रविवार, 1 नवंबर 2026

संस्कृत उपसर्ग क्या है? 22 उपसर्ग, अर्थ, उदाहरण एवं CTET/UPTET/REET/PGT के लिए 30+ MCQ

 

संस्कृत उपसर्ग क्या है? 22 उपसर्ग, अर्थ, उदाहरण एवं परीक्षा उपयोगी MCQ


संस्कृत उपसर्ग वे शब्दांश हैं जो धातु या शब्द के पूर्व जोड़कर उसके अर्थ में विशेषता उत्पन्न करते हैं या अर्थ को पूर्णतः बदल देते हैं। ‘उपसर्ग’ शब्द ‘उप + सृज्’ से बना है, जिसका अर्थ है समीप रखा हुआ अर्थात् धातु के निकट पूर्व में स्थित शब्दांश । संस्कृत व्याकरण में उपसर्गों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि एक ही धातु से अनेक भिन्न-भिन्न अर्थों वाले शब्द उपसर्गों के योग से बनते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPTET, CTET, UP SuperTET, REET, BPSC STET, UP TGT, UP PGT में उपसर्गों की पहचान, उनके अर्थ और उनसे बने शब्दों पर आधारित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। यह लेख उपसर्ग की संपूर्ण अवधारणा, उनकी संख्या, प्रमुख उपसर्गों के अर्थ तथा पिछले वर्षों के 30 से अधिक प्रामाणिक बहुविकल्पीय प्रश्नों का संग्रह प्रस्तुत करता है।


उपसर्ग का अर्थ और परिभाषा

संस्कृत में उपसर्ग को ‘उपसर्गः’ कहा जाता है। पाणिनि ने ‘प्र’ आदि शब्दांशों को उपसर्ग संज्ञा प्रदान की है। लौकिक संस्कृत में इनका प्रयोग केवल धातु से पूर्व ही होता है, जबकि वैदिक संस्कृत में ये धातु के बाद या व्यवहित भी प्रयुक्त हो सकते थे ।

उपसर्गों का मुख्य कार्य धातु के मूल अर्थ को विशिष्ट बनाना या परिवर्तित करना है। जैसे ‘हृ’ धातु का अर्थ है ‘ले जाना’। इससे—

  • प्र + हृ = प्रहार (आघात)

  • सं + हृ = संहार (विनाश)

  • आ + हृ = आहार (भोजन)

  • वि + हृ = विहार (भ्रमण)

  • परि + हृ = परिहार (त्याग)

इस प्रकार एक ही धातु से अनेक अर्थों वाले शब्द उपसर्गों के योग से बनते हैं ।

पहलूविवरण
शाब्दिक अर्थसमीप रखा हुआ
स्थितिधातु/शब्द के पूर्व
कार्यअर्थ-परिवर्तन या अर्थ-विशेषीकरण
यास्क के अनुसार20 उपसर्ग
पाणिनि के अनुसार22 उपसर्ग

उपसर्गों की संख्या

उपसर्गों की संख्या के संबंध में विद्वानों में मतभेद है। यास्क ने अपने ग्रंथ ‘निरुक्त’ में 20 उपसर्गों का उल्लेख किया है — आ, प्र, परा, अपि, प्रति, अति, सु, निर्, दुर्, नि, अव, उद्, सम्, वि, अप, अनु, अपि, उप, परि, अधि ।

पाणिनि ने इनमें निस् और दुस् को अतिरिक्त मानकर कुल 22 उपसर्ग स्वीकार किए हैं। किंतु निस्-निर् और दुस्-दुर् को केवल प्रक्रिया-निर्वाह के लिए पृथक् माना गया है ।

स्रोतउपसर्ग संख्या
यास्क (निरुक्त)20
पाणिनि22
सामान्य मान्यता22

22 उपसर्ग और उनके प्रमुख अर्थ

नीचे संस्कृत के 22 उपसर्गों की सूची उनके प्रमुख अर्थों सहित दी गई है:

उपसर्गप्रमुख अर्थ
प्रअधिकता, प्रकर्ष, गमन, आगे
पराउत्कर्ष, अपकर्ष, विपरीत, नीचे
अपअपकर्ष, वर्जन, निरादर, हरण
सम्ऐक्य, सुधार, साथ, पूर्णता
अनुतुल्यता, पश्चात्, क्रम, अनुकरण
अवप्रतिबंध, निंदा, स्वच्छता, नीचे
निस्निषेध, निश्चय, बाहर
निर्निषेध, निश्चय, रहित, बाहर
दुस्विषमता, निंदा, कठिन
दुर्कठिन, बुरा, अभाव
विश्रेष्ठ, अद्भुत, अतीत, विशेष, विलोम
आनिंदा, बंधन, स्वभाव, तक, समीप
निनीचे, बाहर, अभाव, रहित
अधिऐश्वर्य, आधार, प्रधानता
अतिउत्कर्ष, आधिक्य, पूजन, उल्लंघन
सुउत्तमता, अच्छा, सुंदर
उद्उत्कृष्टता, प्रकाश, शक्ति, ऊपर
अभिमुख्यता, समीप, सर्वत्र, अभिमुख
प्रतिभाग, खंडन, विरोध, ओर
परिपरिणाम, चारों ओर, पूजा
उपसमीपता, सादृश्य, संयोग, सहायता
अपिढकना, संश्लेषण

नोट: अपि और अप का प्रयोग अलग-अलग संदर्भों में भिन्न अर्थ देता है। अपि का अर्थ ‘ढकना’ या ‘संश्लेषण’ होता है, जबकि अप का अर्थ ‘अपकर्ष’ या ‘निरादर’ होता है ।


उपसर्गों का अर्थ-परिवर्तन में योगदान

उपसर्ग केवल शब्दांश नहीं, बल्कि अर्थ-निर्माण के शक्तिशाली साधन हैं। एक ही धातु से भिन्न-भिन्न उपसर्गों के योग से पूर्णतः भिन्न अर्थ वाले शब्द बनते हैं:

धातुउपसर्ग सहित शब्दअर्थ
कृ (करना)संस्कारसुधार
कृअपकारबुराई
कृउपकारभलाई
कृप्रतिकारबदला
भू (होना)अनुभवअनुभूति
भूपराभवहार
भूप्रभावप्रभुत्व
वद् (बोलना)विवादविवाद
वद्प्रतिवादजवाब
वद्संवादबातचीत
वद्अनुवादउल्था


पिछले वर्षों के महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

1. संस्कृत में उपसर्गों की संख्या (पाणिनि के अनुसार) कितनी है?
A. 20
B. 21
C. 22
D. 24
उत्तर: C. 22


2. ‘निर्गताः’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. नि
B. निस्
C. निर्
D. नी
उत्तर: C. निर् (REET 2015)


3. ‘प्रहार’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. परा
B. प्र
C. प्रति
D. परि
उत्तर: B. प्र


4. ‘संहार’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. सम्
B. सु
C. सं
D. स
उत्तर: A. सम्


5. ‘विहार’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. वि
B. वी
C. विह
D. हार
उत्तर: A. वि


6. ‘परिहार’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. परि
B. परा
C. पार
D. हार
उत्तर: A. परि


7. ‘अनुचर’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. अन्
B. अनु
C. अन
D. अ
उत्तर: B. अनु


8. ‘पराजय’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. प
B. पर
C. परा
D. जय
उत्तर: C. परा


9. ‘निर्गुण’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. नि
B. नी
C. निर्
D. निर्गु
उत्तर: C. निर्


10. ‘संयोग’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. स
B. सम्
C. सं
D. योग
उत्तर: B. सम्


11. ‘अवगुण’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. अ
B. अव
C. व
D. गुण
उत्तर: B. अव


12. ‘उपकार’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. उ
B. उप
C. प
D. कार
उत्तर: B. उप


13. ‘अभिमान’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. अ
B. अभि
C. भि
D. मान
उत्तर: B. अभि


14. ‘प्रतिकूल’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. प्र
B. प्रति
C. ति
D. कूल
उत्तर: B. प्रति


15. ‘अतिक्रम’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. अ
B. अति
C. ति
D. क्रम
उत्तर: B. अति


16. ‘दुर्गति’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. दु
B. दुर्
C. दुस्
D. गति
उत्तर: B. दुर्


17. ‘सुकर’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. स
B. सु
C. कर
D. क
उत्तर: B. सु


18. ‘उत्कर्ष’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. उ
B. उत्
C. त्
D. कर्ष
उत्तर: B. उत्


19. ‘अधिकार’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. अ
B. अधि
C. धि
D. कार
उत्तर: B. अधि


20. ‘वियोग’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. वि
B. वी
C. योग
D. व
उत्तर: A. वि


21. ‘आगमन’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. आ
B. अ
C. गमन
D. ग
उत्तर: A. आ


22. ‘निगम’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. न
B. नि
C. नी
D. गम
उत्तर: B. नि


23. ‘अनुवाद’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. अन्
B. अनु
C. अन
D. वाद
उत्तर: B. अनु


24. ‘अपमान’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. अ
B. अप
C. प
D. मान
उत्तर: B. अप


25. ‘सम्मान’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. स
B. सम्
C. मान
D. सम
उत्तर: B. सम्


26. ‘विशेष’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. वि
B. वी
C. शेष
D. व
उत्तर: A. वि


27. ‘परिवर्तन’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. परि
B. परा
C. पार
D. वर्तन
उत्तर: A. परि


28. ‘उपहार’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. उ
B. उप
C. प
D. हार
उत्तर: B. उप


29. ‘प्रस्थान’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. प्र
B. प्रति
C. स्थान
D. प
उत्तर: A. प्र


30. ‘दुष्कर’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. दु
B. दुस्
C. दुर्
D. कर
उत्तर: B. दुस्


31. ‘आजीवन’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. आ
B. अ
C. जीवन
D. जी
उत्तर: A. आ


32. ‘निर्भय’ में कौन सा उपसर्ग है?
A. नि
B. निर्
C. भय
D. नी
उत्तर: B. निर्


त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision)

बिंदुतथ्य
उपसर्ग की स्थितिधातु/शब्द के पूर्व
यास्क के अनुसार20 उपसर्ग
पाणिनि के अनुसार22 उपसर्ग
प्रअधिकता, आगे
पराविपरीत, नीचे
अपनिरादर, वर्जन
सम्ऐक्य, पूर्णता
अनुपीछे, अनुकरण
अवनीचे, निंदा
निर्रहित, बाहर
दुर्कठिन, बुरा
विविशेष, विलोम
आतक, समीप
निनीचे, अभाव
अधिप्रधानता, आधार
अतिअधिक, उल्लंघन
सुअच्छा, उत्तम
उद्ऊपर, उत्कर्ष
अभिसमीप, अभिमुख
प्रतिविरोध, ओर
परिचारों ओर
उपसमीप, सहायता

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: उपसर्ग और प्रत्यय में क्या अंतर है?
उत्तर: उपसर्ग शब्द के पूर्व जुड़ता है और प्रत्यय शब्द के अंत में जुड़ता है। उपसर्ग धातु के अर्थ को बदलता या विशिष्ट बनाता है, जबकि प्रत्यय से नए शब्द या शब्द-रूप बनते हैं।

प्रश्न 2: क्या उपसर्ग का अपना स्वतंत्र अर्थ होता है?
उत्तर: उपसर्ग स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त नहीं होते। इनका अर्थ धातु के साथ मिलकर ही प्रकट होता है। व्याकरणाचार्यों में इस पर मतभेद है — कुछ उपसर्गों को अर्थ का ‘वाचक’ मानते हैं और कुछ ‘द्योतक’ ।

प्रश्न 3: ‘निर्’ और ‘निस्’ में क्या अंतर है?
उत्तर: दोनों का अर्थ लगभग समान है — ‘रहित’ या ‘बाहर’। पाणिनि ने ‘निस्’ को अतिरिक्त उपसर्ग माना है, किंतु व्यवहार में ‘निर्’ का प्रयोग अधिक सामान्य है (जैसे निर्गुण, निर्भय)। ‘निस्’ का प्रयोग कुछ विशेष संदर्भों में होता है (जैसे निस्संदेह) ।

प्रश्न 4: UPTET/CTET में उपसर्ग से किस प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं?
उत्तर: सामान्यतः दिए गए शब्द में उपसर्ग की पहचान, उपसर्ग का अर्थ, उपसर्ग से बने शब्द, उपसर्गों की संख्या तथा ‘प्र’, ‘अनु’, ‘निर्’, ‘सम्’ आदि के उदाहरण पर प्रश्न पूछे जाते हैं।

प्रश्न 5: क्या उपसर्ग केवल धातुओं के साथ ही जुड़ते हैं?
उत्तर: लौकिक संस्कृत में उपसर्ग मुख्यतः धातुओं के पूर्व ही प्रयुक्त होते हैं। किंतु कुछ स्थितियों में ये संज्ञा या विशेषण शब्दों के साथ भी जुड़ सकते हैं (जैसे सु + पुत्र = सुपुत्र) ।


निष्कर्ष

संस्कृत उपसर्ग केवल शब्दांश नहीं, बल्कि भाषा की अर्थ-निर्माण प्रणाली की रीढ़ हैं। यास्क के 20 और पाणिनि के 22 उपसर्गों ने संस्कृत को अत्यंत समृद्ध और लचीली भाषा बनाया है, जिसमें एक ही धातु से दर्जनों भिन्न अर्थों वाले शब्द बन सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रत्येक उपसर्ग की पहचान, उसका प्रमुख अर्थ और उससे बने प्रसिद्ध शब्दों का ज्ञान अनिवार्य है। इस लेख में दी गई तालिकाएँ और 32 प्रश्न आपकी तैयारी को दिशा देंगे। उपसर्गों का ठोस ज्ञान संस्कृत गद्य-पद्य को समझने, शब्द-विच्छेद करने और व्याकरण के अन्य प्रकरणों (संधि, समास, प्रत्यय) को जानने का आधार भी प्रदान करता है।

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