भारतीय संविधान भाग 20 (संविधान संशोधन) | अनुच्छेद 368 | Constitutional Amendment Notes & 20+ PYQs
संविधान संशोधन (Constitutional Amendment): संविधान भाग 20 - प्रतियोगी परीक्षा हेतु संपूर्ण एवं गहन गाइड
भारतीय संविधान की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसका नम्यता (Flexibility) और अनम्यता (Rigidity) का अद्भुत मिश्रण है। यह न तो ब्रिटेन के संविधान की तरह अत्यधिक लचीला है कि साधारण कानून की तरह इसमें जब चाहें बदलाव किया जा सके, और न ही अमेरिका के संविधान की तरह अत्यधिक कठोर कि समय के साथ इसमें बदलाव करना लगभग असंभव हो। संविधान निर्माताओं ने बदलती परिस्थितियों, आवश्यकताओं और जनआकांक्षाओं के अनुरूप संविधान में परिवर्तन करने के लिए भाग 20 (Part XX) के अंतर्गत अनुच्छेद 368 (Article 368) का प्रावधान किया।
1. संविधान भाग 20 का संवैधानिक ढांचा एवं ऐतिहासिक स्रोत
भारतीय संविधान के भाग 20 (Part XX) में केवल एक ही अनुच्छेद समाहित है—अनुच्छेद 368 (Article 368)।
संविधान संशोधन का स्रोत एवं दर्शन
दक्षिण अफ्रीका का संविधान (South African Constitution): भारतीय संविधान में संविधान संशोधन की प्रक्रिया दक्षिण अफ्रीका के संविधान से ग्रहण की गई है।
संसद की शक्ति: अनुच्छेद 368 संसद को संविधान के किसी भी उपबंध का परिवर्धन (Addition), परिवर्तन (Variation) या निरसन (Repeal) करने की शक्ति प्रदान करता है।
संसदीय संप्रभुता बनाम न्यायिक समीक्षा: यद्यपि संसद के पास संशोधन की शक्ति है, परंतु यह शक्ति असीमित नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) की रक्षा हेतु संशोधनों की न्यायिक समीक्षा कर सकता है।
2. संविधान संशोधन की विधियाँ एवं प्रक्रिया की मास्टर तालिका (Master Amendment Methods Table)
अनुच्छेद 368 के अंतर्गत और उसके बाहर संविधान में संशोधन तीन प्रकार से किया जा सकता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से इनका संपूर्ण विवरण नीचे तालिका में दिया गया है:
| संशोधन का प्रकार | आवश्यक बहुमत (Required Majority) | संबंधित विषय/क्षेत्र (Subject Matter) | क्या अनुच्छेद 368 के तहत आता है? |
1. साधारण बहुमत द्वारा संशोधन (By Simple Majority) | प्रत्येक सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का | * नए राज्यों का प्रवेश या गठन (Art. 2 & 3) * राज्यों में विधान परिषदों का निर्माण या समाप्ति (Art. 169) * नागरिकता की प्राप्ति और समाप्ति * राजभाषा का प्रयोग * पहली, दूसरी, पांचवीं और छठी अनुसूची से संबंधित विषय | नहीं (इसे Art. 368 के तहत संविधान संशोधन नहीं माना जाता) |
2. विशेष बहुमत द्वारा संशोधन (By Special Majority) | * सदन की कुल सदस्यता का बहुमत ( * उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का कम से कम | * मौलिक अधिकार (Fundamental Rights - Part 3) * राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP - Part 4) * वे सभी उपबंध जो प्रथम और तृतीय श्रेणी में शामिल नहीं हैं। | हाँ (अनुच्छेद 368 के अंतर्गत) |
3. विशेष बहुमत + आधे राज्यों का अनुमोदन (Special Majority + Half States Consent) | * संसद में विशेष बहुमत ( * कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों का साधारण बहुमत से अनुमोदन। | * राष्ट्रपति का निर्वाचन और उसकी प्रक्रिया * संघ और राज्यों की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार * उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय संबंधी उपबंध * सातवीं अनुसूची की कोई भी सूची (संघ/राज्य/समवर्ती) * संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व * खुद अनुच्छेद 368 में संशोधन | हाँ (अनुच्छेद 368 के अंतर्गत) |
3. अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन विधेयक की चरणबद्ध प्रक्रिया
अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन विधेयक पारित करने की एक निश्चित और कठोर प्रक्रिया निर्धारित की गई है:
विधेयक का प्रस्तुतीकरण: संविधान संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में पेश किया जा सकता है। इसे राज्य विधानमंडल में पेश नहीं किया जा सकता।
प्रस्तुतकर्ता: इसे किसी मंत्री द्वारा या किसी गैर-सरकारी सदस्य (Private Member) द्वारा पेश किया जा सकता है।
पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं: इस विधेयक को पेश करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सहमति/अनुमति की आवश्यकता नहीं होती।
पृथक-पृथक पारित होना अनिवार्य: विधेयक को संसद के दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग (Separately) विशेष बहुमत से पारित किया जाना अनिवार्य है।
संयुक्त बैठक (Joint Sitting) का कोई प्रावधान नहीं: यदि दोनों सदनों के बीच संशोधन विधेयक को लेकर कोई असहमति या गतिरोध उत्पन्न होता है, तो अनुच्छेद 108 के तहत संयुक्त बैठक बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है। असहमति की स्थिति में विधेयक समाप्त हो जाता है।
राज्यों का अनुमोदन (यदि आवश्यक हो): यदि विधेयक संविधान के संघीय ढांचे से संबंधित है, तो संसद के बाद इसे कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा साधारण बहुमत से स्वीकृत कराया जाता है। इसके लिए राज्यों के पास कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं है।
राष्ट्रपति की अनुमति (Mandatory Consent): दोनों सदनों द्वारा पारित होने के बाद विधेयक राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। 24वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 द्वारा यह अनिवार्य कर दिया गया कि राष्ट्रपति संविधान संशोधन विधेयक पर अपनी अनुमति देने के लिए बाध्य हैं। वे इसे न तो रोक सकते हैं और न ही पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं।
4. 'मूल ढांचा सिद्धांत' (Basic Structure Doctrine) एवं ऐतिहासिक वाद (Landmark Cases)
संविधान संशोधन की शक्ति को लेकर संसद और न्यायपालिका के बीच एक लंबा संघर्ष रहा है, जिसके माध्यम से 'मूल ढांचे का सिद्धांत' विकसित हुआ:
[शंकर प्रसाद वाद (1951)] ➔ संसद फंडामेंटल राइट्स बदल सकती है
│
[सज्जन सिंह वाद (1965)] ➔ संसद के पास असीमित शक्ति है
│
[गोलकनाथ वाद (1967)] ➔ संसद मौलिक अधिकारों में संशोधन नहीं कर सकती
│
[24वां संशोधन (1971)] ➔ संसद ने Art. 368 व Art. 13 में बदलाव कर शक्ति वापस ली
│
[केशवानंद भारती वाद (1973)] ➔ "मूल ढांचा सिद्धांत" (Basic Structure) प्रतिपादित
│
[मिनर्वा मिल्स वाद (1980)] ➔ मूल ढांचे के सिद्धांत को पुनः सुदृढ़ किया गया
महत्वपूर्ण मामलों का विवरण:
शंकरी प्रसाद बनाम भारत संघ (1951) एवं सज्जन सिंह केस (1965): सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि संसद अनुच्छेद 368 के तहत मौलिक अधिकारों सहित संविधान के किसी भी भाग में संशोधन कर सकती है।
गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य (1967): न्यायालय ने अपने पूर्व के फैसलों को पलटते हुए कहा कि मौलिक अधिकार 'अलौकिक और अपरिवर्तनीय' हैं। संसद अनुच्छेद 368 का प्रयोग करके मौलिक अधिकारों को न तो छीन सकती है और न ही सीमित कर सकती है।
24वां संविधान संशोधन अधिनियम (1971): गोलकनाथ फैसले के प्रभाव को समाप्त करने के लिए सरकार ने अनुच्छेद 13 और अनुच्छेद 368 में संशोधन किया और यह स्पष्ट किया कि संसद को मौलिक अधिकारों सहित किसी भी भाग को संशोधित करने का पूरा अधिकार है।
केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973): संविधान के इतिहास का सबसे बड़ा फैसला (13 न्यायाधीशों की पीठ, 7:6 से निर्णय)। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संसद संविधान के किसी भी हिस्से (मौलिक अधिकारों सहित) में संशोधन कर सकती है, लेकिन वह संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) को नष्ट या परिवर्तित नहीं कर सकती।
मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980): न्यायालय ने फैसला सुनाया कि 'न्यायिक समीक्षा' (Judicial Review) और 'संशोधन की सीमित शक्ति' स्वयं संविधान का मूल ढांचा है। अतः संसद अपनी संशोधन की शक्ति को असीमित नहीं बना सकती।
5. परीक्षा की दृष्टि से अति-महत्वपूर्ण संविधान संशोधन (Master Chart)
प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले प्रमुख संविधान संशोधनों की सूची:
| संशोधन अधिनियम | वर्ष | प्रमुख बदलाव / प्रावधान |
1वां संशोधन | 1951 | नौवीं अनुसूची जोड़ी गई (भूमि सुधार कानूनों को न्यायिक समीक्षा से बचाने हेतु)। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर तर्कसंगत प्रतिबंध लगाए गए। |
7वां संशोधन | 1956 | राज्यों का पुनर्गठन (A, B, C, D श्रेणियों की समाप्ति; 14 राज्य व 6 UTs बने)। दो या अधिक राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय का प्रावधान। |
24वां संशोधन | 1971 | संसद को मौलिक अधिकारों सहित संविधान के किसी भी भाग में संशोधन की शक्ति स्पष्ट की गई। राष्ट्रपति के लिए संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर अनिवार्य किया गया। |
36वां संशोधन | 1975 | सिक्किम को भारत संघ का 22वां पूर्ण राज्य बनाया गया। |
42वां संशोधन | 1976 | 'लघु संविधान' (Mini Constitution) कहा जाता है। प्रस्तावना में 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए। भाग 4A (अनुच्छेद 51A) में मौलिक कर्तव्य जोड़े गए। |
44वां संशोधन | 1978 | 'आंतरिक अशांति' के स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द लाया गया। अनुच्छेद 20 और 21 को आपातकाल में भी सुरक्षित किया गया। संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार से हटाकर कानूनी अधिकार (Art. 300A) बनाया गया। |
52वां संशोधन | 1985 | 10वीं अनुसूची जोड़ी गई (दल-बदल विरोधी कानून - Anti-Defection Law)। |
61वां संशोधन | 1989 | मतदान की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई (Art. 326 में संशोधन)। |
73वां संशोधन | 1992 | पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा मिला (9वां भाग व 11वीं अनुसूची जोड़ी गई)। |
74वां संशोधन | 1992 | शहरी स्थानीय निकायों (नगर पालिकाओं) को संवैधानिक दर्जा (9A भाग व 12वीं अनुसूची)। |
86वां संशोधन | 2002 | अनुच्छेद 21A जोड़ा गया: 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा मौलिक अधिकार बनी। 11वां मौलिक कर्तव्य जोड़ा गया। |
91वां संशोधन | 2003 | मन्त्रिपरिषद् का आकार लोकसभा/विधानसभा की कुल सदस्य संख्या का अधिकतम 15% तय किया गया (दिल्ली हेतु 10%)। |
101वां संशोधन | 2016 | वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया गया (अनुच्छेद 279A - GST परिषद)। |
102वां संशोधन | 2018 | राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया (Art. 338B)। |
103वां संशोधन | 2019 | आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए शिक्षा व सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण का प्रावधान (Art. 15(6) व 16(6))। |
104वां संशोधन | 2020 | लोकसभा व विधानसभाओं में SC/ST सीटों का आरक्षण 10 वर्ष (2030 तक) बढ़ाया गया। एंग्लो-इंडियन (Anglo-Indian) मनोनीत सीटों को समाप्त किया गया। |
105वां संशोधन | 2021 | राज्यों को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC/OBC) की अपनी सूची बनाने की शक्ति बहाल की गई। |
106वां संशोधन | 2023 | नारी शक्ति वंदन अधिनियम: लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान। |
6. Quick Revision Points (त्वरित पुनरीक्षण - एक नज़र में)
संविधान का भाग: भाग 20 (Part XX)।
संबंधित अनुच्छेद: केवल अनुच्छेद 368।
संशोधन प्रक्रिया का स्रोत: दक्षिण अफ्रीका का संविधान।
विधेयक कहाँ पेश हो सकता है: केवल संसद के किसी भी सदन में (राज्य विधानमंडल में नहीं)।
राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति: आवश्यक नहीं।
संयुक्त बैठक (Joint Sitting): संविधान संशोधन के लिए संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं है।
राष्ट्रपति की सहमति: अनिवार्य है (24वें संशोधन 1971 द्वारा बाध्यकारी बनाया गया)।
संशोधन की विधियाँ: 3 विधियाँ (2 विधियाँ Art. 368 के तहत, 1 विधि Art. 368 से बाहर)।
लघु संविधान (Mini Constitution): 42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976।
मूल ढांचे का सिद्धांत: केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य केस (1973)।
मतदान आयु 18 वर्ष: 61वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1989।
जीएसटी (GST): 101वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2016।
महिला आरक्षण (33%): 106वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2023 (नारी शक्ति वंदन अधिनियम)।
7. पिछली परीक्षाओं के महत्वपूर्ण प्रश्न (20+ MCQs with Detailed Solutions)
Q1. भारतीय संविधान में संशोधन की प्रक्रिया का उल्लेख किस भाग और अनुच्छेद में किया गया है?
(a) भाग 18, अनुच्छेद 352
(b) भाग 19, अनुच्छेद 360
(c) भाग 20, अनुच्छेद 368
(d) भाग 21, अनुच्छेद 370
उत्तर: (c)
व्याख्या: भारतीय संविधान के भाग 20 के अनुच्छेद 368 में संविधान संशोधन की शक्तियों और प्रक्रियाओं का वर्णन है।
Q2. भारतीय संविधान में संशोधन करने की प्रक्रिया किस देश के संविधान से ली गई है?
(a) अमेरिका
(b) ब्रिटेन
(c) दक्षिण अफ्रीका
(d) कनाडा
उत्तर: (c)
व्याख्या: भारत में संविधान संशोधन की प्रक्रिया दक्षिण अफ्रीका के संविधान से प्रेरित होकर शामिल की गई है।
Q3. संविधान संशोधन विधेयक संसद के किस सदन में सबसे पहले प्रस्तुत किया जा सकता है?
(a) केवल लोकसभा में
(b) केवल राज्यसभा में
(c) संसद के किसी भी सदन में
(d) केवल राज्यों की विधानसभाओं में
उत्तर: (c)
व्याख्या: अनुच्छेद 368(2) के अनुसार संविधान संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में पेश किया जा सकता है।
Q4. क्या संविधान संशोधन विधेयक को संसद में पेश करने से पहले राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति आवश्यक है?
(a) हाँ, अनिवार्य है
(b) नहीं, पूर्व स्वीकृति आवश्यक नहीं है
(c) केवल संघ से जुड़े मामलों में आवश्यक है
(d) केवल वित्तीय मामलों में आवश्यक है
उत्तर: (b)
व्याख्या: संविधान संशोधन विधेयक को पेश करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश/अनुमति की आवश्यकता नहीं होती।
Q5. यदि संविधान संशोधन विधेयक पर लोकसभा और राज्यसभा के बीच मतभेद हो जाए, तो क्या संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाई जा सकती है?
(a) हाँ, अनुच्छेद 108 के तहत
(b) नहीं, संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है
(c) केवल राष्ट्रपति के विवेक पर निर्भर है
(d) केवल राज्यसभा के सभापति की अनुमति से
उत्तर: (b)
व्याख्या: संविधान संशोधन विधेयक को दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग विशेष बहुमत से पारित होना अनिवार्य है। गतिरोध की स्थिति में संयुक्त बैठक नहीं बुलाई जा सकती और विधेयक समाप्त हो जाता है।
Q6. किस संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा राष्ट्रपति के लिए संविधान संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य बना दिया गया?
(a) 24वां संशोधन, 1971
(b) 42वां संशोधन, 1976
(c) 44वां संशोधन, 1978
(d) 91वां संशोधन, 2003
उत्तर: (a)
व्याख्या: 24वें संशोधन 1971 द्वारा अनुच्छेद 368 में संशोधन कर यह प्रावधान किया गया कि संसद द्वारा पारित संशोधन विधेयक पर राष्ट्रपति अनुमति देने के लिए बाध्य हैं।
Q7. 'मूल ढांचे का सिद्धांत' (Basic Structure Doctrine) उच्चतम न्यायालय ने किस ऐतिहासिक वाद में प्रतिपादित किया था?
(a) गोलकनाथ वाद (1967)
(b) शंकरी प्रसाद वाद (1951)
(c) केशवानंद भारती वाद (1973)
(d) मिनर्वा मिल्स वाद (1980)
उत्तर: (c)
व्याख्या: केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया कि संसद संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन कर सकती है, लेकिन इसके 'मूल ढांचे' को नष्ट नहीं कर सकती।
Q8. किस संविधान संशोधन अधिनियम को 'लघु संविधान' (Mini Constitution) कहा जाता है?
(a) 7वां संशोधन अधिनियम
(b) 24वां संशोधन अधिनियम
(c) 42वां संशोधन अधिनियम
(d) 44वां संशोधन अधिनियम
उत्तर: (c)
व्याख्या: 1976 में किए गए 42वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में बड़े स्तर पर बदलाव किए गए थे, इसलिए इसे 'लघु संविधान' कहा जाता है।
Q9. भारतीय संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी', 'धर्मनिरपेक्ष' (पंथनिरपेक्ष) और 'अखंडता' शब्द किस संशोधन द्वारा जोड़े गए?
(a) 1वां संशोधन
(b) 42वां संशोधन
(c) 44वां संशोधन
(d) 86वां संशोधन
उत्तर: (b)
व्याख्या: 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा प्रस्तावना में ये तीन शब्द पहली और एकमात्र बार जोड़े गए।
Q10. किस संविधान संशोधन द्वारा नागरिकों के लिए 'मौलिक कर्तव्य' (Fundamental Duties) जोड़े गए थे?
(a) 42वां संशोधन (1976)
(b) 44वां संशोधन (1978)
(c) 52वां संशोधन (1985)
(d) 91वां संशोधन (2003)
उत्तर: (a)
व्याख्या: स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संशोधन 1976 द्वारा संविधान में भाग 4A और अनुच्छेद 51A जोड़कर 10 मौलिक कर्तव्य शामिल किए गए थे।
Q11. संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से हटाकर कानूनी अधिकार किस संशोधन द्वारा बनाया गया?
(a) 42वां संशोधन
(b) 44वां संशोधन
(c) 86वां संशोधन
(d) 91वां संशोधन
उत्तर: (b)
व्याख्या: मोरारजी देसाई सरकार द्वारा 44वें संशोधन 1978 के जरिए संपत्ति के अधिकार (Art. 31) को मूल अधिकार से हटाकर अनुच्छेद 300A के तहत कानूनी अधिकार बना दिया गया।
Q12. संविधान में 'दल-बदल विरोधी कानून' (Anti-Defection Law) किस संशोधन द्वारा 10वीं अनुसूची में शामिल किया गया?
(a) 44वां संशोधन
(b) 52वां संशोधन
(c) 61वां संशोधन
(d) 73वां संशोधन
उत्तर: (b)
व्याख्या: 1985 के 52वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान में 10वीं अनुसूची जोड़ी गई और दल-बदल को रोकने के सख्त कानून बनाए गए।
Q13. भारत में मतदान करने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष किस संविधान संशोधन द्वारा की गई?
(a) 42वां संशोधन
(b) 52वां संशोधन
(c) 61वां संशोधन
(d) 86वां संशोधन
उत्तर: (c)
व्याख्या: राजीव गांधी सरकार के समय 61वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1989 द्वारा अनुच्छेद 326 में संशोधन करके मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई।
Q14. पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा किस संशोधन अधिनियम द्वारा प्रदान किया गया?
(a) 71वां संशोधन
(b) 72वां संशोधन
(c) 73वां संशोधन
(d) 74वां संशोधन
उत्तर: (c)
व्याख्या: 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा संविधान में भाग 9 और 11वीं अनुसूची जोड़कर पंचायतों को संवैधानिक दर्जा दिया गया।
Q15. किस संविधान संशोधन द्वारा प्राथमिक शिक्षा (6 से 14 वर्ष के बच्चों हेतु) को मौलिक अधिकार बनाया गया?
(a) 44वां संशोधन
(b) 86वां संशोधन
(c) 91वां संशोधन
(d) 103वां संशोधन
उत्तर: (b)
व्याख्या: 86वें संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा अनुच्छेद 21A जोड़ा गया, जिसने 6-14 वर्ष के बच्चों के लिए निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया।
Q16. मंत्रिपरिषद के आकार को लोकसभा/विधानसभा के कुल सदस्यों के 15% तक सीमित किस संशोधन द्वारा किया गया?
(a) 86वां संशोधन
(b) 91वां संशोधन
(c) 92वां संशोधन
(d) 100वां संशोधन
उत्तर: (b)
व्याख्या: 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा केंद्र और राज्यों में मंत्रियों की संख्या कुल सदस्य संख्या का अधिकतम 15% तय की गई।
Q17. भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) किस संविधान संशोधन अधिनियम के तहत लागू किया गया था?
(a) 100वां संशोधन
(b) 101वां संशोधन
(c) 102वां संशोधन
(d) 103वां संशोधन
उत्तर: (b)
व्याख्या: 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 द्वारा 1 जुलाई 2017 से पूरे देश में अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था GST लागू की गई।
Q18. सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों (EWS) को 10% आरक्षण किस संशोधन द्वारा प्रदान किया गया?
(a) 101वां संशोधन
(b) 102वां संशोधन
(c) 103वां संशोधन
(d) 104वां संशोधन
उत्तर: (c)
व्याख्या: 103वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 द्वारा अनुच्छेद 15(6) और 16(6) जोड़कर EWS वर्ग को 10% आरक्षण दिया गया।
Q19. महिला सशक्तिकरण हेतु लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण से संबंधित संशोधन कौन सा है?
(a) 103वां संशोधन
(b) 104वां संशोधन
(c) 105वां संशोधन
(d) 106वां संशोधन
उत्तर: (d)
व्याख्या: 106वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2023 (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) द्वारा लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित की गईं।
Q20. निम्नलिखित में से कौन सा विषय अनुच्छेद 368 के बाहर संसद के साधारण बहुमत से संशोधित किया जा सकता है?
(a) राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया
(b) नए राज्यों का गठन एवं सीमा परिवर्तन
(c) मौलिक अधिकार
(d) सातवीं अनुसूची की सूचियाँ
उत्तर: (b)
व्याख्या: नए राज्यों का निर्माण, नाम या सीमा परिवर्तन (Art. 3 & 4) संसद के साधारण बहुमत से होता है और इसे अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन नहीं माना जाता।
Q21. राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित '7वां संविधान संशोधन अधिनियम' किस वर्ष पारित हुआ था?
(a) 1950
(b) 1952
(c) 1956
(d) 1960
उत्तर: (c)
व्याख्या: राज्य पुनर्गठन आयोग (फ़ज़ल अली आयोग) की सिफारिशों को लागू करने के लिए 1956 में 7वां संविधान संशोधन पारित किया गया था।
8. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions - FAQs)
Q1. संविधान संशोधन के लिए किस प्रकार का बहुमत आवश्यक होता है?
उत्तर: संविधान संशोधन के लिए मुख्य रूप से दो प्रकार के बहुमत की आवश्यकता होती है:
विशेष बहुमत: सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत तथा उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों का कम से कम
$2/3$ दो-तिहाई बहुमत (अधिकांश उपबंधों हेतु)।विशेष बहुमत + राज्यों का अनुमोदन: विशेष बहुमत के साथ-साथ कम से कम आधे राज्य विधानमंडलों का साधारण बहुमत से समर्थन (संघीय ढांचे से जुड़े विषयों हेतु)।
Q2. क्या राष्ट्रपति संविधान संशोधन विधेयक को पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकते हैं?
उत्तर: नहीं। 24वें संविधान संशोधन 1971 के बाद यह प्रावधान कर दिया गया है कि राष्ट्रपति संविधान संशोधन विधेयक को न तो रोक सकते हैं और न ही पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं; उन्हें इस पर स्वीकृति देना अनिवार्य है।
Q3. 'मूल ढांचा' (Basic Structure) क्या है?
उत्तर: सर्वोच्च न्यायालय ने केशवानंद भारती केस (1973) में यह व्यवस्था दी कि संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, परंतु वह संविधान की मूल आत्मा या नींव (जैसे—लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, संघवाद आदि) को समाप्त या नष्ट नहीं कर सकती। इसे ही 'मूल ढांचा' कहा जाता है।
Q4. क्या राज्य विधानमंडल संविधान संशोधन विधेयक पेश कर सकते हैं?
उत्तर: नहीं। संविधान संशोधन विधेयक पेश करने की शक्ति केवल संसद (लोकसभा व राज्यसभा) के पास है। राज्य विधानमंडल केवल तभी भाग लेते हैं जब किसी संघीय विषय पर संशोधन हेतु आधे राज्यों की स्वीकृति मांगी जाती है।
Q5. 42वें और 44वें संविधान संशोधन को क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है?
उत्तर: 42वें संशोधन (1976) ने संविधान में सबसे व्यापक बदलाव किए (प्रस्तावना संशोधन, मौलिक कर्तव्य आदि), इसलिए इसे 'लघु संविधान' कहते हैं। 44वें संशोधन (1978) ने 42वें संशोधन के कई विवादित प्रावधानों को सुधारा तथा संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार से हटाया।
9. निष्कर्ष (Conclusion)
भारतीय संविधान का भाग 20 (अनुच्छेद 368) एक गतिशील और जीवंत लोकतंत्र की आधारशिला है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि भारत का संविधान एक स्थिर या निर्जीव दस्तावेज़ न रहकर, बदलती सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों के साथ विकसित होता रहे।
संविधान निर्माताओं ने नम्यता और अनम्यता का संतुलन स्थापित करके एक ऐसी व्यवस्था बनाई जो देश को समय के साथ प्रगति करने का अवसर भी देती है और साथ ही जल्दबाज़ी या राजनीतिक स्वार्थ में किए जाने वाले मनमाने परिवर्तनों से बचाती भी है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित 'मूल ढांचे का सिद्धांत' (Basic Structure Doctrine) इस बात की गारंटी देता है कि संसद की संशोधन शक्ति कितनी भी व्यापक क्यों न हो, भारत के लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों पर कभी आँच नहीं आ सकती।
प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, UPPSC, BPSC, SSC CGL आदि) की दृष्टि से:
संशोधन की तीन विधियाँ,
केशवानंद भारती व गोलकनाथ केस का घटनाक्रम,
विशेष बहुमत का नियम व राष्ट्रपति की बाध्यता,
तथा प्रमुख संशोधन (42वां, 44वां, 73वां, 74वां, 86वां, 101वां, 103वां, 106वां)
अत्यधिक महत्वपूर्ण विषय हैं। इस लेख में दी गई मास्टर तालिकाएं, विश्लेषणात्मक बिंदु, Quick Revision और 20+ PYQs अभ्यर्थियों को इस अध्याय की गहरी व व्यावहारिक समझ प्रदान करेंगे।
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