गुरुवार, 10 सितंबर 2026

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जीवन परिचय, रचनाएँ व PYQs | Suryakant Tripathi Nirala Biography in Hindi

छायावाद के महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला': जीवन परिचय, रचनाएँ, पत्रिकाएँ और PYQs | प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए संपूर्ण मार्गदर्शिका


हिंदी साहित्य में छायावाद के चार स्तंभों (प्रसाद, निराला, पंत, महादेवी) में से एक सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' मुुक्त छंद के प्रवर्तक, क्रांतिकारी कवि और महान गद्यकार थे। अपनी ओजस्वी शैली, क्रांतिकारी विचारों और अद्भूत विद्रोही चेतना के कारण इन्हें 'महाप्राण', 'छायावाद का महेश' तथा 'बसंत का अग्रदूत' कहा जाता है।

UPP (UP Police Constable/SI), UPSI, UPSSSC (PET/VDO/Lekhpal), UPTET, CTET, TGT/PGT आदि परीक्षाओं में इनके जीवन, प्रमुख काव्य संग्रहों (विशेषकर अनामिका, परिमल, तुलसीदास, कुकुरमुत्ता), उपन्यासों तथा संपादन पत्रिकाओं (मतवाला) से संबंधित 2 से 3 प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

1. एक नज़र में: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (Quick Revision Table)

तथ्यविवरण
पूरा नामसूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
जन्म वर्ष/तिथि21 फरवरी 1899 (कुछ स्रोतों में 1896 ई.)
जन्म स्थानमहिषादल राज्य, मेदिनीपुर (पश्चिम बंगाल)
मूल निवासगढ़ाकोला, उन्नाव (उत्तर प्रदेश)
पिता का नामपंडित रामसहाय त्रिपाठी
पत्नी का नाममनोहरा देवी
प्रसिद्ध उपाधियाँमहाप्राण, छायावाद का महेश, बसंत का अग्रदूत, मुक्त छंद के प्रवर्तक
साहित्यिक युगछायावादी युग (छायावाद के चार स्तंभों में से एक)
संपादित पत्रिकाएँमतवाला, समन्वय, सुधा
प्रसिद्ध काव्यराम की शक्ति पूजा, सरोज स्मृति (हिंदी का प्रथम शोकगीत), कुकुरमुत्ता, तुलसीदास
निधन तिथि एवं स्थान15 अक्टूबर 1961 (प्रयागराज/इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश)

2. जीवन परिचय (Biography)

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्म 1899 ई. में पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जिले के महिषादल राज्य में हुआ था। इनका मूल निवास उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का गढ़ाकोला गाँव था।

  • प्रारंभिक जीवन एवं पारिवारिक संघर्ष: बचपन में ही इनकी माता का निधन हो गया था। इनका विवाह मनोहरा देवी से हुआ, जिन्होंने इन्हें हिंदी भाषा और साहित्य की ओर प्रेरित किया। किंतु अल्पायु में ही पत्नी, पिता, और बाद में एकमात्र पुत्री सरोज के आकस्मिक निधन ने इनके जीवन को दुखों और अभावों से भर दिया।

  • साहित्यिक अवदान: पुत्री सरोज की स्मृति में इन्होंने 'सरोज स्मृति' नामक कालजयी रचना की, जिसे हिंदी साहित्य का प्रथम शोकगीत (Elegy) माना जाता है। इन्होंने हिंदी कविता को छंदों के बंधन से मुक्त कराकर मुक्त छंद (केचुआ छंद/रबर छंद) की स्थापना की।

  • पत्रकारिता: इन्होंने कोलकाता से निकलने वाली प्रसिद्ध पत्रिका 'मतवाला' तथा 'समन्वय' का संपादन किया। 'मतवाला' के मोटो वाक्य— "अमिय गरल शशि सीकर रबि विधि घोर चक्र के हरन को, मत्त वारुणी पीवे जो जो मत्त सिधुं के तरन को" —के लिए ये विशेष रूप से प्रसिद्ध थे।

  • निधन: 15 अक्टूबर 1961 को प्रयागराज (इलाहाबाद) में इनका निधन हो गया।

3. कृतियों का वर्गीकरण (Literary Works)

निराला जी ने काव्य और गद्य (उपन्यास, कहानी, निबंध) दोनों क्षेत्रों में ऐतिहासिक रचनाएँ की हैं:

┌───────────────────────┐
│सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का संपूर्ण साहित्य  │
└──────────────┬────────┘
                                       │
   ┌─────────────┼──────────────┬───────────┬────────┐
▼ ▼ ▼ ▼ ▼ 1. काव्य संग्रह 2. प्रसिद्ध उपन्यास 3. कहानी संग्रह 4. निबंध संग्रह 5. आत्मकथात्मक/संस्मरण ├── अनामिका (1923) ├── अप्सरा (1931) ├── लिली (1934) ├── प्रबंध पद्म └── कुल्ली भाट (1938/41) ├── परिमल (1930) ├── अलका (1933) ├── सखी (1935) ├── प्रबंध प्रतिमा ├── गीतिका (1936) ├── प्रभावती (1936) ├── सुकुल की बीवी └── चाबुक ├── तुलसीदास (1938) ├── निरुपमा (1936) └── चतुरी चमार ├── कुकुरमुत्ता ├── कुल्ली भाट └── बेला, नये पत्ते ├── बिल्लेसुर बकरिहा └── काले कारनामे

(A) प्रमुख काव्य संग्रह एवं उनकी विशेषताएँ

काव्य संग्रहप्रकाशन वर्षविशेष तथ्य एवं प्रसिद्ध कविताएँ
अनामिका1923 (प्रथम)इसमें इनकी प्रसिद्ध कविताएँ 'सरोज स्मृति' और 'राम की शक्ति पूजा' संकलित हैं।
परिमल1930इसमें 'जूही की कली' (प्रथम मुक्त छंद कविता), 'भिक्षुक', और 'बादल राग' संकलित हैं।
गीतिका1936गीति काव्य संगीतात्मकता से परिपूर्ण।
तुलसीदास1938गोस्वामी तुलसीदास के जीवन पर आधारित प्रबंधात्मक काव्य।
कुकुरमुत्ता1942पूँजीवाद के विरुद्ध व्यंग्यात्मक एवं प्रगतिवादी काव्य (गुलाब और कुकुरमुत्ता का प्रतीक)।
अणिमा1943भक्ति भावना एवं रहस्यानुभूति से युक्त कविताएँ।
नये पत्ते1946हास्य-व्यंग्य और प्रगतिशील विचारों से युक्त काव्य संग्रह।
बेला / अर्चना1951 / 1950गज़ल और प्रयोगवादी प्रभाव से युक्त रचनाएँ।

(B) गद्य साहित्य (उपन्यास, कहानी एवं निबंध)

1. प्रमुख उपन्यास (Novels)

  • अप्सरा (1931): निराला जी का प्रथम उपन्यास।

  • अलका (1933), प्रभावती (1936), निरुपमा (1936)

  • कुल्ली भाट (1938/41): सामाजिक पृष्ठभूमि पर आधारित प्रसिद्ध उपन्यास/आत्मकथात्मक संस्मरण।

  • बिल्लेसुर बकरिहा (1942): ग्रामीण जीवन का सजीव एवं व्यंग्यात्मक चित्रण।

  • चोटी की पकड (1946), काले कारनामे (1950 - अपूर्ण)

2. प्रमुख कहानी संग्रह (Short Stories)

  • लिली, सखी, सुकुल की बीवी, चतुरी चमार, दो घड़े।

3. प्रमुख निबंध संग्रह (Essays)

  • प्रबंध पद्म (1934), प्रबंध प्रतिमा (1940), चाबुक, चयन, संग्रह।

4. संपादन (Periodicals)

  • मतवाला: कोलकाता से प्रकाशित प्रसिद्ध साप्ताहिक पत्रिका।

  • समन्वय, सुधा।

4. भाषा-शैली एवं साहित्यिक विशेषताएँ

  • मुक्त छंद के जनक: इन्होंने हिंदी कविता को पारंपरिक छंद-बंधनों से मुक्त करके 'मुक्त छंद' की प्रतिष्ठा की।

  • ओज और क्रांति: इनकी भाषा तत्समप्रधान खड़ी बोली है, जिसमें ओज, विद्रोह, और करुणा का अद्भुत संगम मिलता है।

  • प्रगतिशील चेतना: 'भिक्षुक', 'वह तोड़ती पत्थर' और 'कुकुरमुत्ता' जैसी कविताओं में इन्होंने शोषितों और मजदूरों की व्यथा का सजीव चित्रण किया है।

5. विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्न (Previous Year Solved MCQs)

Q1. हिंदी साहित्य में 'मुक्त छंद' (Free Verse) का प्रवर्तक किसे माना जाता है? (UP Police Constable / UPSSSC PET)

  • (A) जयशंकर प्रसाद

  • (B) सुमित्रानंदन पंत

  • (C) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

  • (D) महादेवी वर्मा

    उत्तर: (C) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

Q2. प्रसिद्ध काव्य 'राम की शक्ति पूजा' किस काव्य संग्रह में संकलित है? (UPSI / UPTET)

  • (A) परिमल

  • (B) अनामिका

  • (C) गीतिका

  • (D) कुकुरमुत्ता

    उत्तर: (B) अनामिका

Q3. 'मतवाला' पत्रिका के संपादक कौन थे? (UPSSSC VDO / TGT)

  • (A) भारतेंदु हरिश्चंद्र

  • (B) महावीर प्रसाद द्विवेदी

  • (C) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

  • (D) धर्मवीर भारती

    उत्तर: (C) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

6. अभ्यास प्रश्नोत्तरी (Practice Quiz)

  1. हिंदी साहित्य का प्रथम 'शोकगीत' (Elegy) किसे माना जाता है और इसके रचयिता कौन हैं?

  2. 'कुकुरमुत्ता' कविता में गुलाब और कुकुरमुत्ता किसके प्रतीक हैं?

  3. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' को साहित्य में किन उपनामों से जाना जाता है?

उत्तर कुंजी (Self Check):

  1. 'सरोज स्मृति'; रचयिता: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (अपनी पुत्री सरोज की याद में)।

  2. गुलाब पूँजीपति/शोषक वर्ग का तथा कुकुरमुत्ता शोषित/आम जनमानस का प्रतीक है।

  3. 'महाप्राण', 'छायावाद का महेश' तथा 'बसंत का अग्रदूत'

निष्कर्ष (Conclusion)

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' हिंदी साहित्य के अद्वितीय और विद्रोही हस्ताक्षर हैं। छायावाद से लेकर प्रगतिवाद तक इनका साहित्यिक अवदान अतुलनीय है। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से इनकी रचनाएँ 'अनामिका', 'परिमल', 'तुलसीदास', 'कुकुरमुत्ता', और 'कुल्ली भाट' तथा इनकी पत्रिका 'मतवाला' अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसे अपने क्विक रिवीजन नोट्स में अवश्य शामिल करें।

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