रविवार, 6 सितंबर 2026

स्वर वर्ण - अच् (Swar Varn in Hindi) | उत्पत्ति, भेद, उच्चारण स्थान और Short Tricks | UPP, UPSI, UPSSSC

 

स्वर वर्ण (Swar Varn - अच्): परिभाषा, प्रकार, उच्चारण स्थान, लिंग भेद और Short Tricks | प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष


यदि आप UPP (UP Police Constable/SI), UPSI, UPSSSC (PET/VDO/Lekhpal), SSC (GD), UPTET या SUPERTET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो हिंदी व्याकरण का आधार 'स्वर वर्ण' (Swar Varn / अच्) सबसे महत्वपूर्ण विषय है। वर्णमाला के अंतर्गत केवल स्वर वर्णों से संबंधित 2 से 3 प्रश्न सीधे तौर पर पूछे जाते हैं।

आपके द्वारा दिए गए कच्चे विवरण (Draft) को यहाँ परीक्षा के दृष्टिकोण से पूर्णतः प्रामाणिक, सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक वर्गीकरण के साथ प्रस्तुत किया गया है ताकि आपका एक भी प्रश्न गलत न हो।

1. स्वर वर्ण किसे कहते हैं?

  • परिभाषा: "जिन ध्वनियों के उच्चारण में किसी अन्य ध्वनि का सहारा न लेना पड़े और जिनका उच्चारण स्वतंत्र रूप से किया जा सके, उन्हें स्वर वर्ण कहते हैं।"

  • संस्कृत में स्वरों को 'अच्' कहा जाता है।

  • स्वरों की संख्या: मानक हिंदी में स्वरों की संख्या 11 होती है → (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ)।

  • मात्राओं की संख्या: स्वर मात्राओं की संख्या 10 होती है (क्योंकि 'अ' स्वर की कोई अलग मात्रा चिन्ह नहीं होती, इसे उदासीन स्वर या अदृश्य स्वर कहते हैं)।

2. स्वरों का वर्गीकरण

प्रतियोगी परीक्षाओं में स्वरों का वर्गीकरण 6 मुख्य आधारों पर पूछा जाता है:

  1. उत्पत्ति / रचना के आधार पर भेद (2 भेद)
  2. कालमान / मात्रा / उच्चारण समय के आधार पर भेद (3 भेद)
  3. उच्चारण स्थान के आधार पर भेद (6 भेद)
  4. जीभ (जिह्वा) के प्रयोग के आधार पर भेद (3 भेद)
  5. ओष्ठ (होंठों) के प्रयोग के आधार पर भेद (2 भेद)
  6. मुख विवर / मुख आकृति के आधार पर भेद (4 भेद)

(I) उत्पत्ति / रचना के आधार पर भेद (2 भेद)

  • उत्पत्ति के आधार पर स्वर के दो मुख्य भेद होते हैं:
  1. मूल स्वर (4): जिनमें केवल एक ही ध्वनि होती है और जो स्वतंत्र होते हैं।

    • वर्ण: अ, इ, उ, ऋ

  2. संधि स्वर (7): जो दो ध्वनियों/स्वरों के मेल से बनते हैं।

    • वर्ण: आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ

संधि स्वर के 2 उपभेद होते हैं:            

A. मूल दीर्घ स्वर (सजातीय स्वर) - 3: दो एक समान (सजातीय) मूल स्वरों के मेल से बनते हैं।

  • अ + अ = आ
  • इ + इ = ई
  • उ + उ = ऊ

 B. संयुक्त स्वर / मिश्रित स्वर (विजातीय स्वर) - 4: दो भिन्न (विजातीय) स्वरों के मेल से बनते हैं।

  • अ + इ = ए
  • अ + ए = ऐ
  • अ + उ = ओ
  • अ + ओ = औ

(II) कालमान / मात्रा / उच्चारण समय के आधार पर भेद (3 भेद)

  • मात्रा की परिभाषा: स्वरों के उच्चारण में लगने वाले समय को मात्रा कहते हैं।

ह्रस्व स्वर (मूल / एकमात्रिक / लघु स्वर):

  • जिन स्वरों के उच्चारण में सबसे कम समय लगता है।
संख्या (4): अ, इ, उ, ऋ

दीर्घ स्वर (द्विमात्रिक / गुरु / संधि स्वर):

  • जिन स्वरों के उच्चारण में ह्रस्व से दुगुना समय लगता है।

  • संख्या (7): आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ

प्लुत स्वर (त्रिमात्रिक स्वर):

  • जिन स्वरों के उच्चारण में तीन मात्राओं का (दीर्घ से अधिक) समय लगता है।

  • उदाहरण: , राम!

(III) उच्चारण स्थान के आधार पर भेद (6 भेद)

हिंदी में स्वरों के उच्चारण स्थान के आधार पर 6 भेद होते हैं:

उच्चारण स्थानस्वर वर्णतकनीकी नाम
कंठअ, आकंठ्य स्वर
तालुइ, ईतालव्य स्वर
मूर्धामूर्धन्य स्वर
ओष्ठउ, ऊओष्ठ्य स्वर
कंठ-तालुए, ऐ (अ + इ के मेल से)कंठतालव्य स्वर
कंठ-ओष्ठओ, औ (अ + उ के मेल से)कंठोष्ठ्य स्वर

(IV) जीभ (जिह्वा) के प्रयोग के आधार पर भेद (3 भेद)

  1. अग्र स्वर: जिन स्वरों के उच्चारण में जीभ का अगला भाग सक्रिय रहता है।

    • वर्ण: इ, ई, ए, ऐ

  2. मध्य स्वर (केंद्रीय स्वर): जिन स्वरों के उच्चारण में जीभ का मध्य भाग काम करता है।

    • वर्ण: (नोट: मानक हिंदी व्याकरण में 'अ' मध्य स्वर है, आ पश्च स्वर के अंतर्गत आता है)

  3. पश्च स्वर: जिन स्वरों के उच्चारण में जीभ का पिछला भाग काम करता है।

    • वर्ण: आ, उ, ऊ, ओ, औ

(V) ओष्ठ (होंठों) के प्रयोग के आधार पर भेद (2 भेद)

  1. वृत्तमुखी स्वर (Rounded): जिनके उच्चारण में होंठ गोल हो जाते हैं।

    • वर्ण (4): उ, ऊ, ओ, औ

  2. अवृत्तमुखी / अर्द्ध-वृत्तमुखी स्वर (Unrounded): जिनके उच्चारण में होंठ गोल न होकर फैलते हैं।

    • वर्ण (7): अ, आ, इ, ई, ऋ, ए, ऐ

(VI) मुख विवर / मुख आकृति के आधार पर भेद (4 भेद)

  1. विवृत स्वर (Open): जिनके उच्चारण में मुख पूरा खुलता है। → 

  2. अर्द्ध-विवृत स्वर (Half Open): जिनके उच्चारण में मुख आधा खुलता है। → अ, ऐ, औ

  3. अर्द्ध-संवृत स्वर (Half Close): जिनके उच्चारण में मुख आधा बंद रहता है। → ए, ओ

  4. संवृत स्वर (Close): जिनके उच्चारण में मुख लगभग बंद रहता है। → इ, ई, उ, ऊ

3. व्याकरण के अनुसार स्वर वर्णों का लिंग भेद

हिंदी व्याकरण में स्वरों को लिंग के आधार पर भी वर्गीकृत किया जाता है:

  • स्त्रीलिंग स्वर (3): इ, ई, ऋ (इन स्वरों से बने शब्द या प्रत्यय प्रायः स्त्रीलिंग का बोध कराते हैं)।

  • पुल्लिंग स्वर (7): आ, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ

    (नोट: 'अ' स्वर को उदासीन माना जाता है, किन्तु व्यापक रूप में इसे पुल्लिंग वर्ग में भी गिना जाता है)।

4. परीक्षा हेतु Quick Revision Master Table

वर्गीकरण का आधारभेद के नाममुख्य वर्ण
उत्पत्ति आधारमूल स्वर (4) | संधि स्वर (7)मूल: अ, इ, उ, ऋ | संधि: आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ
मात्रा आधारह्रस्व (1) | दीर्घ (2) | प्लुत (3)ह्रस्व: अ, इ, उ, ऋ | दीर्घ: आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ | प्लुत: ॐ
जिह्वा प्रयोगअग्र | मध्य | पश्चअग्र: इ, ई, ए, ऐ | मध्य: अ | पश्च: आ, उ, ऊ, ओ, औ
ओष्ठ प्रयोगवृत्तमुखी | अवृत्तमुखीवृत्त: उ, ऊ, ओ, औ | अवृत्त: अ, आ, इ, ई, ऋ, ए, ऐ
मुख विवरसंवृत | विवृत | अर्द्ध-संवृत | अर्द्ध-विवृतविवृत: आ | संवृत: इ, ई, उ, ऊ | अर्द्ध-संवृत: ए, ओ
लिंग भेदस्त्रीलिंग (3) | पुल्लिंग (7)स्त्रीलिंग: इ, ई, ऋ | पुल्लिंग: आ, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ

5. विगत वर्षों में पूछे गए महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Previous Year MCQs)

Q1. 'ए' और 'ऐ' का उच्चारण स्थान क्या है? (UP Police Constable)

  • (A) ओष्ठ्य

  • (B) कंठतालव्य

  • (C) मूर्धन्य

  • (D) कंठोष्ठ्य

    उत्तर: (B) कंठतालव्य (अ [कंठ] + इ [तालु] = ए)

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा संयुक्त स्वर नहीं है? (UPSSSC PET)

  • (A) ए

  • (B) ऐ

  • (C) ऊ

  • (D) ओ

    उत्तर: (C) ऊ ('ऊ' मूल दीर्घ स्वर है, जबकि ए, ऐ, ओ संयुक्त स्वर हैं)

Q3. हिंदी वर्णमाला में स्त्रीलिंग स्वर कौन-कौन से हैं? (UPSI / UPTET)

  • (A) अ, आ, इ

  • (B) इ, ई, ऋ

  • (C) उ, ऊ, ओ

  • (D) ए, ऐ, औ

    उत्तर: (B) इ, ई, ऋ

Q4. 'अ' स्वर का उच्चारण स्थान एवं प्रकार क्या है? (SUPERTET)

  • (A) तालव्य - अग्र स्वर

  • (B) कंठ्य - मध्य स्वर

  • (C) ओष्ठ्य - पश्च स्वर

  • (D) मूर्धन्य - पश्च स्वर

    उत्तर: (B) कंठ्य - मध्य स्वर

निष्कर्ष (Conclusion)

स्वर वर्ण हिंदी व्याकरण का हृदय हैं। यदि आप उत्पत्ति के नियम (सजातीय व विजातीय स्वर), उच्चारण स्थान (कंठतालव्य, कंठोष्ठ्य), जीभ व मुख आकृति आधारित वर्गीकरण और स्त्रीलिंग स्वरों (इ, ई, ऋ) के नियमों को इस व्यवस्थित चार्ट के माध्यम से याद रखेंगे, तो UPP, UPSI, UPSSSC, UPTET या SSC GD की परीक्षा में आपका स्वर वर्ण से जुड़ा कोई भी प्रश्न गलत नहीं होगा।

Hindi Varnamala (हिन्दी वर्णमाला) | स्वर, व्यंजन, भेद और Short Tricks | UPP, UPSI, UPSSSC, UPTET

हिन्दी वर्णमाला (Hindi Varnamala): परिभाषा, भेद, उच्चारण स्थान, शॉर्ट ट्रिक्स और प्रश्नोत्तरी


यदि आप UPP (UP Police Constable/SI), UPSI, UPSSSC (PET/VDO/Lekhpal), SSC (GD), UPTET या SUPERTET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो हिंदी व्याकरण का सबसे पहला और आधारभूत विषय 'हिन्दी वर्णमाला' (Hindi Varnamala) है। प्रतियोगी परीक्षाओं में वर्णमाला टॉपिक से 3 से 5 प्रश्न सीधे तौर पर पूछे जाते हैं।

इस ब्लॉग में हम हिन्दी वर्णमाला को कामता प्रसाद गुरु के सिद्धांतों, वैज्ञानिक वर्गीकरण, उच्चारण स्थान, शार्ट ट्रिक्स और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के साथ व्यवस्थित रूप में समझेंगे।

1. भाषा की आधारभूत इकाइयाँ (Basic Concepts)

  • ध्वनि (Sound): भाषा की सबसे छोटी मौखिक इकाई को ध्वनि कहते हैं।

  • वर्ण (Letter): हिन्दी भाषा की वह छोटी से छोटी लिखित ध्वनि जिसके और टुकड़े/भाग न किए जा सकें, उसे वर्ण कहते हैं (जैसे: अ, क्, च् आदि)। यह भाषा का लघुत्तम लिखित रूप है।

  • वर्णमाला (Alphabet): वर्णों के सुव्यवस्थित एवं क्रमबद्ध समूह को वर्णमाला कहते हैं।

    कामता प्रसाद गुरु के अनुसार: "वर्णमाला वर्णों के समुदाय (व्यवस्थित क्रमबद्ध रूप) को कहते हैं।"

देवनागरी लिपि एवं हिन्दी वर्णमाला के महत्वपूर्ण तथ्य

  • हिन्दी भाषा देवनागरी लिपि में लिखी जाती है।

  • यह बाएँ से दाएँ (Left to Right) लिखी जाती है।

  • यह विश्व की सबसे वैज्ञानिक एवं ध्वन्यात्मक (Phonetic) लिपियों में से एक है, जिसमें जैसा बोला जाता है वैसा ही लिखा जाता है।

  • मानक हिन्दी वर्णमाला: इसमें कुल 52 वर्ण (11 स्वर + 2 अयोगवाह + 33 मूल व्यंजन + 2 द्विगुण व्यंजन + 4 संयुक्त व्यंजन) होते हैं।

2. हिन्दी वर्णमाला का मुख्य वर्गीकरण

वर्णमाला को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया जाता है:

  1. स्वर वर्ण (Vowels)

  2. व्यंजन वर्ण (Consonants)

3. स्वर (Vowels) और उनके भेद

जिन वर्णों का उच्चारण स्वतंत्र रूप से (बिना किसी अन्य वर्ण की सहायता के) होता है, उन्हें स्वर कहते हैं।

  • मानक स्वरों की संख्या: 11 (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ)

  • अयोगवाह (2): अं (अनुस्वार) और अः (विसर्ग) — ये न तो पूर्णतः स्वर हैं और न ही व्यंजन।

(A) उच्चारण/मात्रा के आधार पर स्वर के भेद:

  1. ह्रस्व स्वर (मूल स्वर): जिनके उच्चारण में सबसे कम (एक मात्रा का) समय लगता है। (संख्या: 4 $\rightarrow$ अ, इ, उ, ऋ)

  2. दीर्घ स्वर: जिनके उच्चारण में ह्रस्व स्वर से दुगुना समय लगता है। (संख्या: 7 $\rightarrow$ आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ)

  3. प्लुत स्वर: जिनके उच्चारण में तिगुना समय लगता है। (जैसे: ॐ, राम!)

(B) जिह्वा (जीभ) के प्रयोग के आधार पर भेद:

  • अग्र स्वर: इ, ई, ए, ऐ

  • मध्य स्वर:

  • पश्च स्वर: आ, उ, ऊ, ओ, औ

4. व्यंजन (Consonants) और उनके भेद

जिन वर्णों का उच्चारण स्वरों की सहायता से होता है, उन्हें व्यंजन कहते हैं। मूल व्यंजनों की कुल संख्या 33 होती है।

(I) स्पर्श व्यंजन (25 + 2 उत्क्षिप्त/द्विगुण = 27)

'क' से लेकर 'म' तक के 25 वर्णों को 5 वर्गों में बाँटा गया है:

वर्गवर्णउच्चारण स्थान
क वर्गक, ख, ग, घ, ङकंठ (Throat)
च वर्गच, छ, ज, झ, ञतालु (Palate)
ट वर्गट, ठ, ड, ढ, णमूर्धा (Roof of Mouth)
त वर्गत, थ, द, ध, नदंत (Teeth)
प वर्गप, फ, ब, भ, मओष्ठ (Lips)
  • द्विगुण / उत्क्षिप्त / ताड़नजात व्यंजन (2): ड़, (इन्हें कभी-कभी आगत/उच्छिप्त व्यंजन भी कहा जाता है)

(II) अंतःस्थ व्यंजन (4)

जिन वर्णों का उच्चारण जीभ, तालु, दाँत और ओष्ठों के परस्पर सटने से होता है, पर पूरी तरह से स्पर्श नहीं होता।

  • वर्ण: य, र, ल, व

  • य, व $\rightarrow$ अर्धस्वर

  • $\rightarrow$ लुंठित (प्रकंपित)

  • $\rightarrow$ पार्श्विक

(III) ऊष्म / संघर्षी व्यंजन (4)

जिन वर्णों के उच्चारण में हवा मुँह में रगड़ खाकर ऊष्मा (गर्मी) पैदा करती है।

  • वर्ण: श, ष, स, ह

(IV) संयुक्त व्यंजन (4)

दो अलग-अलग व्यंजनों के मेल से बनने वाले वर्ण:

  • क्ष = क् + ष

  • त्र = त् + र

  • ज्ञ = ज् + ञ

  • श्र = श् + र

5. अल्पप्राण, महाप्राण, सघोष और अघोष (Master Short Tricks)

प्रतियोगी परीक्षाओं में सबसे ज़्यादा प्रश्न इसी भाग से पूछे जाते हैं:

A. प्राणत्व (हवा की मात्रा) के आधार पर:

  • अल्पप्राण (कम हवा): प्रत्येक वर्ग का 1ला, 3रा, 5वाँ वर्ण + अंतःस्थ व्यंजन (य, र, ल, व) + सभी स्वर।

  • महाप्राण (अधिक हवा): प्रत्येक वर्ग का 2रा, 4था वर्ण + ऊष्म व्यंजन (श, ष, स, ह)।

B. घोषत्व (तंत्रियों में कंपन) के आधार पर:

  • अघोष: प्रत्येक वर्ग का 1ला, 2रा वर्ण + श, ष, स

  • सघोष (घोष): प्रत्येक वर्ग का 3रा, 4था, 5वाँ वर्ण + अंतःस्थ व्यंजन (य, र, ल, व) + + सभी स्वर।

6. परीक्षा हेतु Master Quick Revision Table

श्रेणीवर्णकुल संख्या
मूल स्वर (ह्रस्व)अ, इ, उ, ऋ4
दीर्घ स्वरआ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ7
अयोगवाहअं (अनुस्वार), अः (विसर्ग)2
स्पर्श व्यंजनक-वर्ग से प-वर्ग तक25
द्विगुण / उत्क्षिप्त व्यंजनड़, ढ2
अंतःस्थ व्यंजनय, र, ल, व4
ऊष्म व्यंजनश, ष, स, ह4
संयुक्त व्यंजनक्ष, त्र, ज्ञ, श्र4
कुल वर्ण44 (मूल वर्ण) / 52 (कुल मानक वर्ण)52

7. प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे गए महत्वपूर्ण प्रश्न (Previous Year MCQs)

Q1. हिन्दी वर्णमाला में कुल कितने मानक वर्ण होते हैं?

  • (A) 44

  • (B) 48

  • (C) 52

  • (D) 50

    उत्तर: (C) 52

Q2. 'क्ष' वर्ण किसके योग से बना है? (UP Police Constable)

  • (A) क् + च

  • (B) क् + छ

  • (C) क् + ष

  • (D) क् + श

    उत्तर: (C) क् + ष

Q3. 'य, र, ल, व' किस प्रकार के व्यंजन हैं? (UPSSSC PET)

  • (A) स्पर्श व्यंजन

  • (B) अंतःस्थ व्यंजन

  • (C) ऊष्म व्यंजन

  • (D) संयुक्त व्यंजन

    उत्तर: (B) अंतःस्थ व्यंजन

Q4. निम्नलिखित में से 'कंठ्य' ध्वनियाँ कौन-सी हैं? (UPSI / UPTET)

  • (A) क, ख

  • (B) य, र

  • (C) च, ज

  • (D) ट, ण

    उत्तर: (A) क, ख (क-वर्ग का उच्चारण कंठ से होता है)

Q5. 'ड़' और 'ढ़' किस प्रकार के व्यंजन हैं?

  • (A) अंतःस्थ

  • (B) उत्क्षिप्त / द्विगुण

  • (C) ऊष्म

  • (D) संयुक्त

    उत्तर: (B) उत्क्षिप्त / द्विगुण

निष्कर्ष (Conclusion)

हिन्दी वर्णमाला न केवल भाषा की आधारशिला है, जिस पर संपूर्ण हिन्दी साहित्य टिका हुआ है, बल्कि यह प्रतियोगी परीक्षाओं में सबसे अधिक अंक दिलाने वाला अध्याय भी है। यदि आप उच्चारण स्थान (कंठ, तालु, मूर्धा, दंत, ओष्ठ), अल्पप्राण/महाप्राण तथा सघोष/अघोष के वर्गीकरण को इस व्यवस्थित नोट्स के माध्यम से याद रखेंगे, तो UPP, UPSI, UPSSSC, UPTET या SSC GD की परीक्षा में आपका एक भी प्रश्न गलत नहीं होगा।

Bahuvrihi Samas in Hindi (बहुव्रीहि समास) | परिभाषा, भेद, उदाहरण और Short Tricks | UPP, UPSI, UPSSSC

बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi Samas in Hindi): परिभाषा, भेद, उदाहरण और Short Tricks | प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष


यदि आप UPP (UP Police Constable/SI), UPSI, UPSSSC (PET/VDO/Lekhpal), SSC (GD), UPTET या SUPERTET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो हिंदी व्याकरण का बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi Samas) टॉपिक सबसे महत्वपूर्ण और भ्रमित करने वाला विषय माना जाता है। परीक्षाओं में बहुव्रीहि समास से 1 से 2 प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

छात्र अक्सर बहुव्रीहि, द्विगु और कर्मधारय समास के बीच भ्रमित हो जाते हैं। इस ब्लॉग में हम बहुव्रीहि समास को बिल्कुल सरल भाषा में, मास्टर ट्रिक्स और प्रमुख उदाहरणों के साथ समझेंगे ताकि परीक्षा में आपका एक भी नंबर न कटे।

1. बहुव्रीहि समास किसे कहते हैं? (Definition)

जिस समास में कोई भी पद (पूर्वपद या उत्तरपद) प्रधान नहीं होता और दोनों पद मिलकर किसी तीसरे (अन्य) पद या विशेष अर्थ की ओर संकेत करते हैं, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं।

  • सरल शब्दों में: इसमें दिए गए दो शब्दों का शाब्दिक अर्थ महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि उन दोनों से मिलकर निकलने वाला सांकेतिक या तीसरा अर्थ (प्रायः देवी-देवताओं का नाम या विशेष संज्ञा) प्रधान होता है।

उदाहरण:

  • लंबोदर = लंबा है उदर (पेट) जिसका अर्थात $\rightarrow$ भगवान श्री गणेश

  • दशानन = दस हैं आनन (मुख) जिसके अर्थात $\rightarrow$ रावण

  • नीलकंठ = नीला है कंठ जिसका अर्थात $\rightarrow$ भगवान शिव

2. बहुव्रीहि समास पहचानने की Master Short Tricks

परीक्षा में कम समय में बहुव्रीहि समास को पहचानने के लिए यह 3 ट्रिक्स याद रखें:

  1. तीसरा अर्थ (Third Meaning): शब्द का सीधा अर्थ न निकलकर कोई पौराणिक, पौराणिक पात्र, या प्रसिद्ध तीसरे व्यक्ति का नाम सामने आएगा।

  2. देवी-देवताओं के नाम: अधिकतर पौराणिक शब्द या देवी-देवताओं के पर्यायवाची शब्द इसी समास के अंतर्गत आते हैं (जैसे: चक्रपाणि, पीतांबर, वीणावादिनी)।

  3. विग्रह करने की ट्रिक: समास विग्रह करने पर अंत में "जिसका", "जिसकी", "जिसके", "वह जो" जैसे शब्द आते हैं।

3. बहुव्रीहि समास के भेद (Types of Bahuvrihi Samas)

प्रतियोगी परीक्षाओं के स्तर को देखते हुए इसके 4 मुख्य भेदों को जानना आवश्यक है:

(I) समानाधिकरण बहुव्रीहि समास

इसमें दोनों पदों में समान विभक्ति (संज्ञा/विशेषण) होती है, लेकिन दोनों मिलकर तीसरे पद का बोध कराते हैं।

  • उदाहरण:

    • पीतांबर = पीले हैं वस्त्र जिसके अर्थात श्री कृष्ण

    • चतुर्भुज = चार हैं भुजाएँ जिसकी अर्थात भगवान विष्णु

(II) व्यधिकरण बहुव्रीहि समास

इसमें दोनों पदों की विभक्तियाँ अलग-अलग होती हैं। पहला पद प्रायः संज्ञा और दूसरा पद स्थान/अंग को दर्शाता है।

  • उदाहरण:

    • चक्रपाणि = चक्र है पाणी (हाथ) में जिसके अर्थात भगवान विष्णु

    • शूलपाणि = शूल है हाथ में जिसके अर्थात भगवान शिव

(III) तुल्ययोग/सह बहुव्रीहि समास

इसमें पहला पद 'स' या 'सह' (साथ) बोधक होता है।

  • उदाहरण:

    • सपरिवार = परिवार के साथ है जो

    • सदेह = देह के साथ है जो

(IV) व्यतिहार बहुव्रीहि समास

जिसमें लड़ाई-झगड़े, घात-प्रतिघात का बोध कराने वाले शब्दों का प्रयोग होता है।

  • उदाहरण:

    • लाठालाठी = लाठियों से जो लड़ाई हुई

    • गालागाली = गालियों से जो युद्ध हुआ

    • बाताबाती = बातों ही बातों में जो बहस हुई

4. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण उदाहरण (Important Examples)

समस्त पदसमास विग्रहतीसरा (विशेष) अर्थ
दशाननदस हैं आनन (मुख) जिसकेरावण
लंबोदरलंबा है उदर (पेट) जिसकागणेश जी
नीलकंठनीला है कंठ जिसकाशिव जी
चक्रपाणिचक्र है हाथ में जिसकेविष्णु जी
वीणावादिनीवीणा है जिसके हाथ मेंसरस्वती जी
पंचाननपाँच हैं आनन जिसकेशिव जी / हनुमान जी
निशाचरनिशा (रात) में विचरण करने वालाराक्षस
त्रिनेत्रतीन हैं नेत्र जिसकेशिव जी
अल्पबुद्धिकम है बुद्धि जिसकीमूर्ख व्यक्ति
दिगंबरदिशाएँ ही हैं वस्त्र जिसकेशिव जी / जैन साधु

5. छात्रों का सबसे बड़ा भ्रम (Confusions & Exceptions)

A. बहुव्रीहि बनाम द्विगु समास (संख्यावाचक शब्दों में अंतर)

  • द्विगु समास: यदि पहला पद संख्यावाचक हो और वह केवल समूह को दर्शाए।

    • उदाहरण: चौराहा = चार राहों का समूह $\rightarrow$ द्विगु समास

  • बहुव्रीहि समास: यदि पहला पद संख्यावाचक हो लेकिन वह किसी तीसरे विशेष व्यक्ति को दर्शाए।

    • उदाहरण: दशानन = दस हैं आनन जिसके अर्थात रावण $\rightarrow$ बहुव्रीहि समास

B. बहुव्रीहि बनाम कर्मधारय समास

  • कर्मधारय समास: जब केवल विशेषण-विशेष्य (गुण) का संबंध हो।

    • उदाहरण: पीतांबर = पीला है जो अंबर (कपड़ा) $\rightarrow$ कर्मधारय समास

  • बहुव्रीहि समास: जब वह शब्द किसी व्यक्ति/देवता की पहचान बन जाए।

    • उदाहरण: पीतांबर = पीला है अंबर जिसका अर्थात श्रीकृष्ण $\rightarrow$ बहुव्रीहि समास

परीक्षा Master Rule: यदि परीक्षा के विकल्पों में 'पीतांबर', 'नीलकंठ', 'दशानन' या 'त्रिनेत्र' जैसे शब्द आएँ और विकल्प में कर्मधारय/द्विगु तथा बहुव्रीहि दोनों मौजूद हों, तो हमेशा बहुव्रीहि समास को ही प्राथमिकता दें।

6. पिछले वर्षों में पूछे गए प्रश्न (Previous Year MCQs Practice)

Q1. "चक्रपाणि" में कौन-सा समास है? (UP Police Constable)

  • (A) तत्पुरुष समास

  • (B) बहुव्रीहि समास

  • (C) कर्मधारय समास

  • (D) द्विगु समास

    उत्तर: (B) बहुव्रीहि समास (चक्र है हाथ में जिसके अर्थात विष्णु जी)

Q2. "लंबोदर" शब्द किस समास का उदाहरण है? (UPSSSC PET)

  • (A) अव्ययीभाव समास

  • (B) द्वंद्व समास

  • (C) बहुव्रीहि समास

  • (D) द्विगु समास

    उत्तर: (C) बहुव्रीहि समास (तीसरा अर्थ 'गणेश जी' निकल रहा है)

Q3. किस शब्द में 'बहुव्रीहि समास' है? (UPSI / UPTET)

  • (A) चौराहा

  • (B) महात्मा

  • (C) नीलकंठ

  • (D) प्रतिदिन

    उत्तर: (C) नीलकंठ (नीला है कंठ जिसका अर्थात शिव जी)

निष्कर्ष (Conclusion)

बहुव्रीहि समास को हल करना बहुत आसान है। बस याद रखें: जिस शब्द का शाब्दिक अर्थ छोड़कर कोई तीसरा पौराणिक या विशेष अर्थ निकले, वहाँ बहुव्रीहि समास होता है।

यदि आप UPP, UPSI, UPSSSC PET, SSC GD या UPTET/SUPERTET की तैयारी कर रहे हैं, तो इन उदाहरणों और ट्रिक्स को अच्छे से रिवाइज कर लें।

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