इ, ई, ए, ऐ | मध्य: अ | पश्च: आ, उ, ऊ, ओ, औ |
| ओष्ठ प्रयोग | वृत्तमुखी | अवृत्तमुखी | वृत्त: उ, ऊ, ओ, औ | अवृत्त: अ, आ, इ, ई, ऋ, ए, ऐ |
| मुख विवर | संवृत | विवृत | अर्द्ध-संवृत | अर्द्ध-विवृत | विवृत: आ | संवृत: इ, ई, उ, ऊ | अर्द्ध-संवृत: ए, ओ |
| लिंग भेद | स्त्रीलिंग (3) | पुल्लिंग (7) | स्त्रीलिंग: इ, ई, ऋ | पुल्लिंग: आ, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ |
5. विगत वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Previous Year MCQs)
Q1. 'ए' और 'ऐ' का उच्चारण स्थान क्या है? (UP Police Constable)
(A) ओष्ठ्य
(B) कंठतालव्य
(C) मूर्धन्य
(D) कंठोष्ठ्य
उत्तर: (B) कंठतालव्य (अ [कंठ] + इ [तालु] = ए)
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा संयुक्त स्वर नहीं है? (UPSSSC PET)
(A) ए
(B) ऐ
(C) ऊ
(D) ओ
उत्तर: (C) ऊ ('ऊ' मूल दीर्घ स्वर है, जबकि ए, ऐ, ओ संयुक्त स्वर हैं)
Q3. हिंदी वर्णमाला में स्त्रीलिंग स्वर कौन-कौन से हैं? (UPSI / UPTET)
(A) अ, आ, इ
(B) इ, ई, ऋ
(C) उ, ऊ, ओ
(D) ए, ऐ, औ
उत्तर: (B) इ, ई, ऋ
Q4. 'अ' स्वर का उच्चारण स्थान एवं प्रकार क्या है? (SUPERTET)
(A) तालव्य - अग्र स्वर
(B) कंठ्य - मध्य स्वर
(C) ओष्ठ्य - पश्च स्वर
(D) मूर्धन्य - पश्च स्वर
उत्तर: (B) कंठ्य - मध्य स्वर
निष्कर्ष (Conclusion)
स्वर वर्ण हिंदी व्याकरण का हृदय हैं। यदि आप उत्पत्ति के नियम (सजातीय व विजातीय स्वर), उच्चारण स्थान (कंठतालव्य, कंठोष्ठ्य), जीभ व मुख आकृति आधारित वर्गीकरण और स्त्रीलिंग स्वरों (इ, ई, ऋ) के नियमों को इस व्यवस्थित चार्ट के माध्यम से याद रखेंगे, तो UPP, UPSI, UPSSSC, UPTET या SSC GD की परीक्षा में आपका स्वर वर्ण से जुड़ा कोई भी प्रश्न गलत नहीं होगा।
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