व्यंजन वर्ण (Vyanjan Varn): परिभाषा, भेद, वर्गीकरण, उच्चारण स्थान, संयुक्त ध्वनियाँ | प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष
यदि आप UPP (UP Police Constable/SI/ASI), UPSI, UPSSSC (PET/VDO/Lekhpal), SSC (GD), UPTET या SUPERTET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो हिंदी व्याकरण का आधार 'व्यंजन वर्ण' (Vyanjan Varn) सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक है। वर्णमाला के अंतर्गत केवल व्यंजन वर्णों से संबंधित 3 से 5 प्रश्न सीधे तौर पर पूछे जाते हैं।
आपके द्वारा दिए गए ड्राफ्ट को यहाँ परीक्षा के दृष्टिकोण से पूर्णतः प्रामाणिक, सुव्यवस्थित, त्रुटि-रहित और वैज्ञानिक वर्गीकरण के साथ प्रस्तुत किया गया है।
1. व्यंजन वर्ण किसे कहते हैं?
परिभाषा: "स्वरों की सहायता से बोले जाने वाले वर्णों (ध्वनियों) को व्यंजन वर्ण कहते हैं।"
विशेषता: इनके उच्चारण में फेफड़ों से आने वाली वायु मुख-विवर में रुकावट/बाधा के साथ बाहर निकलती है।
लिंग: हिंदी व्याकरण में सभी व्यंजन वर्ण लिंग की दृष्टि से पुल्लिंग होते हैं।
हलंत (्) का प्रयोग: शुद्ध व्यंजन वर्ण सदैव स्वर-रहित (जैसे:
क्, ख्, ग्) लिखे जाते हैं। जब इनमें 'अ' स्वर मिलता है, तब ये पूर्ण बनते हैं (जैसे:क् + अ = क)।
2. व्यंजनों की संख्या
प्रतियोगी परीक्षाओं में व्यंजनों की संख्या दो तरह से पूछी जाती है:
मूल व्यंजनों की संख्या (33):
स्पर्श व्यंजन (25) + अंतःस्थ व्यंजन (4) + ऊष्म व्यंजन (4) = 33
कुल व्यंजनों की संख्या (39):
मूल व्यंजन (33) + संयुक्त व्यंजन (4) + द्विगुण/उत्क्षिप्त व्यंजन (2) = 39
3. व्यंजन वर्णों के मुख्य भेद
व्यंजन वर्णों के मुख्य रूप से तीन भेद (मूल व्यंजन) होते हैं:
(I) स्पर्श व्यंजन (25 वर्ण)
परिभाषा: जिन व्यंजनों के उच्चारण में जीभ मुख के किसी-न-किसी भाग (कंठ, तालु, मूर्धा, दंत, ओष्ठ) को स्पर्श करती है।
इन्हें वर्गीय व्यंजन भी कहा जाता है क्योंकि इन्हें 5 वर्गों में बाँटा गया है:
| वर्ग | वर्ण | उच्चारण स्थान |
| क वर्ग | क, ख, ग, घ, ङ | कंठ (Throat) |
| च वर्ग | च, छ, ज, झ, ञ | तालु (Palate) |
| ट वर्ग | ट, ठ, ड, ढ, ण | मूर्धा (Roof of Mouth) |
| त वर्ग | त, थ, द, ध, न | दंत (Teeth) |
| प वर्ग | प, फ, ब, भ, म | ओष्ठ (Lips) |
(II) अंतःस्थ व्यंजन (4 वर्ण)
परिभाषा: जिन वर्णों का उच्चारण स्वर और व्यंजन के बीच (अंतः) स्थित होता है और वायु मुख में कुछ समय ठहरी रहती है।
वर्ण:
य, र, ल, वय ⇒ तालव्य (अर्धस्वर)
र ⇒ मूर्धन्य/वर्त्य (लुंठित/प्रकंपित व्यंजन)
ल ⇒ दंत्य/वर्त्य (पार्श्विक व्यंजन)
व ⇒ दंतोष्ठ्य (अर्धस्वर)
(III) ऊष्म / संघर्षी व्यंजन (4 वर्ण)
परिभाषा: जिन वर्णों के उच्चारण में हवा मुख में रगड़/संघर्ष खाकर गर्माहट (ऊष्मा) पैदा करती है।
वर्ण:
श, ष, स, हश ⇒ तालव्य
ष ⇒ मूर्धन्य
स ⇒ दंत्य/वर्त्य
ह ⇒ कंठ्य / स्वरयंत्रीय (काकल्य)
(IV) अन्य व्यंजन प्रकार (6 वर्ण)
संयुक्त व्यंजन (4): दो या दो से अधिक अलग-अलग व्यंजनों के मेल से बने वर्ण।
क्ष =
क् + षत्र =
त् + रज्ञ =
ज् + ञश्र =
श् + र
द्विगुण / उत्क्षिप्त / ताड़नजात व्यंजन (2):
ड़, ढ़(इन्हें नवीन/विकसित/संकर वर्ण भी कहा जाता है)।अनुनासिक / वर्गीय पंचमाक्षर (5):
ङ, ञ, ण, न, म(इनका उच्चारण नासिका और मुख दोनों से समान रूप से होता है)।
4. व्यंजनों का वैज्ञानिक वर्गीकरण
A. घोषत्व (कंपन) के आधार पर वर्गीकरण
स्वरतंत्रियों में कंपन या नाद/गूँज के आधार पर व्यंजन दो प्रकार के होते हैं:
सघोष (घोष):
जिन वर्णों के उच्चारण में स्वरतंत्री में कंपन या गूँज उत्पन्न होती है।
वर्ण: प्रत्येक वर्ग का 3रा, 4था, 5वाँ वर्ण + अंतःस्थ (
य, र, ल, व) +ह+ द्विगुण (ड़, ढ़) + सभी स्वर।वर्ण सूची:
ग, घ, ङ, ज, झ, ञ, ड, ढ, ण, द, ध, न, ब, भ, म, य, र, ल, व, ह
अघोष:
जिन वर्णों के उच्चारण में केवल श्वास (हवा) का प्रयोग होता है, कंपन नहीं होता।
वर्ण: प्रत्येक वर्ग का 1ला, 2रा वर्ण +
श, ष, स।वर्ण सूची:
क, ख, च, छ, ट, ठ, त, थ, प, फ, श, ष, स
B. प्राणत्व (हवा की मात्रा) के आधार पर वर्गीकरण
उच्चारण के समय मुख से निकलने वाली श्वास (हवा) की मात्रा के आधार पर व्यंजन दो प्रकार के होते हैं:
अल्पप्राण (कम हवा):
उच्चारण में कम श्वास निकलती है और स्वरतंत्रियाँ झंकृत नहीं होतीं।
संख्या: 19 (व्यंजन)
वर्ण: प्रत्येक वर्ग का 1ला, 3रा, 5वाँ वर्ण + अंतःस्थ (
य, र, ल, व) + द्विगुण (ड़) + (सभी स्वर भी अल्पप्राण होते हैं)।वर्ण सूची:
क, ग, ङ, च, ज, ञ, ट, ड, ण, त, द, न, प, ब, म, य, र, ल, व
महाप्राण (अधिक हवा):
उच्चारण में अधिक श्वास बलपूर्वक निकलती है।
संख्या: 14 (व्यंजन)
वर्ण: प्रत्येक वर्ग का 2रा, 4था वर्ण + ऊष्म (
श, ष, स, ह) + द्विगुण (ढ़)।वर्ण सूची:
ख, घ, छ, झ, ठ, ढ, थ, ध, फ, भ, श, ष, स, ह
C. प्रयत्न / उच्चारण की प्रकृति के आधार पर वर्गीकरण
| भेद का नाम | परिभाषा/विशेषता | संबंधित वर्ण |
| स्पर्श व्यंजन | उच्चारण में मुखांगों का पूर्ण स्पर्श होता है। | क, ख, ग, घ | ट, ठ, ड, ढ | त, थ, द, ध | प, फ, ब, भ (16 वर्ण) |
| स्पर्श-संघर्षी व्यंजन | स्पर्श के साथ-साथ घर्षण/संघर्ष भी होता है। | च, छ, ज, झ (4 वर्ण) |
| संघर्षी / ऊष्म | वायु घर्षण के साथ बाहर निकलती है। | श, ष, स, ह (4 वर्ण) |
| अनुनासिक / पंचमाक्षर | उच्चारण नासिका से होता है। | ङ, ञ, ण, न, म (5 वर्ण) |
| प्रकंपित / लुंठित | जीभ में कंपन होता है और जीभ लुढ़कती है। | र (1 वर्ण) |
| पार्श्विक व्यंजन | हवा जीभ के दोनों बग़ल (पार्श्व) से निकलती है। | ल (1 वर्ण) |
| अर्धस्वर व्यंजन | कभी स्वर तो कभी व्यंजन की भांति प्रयुक्त। | य, व (2 वर्ण) |
| उत्क्षिप्त / द्विगुण | जीभ का अग्रभाग झटके से ऊपर जाकर गिरता है। | ड़, ढ़ (2 वर्ण) |
D. उच्चारण स्थान के आधार पर मास्टर तालिका (Master Chart)
वर्णमाला के सभी वर्णों (स्वर + व्यंजन) के उच्चारण स्थान का संपूर्ण विवरण:
| उच्चारण स्थान | तकनीकी नाम | सम्मिलित स्वर व व्यंजन वर्ण |
| कंठ | कंठ्य | अ, आ, क, ख, ग, घ, ङ, ह, विसर्ग (अः) |
| तालु | तालव्य | इ, ई, च, छ, ज, झ, ञ, य, श |
| मूर्धा | मूर्धन्य | ऋ, ट, ठ, ड, ढ, ण, र, ष, ड़, ढ़ |
| दंत | दंत्य | त, थ, द, ध, न, ल, स |
| ओष्ठ | ओष्ठ्य | उ, ऊ, प, फ, ब, भ, म |
| दंत + ओष्ठ | दंतोष्ठ्य | व |
| कंठ + तालु | कंठतालव्य | ए, ऐ |
| कंठ + ओष्ठ | कंठोष्ठ्य | ओ, औ |
| नासिका | नासिक्य | अनुस्वार (अं), ङ, ञ, ण, न, म |
5. विशिष्ट वर्ण एवं उनकी उपाधियाँ (Exam Special Facts)
ह (H): कंठ्य, ऊष्म-संघर्षी, महाप्राण, सघोष, काकल्य वर्ण (स्वरयंत्रीय वर्ण)।
र (R): मूर्धन्य/वर्त्य, अंतःस्थ, सघोष, अल्पप्राण, लुंठित / प्रकंपित वर्ण।
ल (L): दंत्य/वर्त्य, अंतःस्थ, सघोष, अल्पप्राण, पार्श्विक वर्ण।
ड़, ढ़: उत्क्षिप्त / ताड़नजात / द्विगुण / नवीन निर्मित वर्ण।
अयोगवाह (अं, अः): ये न तो पूर्णतः स्वर हैं और न ही व्यंजन। (
अं= अनुस्वार,अः= विसर्ग)।
6. संयुक्त ध्वनियाँ (Cluster Sounds)
हिंदी में ध्वनियों के संयोजन के आधार पर 3 प्रमुख भेद होते हैं:
संयुक्ताक्षर ध्वनि:
जब दो या दो से अधिक व्यंजन एक ही स्वर के सहारे बोले जाते हैं।
उदाहरण:
ग्ला-नि ⇒
ग् + ल् + आ + न् + इप्रे-म ⇒
प् + र् + ए + म् + अ
द्वित्व ध्वनि / युग्मक ध्वनि:
जब एक ही समान (एक रूप) व्यंजन ध्वनि का दोहराव/दुरुक्ति होती है।
उदाहरण:
दि-ल्ली ⇒
द् + इ + ल् + ल् + ईप-क्का ⇒
प् + अ + क् + क् + आक-च्चा ⇒ क् + अ + च् + च् + आ
स-च्चा ⇒ स् + अ + च् + च् + आ
बच्चा ⇒ ब् + अ + च् + च् + आ
संपृक्त ध्वनि:
जब एक ध्वनि दो अलग-अलग व्यंजनों से जुड़ी (सटी) होती है (पहला व्यंजन स्वर-रहित और दूसरा स्वर-सहित)।
उदाहरण:
स-म्ब-ल ⇒
स् + अ + म् + ब् + अ + ल् + अ(यहाँ 'म्' ध्वनि 'स्' और 'ब' से जुड़ी है)उ-न्म-त्त ⇒
उ + न् + म् + अ + त् + त् + अ
7. परीक्षा हेतु Quick Revision Master Table
| श्रेणी | वर्ण सूची | कुल संख्या |
| स्पर्श व्यंजन | क-वर्ग से प-वर्ग तक | 25 |
| अंतःस्थ व्यंजन | य, र, ल, व | 4 |
| ऊष्म व्यंजन | श, ष, स, ह | 4 |
| मूल व्यंजन | स्पर्श (25) + अंतःस्थ (4) + ऊष्म (4) | 33 |
| संयुक्त व्यंजन | क्ष, त्र, ज्ञ, श्र | 4 |
| द्विगुण व्यंजन | ड़, ढ | 2 |
| कुल व्यंजन | मूल (33) + संयुक्त (4) + द्विगुण (2) | 39 |
8. विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्न (Previous Year MCQs)
Q1. स्पर्श व्यंजनों की कुल संख्या कितनी होती है? (UPP ASI)
(A) 25(B) 15
(C) 20
(D) 10
उत्तर: (A) 25
Q2. निम्नलिखित में से 'पार्श्विक व्यंजन' कौन-सा है? (UPP ASI)
(A) ह
(B) म
(C) ल
(D) ज
उत्तर: (C) ल
Q3. 'ह' वर्ण को व्याकरण में किस नाम से जाना जाता है? (UPSI / UPSSSC)
(A) लुंठित वर्ण
(B) काकल्य / स्वरयंत्रीय वर्ण
(C) पार्श्विक वर्ण
(D) द्विगुण वर्ण
उत्तर: (B) काकल्य / स्वरयंत्रीय वर्ण
Q4. 'दिल्ली' शब्द में किस प्रकार की ध्वनि का प्रयोग हुआ है? (UPTET)
(A) संयुक्ताक्षर ध्वनि
(B) युग्मक (द्वित्व) ध्वनि
(C) संपृक्त ध्वनि
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (B) युग्मक (द्वित्व) ध्वनि (समान व्यंजनों का दोहराव)
निष्कर्ष (Conclusion)
व्यंजन वर्ण हिंदी व्याकरण का अति-महत्वपूर्ण भाग है। यदि आप मूल व कुल व्यंजनों का अंतर (33 बनाम 39), उच्चारण स्थान की मास्टर टेबल, अल्पप्राण/महाप्राण, सघोष/अघोष और द्वित्व/संपृक्त ध्वनियों के नियमों को इस सुव्यवस्थित नोट्स के माध्यम से याद रखेंगे, तो UPP, UPSI, UPSSSC, UPTET या SSC GD परीक्षा में आपका एक भी प्रश्न गलत नहीं होगा।
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