सम मात्रिक छंद | Sam Matrik Chhand

सम मात्रिक छंद: हिंदी साहित्य की समान लय का आधार

प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UPSC, SSC, Banking, UGC NET, TET, State PCS, REET, UPSSSC) में हिंदी साहित्य एवं व्याकरण के अंतर्गत छंद का अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है। सम मात्रिक छंद, मात्रिक छंदों का एक प्रमुख वर्ग है, जिससे प्रायः परीक्षाओं में प्रश्न पूछे जाते हैं। इस लेख में हम सम मात्रिक छंदों के प्रकार, उनके लक्षण, प्रमुख उदाहरण और पिछले वर्षों के वस्तुनिष्ठ प्रश्नों (MCQs) पर विस्तार से चर्चा करेंगे।


सम मात्रिक छंद की परिभाषा

उन छंदों को सम मात्रिक छंद (Sam Matrik Chhand) कहा जाता है, जिनके सभी चारों चरणों (पंक्तियों) में मात्राओं की संख्या समान (बराबर) होती है । यह मात्रिक छंदों के तीन मुख्य वर्गों में से एक है (अन्य हैं: अर्द्धसम मात्रिक और विषम मात्रिक) ।

सरल शब्दों में: यदि किसी छंद के प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ चरण – सभी में मात्राओं की संख्या एक समान हो, तो वह सम मात्रिक छंद कहलाता है।


सम मात्रिक छंदों के मुख्य प्रकार

निम्नलिखित सम मात्रिक छंद प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं:

  1. चौपाई (16)
  2. रोला (24)
  3. गीतिका (26)
  4. हरिगीतिका (28)
  5. वीर या आल्हा (31)
  6. अहीर छंद (11)
  7. तोमर छंद (12)
  8. मानव छंद (14)
  9. पद्धरि छंद (16)
  10. दिगपाल छंद (24)

1. चौपाई (Choupai)

  • यह हिंदी साहित्य का सबसे प्रचलित सम मात्रिक छंद है। तुलसीदास कृत रामचरितमानस इसी छंद में लिखा गया है।
  • इसमें चार चरण होते है, प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ होते है।
विशेषताविवरण
प्रकारसम मात्रिक छंद
मात्राप्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ
प्रसिद्ध उदाहरण"जो सुमिरत सिधि होइ गन नायक। करिबे बिनयु पाय पग पायक।।"

उदाहरण:

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥

राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥

2. रोला (Rola)

  • यह सम मात्रिक छंद 24 मात्राओं वाला होता है और आधुनिक कवियों (विशेषकर मैथिलीशरण गुप्त) ने इसका खूब प्रयोग किया है।
  • इसमें चार चरण होते है, प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होते है।
विशेषताविवरण
प्रकारसम मात्रिक छंद
मात्राप्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ
यति (विराम)11वीं और 13वीं मात्रा पर
प्रसिद्ध उदाहरण"नव उज्ज्वल जल धार, हार हीरक सी सोहत। बिच-बिच छहरत बूँद, मीन मुक्तामन मोहत।।"

3. गीतिका (Geetika)

  • यह सम मात्रिक छंदों की श्रेणी में ही आता है और इसका प्रयोग आधुनिक गीतों और कविताओं में किया जाता है।
  • इसमें चार चरण होते है, प्रत्येक चरण में 26 मात्राएँ होते है।

4. हरिगीतिका (Hargitika)

  • यह भी एक सम मात्रिक छंद है, जिसका प्रयोग विशेष रूप से भक्तिकालीन काव्य में मिलता है।
  • इसमें चार चरण होते है, प्रत्येक चरण में 28 मात्राएँ होते है।
विशेषताविवरण
प्रकारसम मात्रिक छंद
विशेषताचारों चरणों में मात्राओं की समानता

उदाहरण:

खग वृन्द सोता है अतः, अब मौन कुंजरि छा रही।

मरकत-मयी पाषाण-सी, सरिता अचल लहरा रही॥

5. वीर या आल्हा (31 मात्राएँ)

  • लक्षण: इसके प्रत्येक चरण में 31 मात्राएँ होती हैं।
  • इसमें 16 और 15 मात्राओं पर यति होती है। यह उत्साह और वीरता की कविताओं के लिए प्रसिद्ध है।

सम मात्रिक, अर्द्धसम और विषम मात्रिक में अंतर

छंद का प्रकारपरिभाषाउदाहरण
सम मात्रिकचारों चरणों में समान मात्राएँचौपाई, रोला, हरिगीतिका
अर्द्धसम मात्रिकविषम चरण (1,3) में एक मात्रा और सम चरण (2,4) में दूसरी मात्रादोहा, सोरठा, उल्लाला
विषम मात्रिकसभी चरणों में भिन्न-भिन्न मात्राएँकुण्डलिया

पिछले वर्षों के प्रश्न (Previous Year MCQs)

Q1. चारों चरणों में समान मात्राओं वाले छंद को क्या कहते हैं?

A) सम मात्रिक छंद
B) विषम मात्रिक छंद
C) अर्द्धसम छंद
D) ये सभी

उत्तर: A) सम मात्रिक छंद

व्याख्या: सम मात्रिक छंद की परिभाषानुसार, जिस छंद के सभी चारों चरणों में मात्राओं की संख्या समान होती है, उसे सम मात्रिक छंद कहते हैं ।


Q2. निम्न में सम मात्रिक छन्द का कौन-सा उदाहरण है? [UPSSSC (JE) Exam, 2016]

A) दोहा
B) सोरठा
C) चौपाई
D) उल्लाला

उत्तर: C) चौपाई

व्याख्या: चौपाई सम मात्रिक छंद है। इसके अलावा रोला, हरिगीतिका तथा गीतिका भी सम मात्रिक छंद हैं। दोहा, सोरठा और उल्लाला अर्द्धसम मात्रिक छंद हैं ।


Q3. निम्नलिखित में से कौन सा छंद सम मात्रिक है?

A) दोहा
B) रोला
C) सोरठा
D) उल्लाला

उत्तर: B) रोला

व्याख्या: रोला एक सम मात्रिक छंद है। इसे काव्य-छन्द भी कहते हैं। दोहा, सोरठा अर्द्धसम मात्रिक छंद हैं ।


Q4. रोला छंद में प्रति चरण कुल कितनी मात्राएँ होती हैं?

A) 16 मात्राएँ
B) 24 मात्राएँ
C) 28 मात्राएँ
D) 32 मात्राएँ

उत्तर: B) 24 मात्राएँ

व्याख्या: रोला छंद के प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं, जो 11 और 13 मात्राओं पर यति (विराम) विभाजित होती हैं ।


Q5. चौपाई छंद के प्रत्येक चरण में कितनी मात्राएँ होती हैं?

A) 11 मात्राएँ
B) 13 मात्राएँ
C) 16 मात्राएँ
D) 24 मात्राएँ

उत्तर: C) 16 मात्राएँ

व्याख्या: चौपाई एक सम मात्रिक छंद है, जिसके प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ होती हैं।


अक्सर पूछे जाने वाले तथ्य (Quick Revision Table)

विषयविवरण
सम मात्रिक छंद की परिभाषाचारों चरणों में समान मात्राएँ
प्रमुख सम मात्रिक छंदचौपाई, रोला, हरिगीतिका, गीतिका
चौपाई की मात्रा16 मात्राएँ प्रति चरण
रोला की मात्रा24 मात्राएँ प्रति चरण (11-13 पर यति)
अर्द्धसम मात्रिक छंददोहा, सोरठा, उल्लाला
विषम मात्रिक छंदकुण्डलिया

निष्कर्ष

  • सम मात्रिक छंद हिंदी व्याकरण का वह महत्वपूर्ण अध्याय है जहाँ मात्राओं की समानता छंद का मूल आधार होती है।
  • प्रतियोगी परीक्षाओं में चौपाई (16 मात्रा), रोला (24 मात्रा), हरिगीतिका और गीतिका से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
  • इन छंदों की विशेषताओं को याद रखना तथा दोहा, सोरठा (अर्द्धसम) से इनका अंतर समझना अत्यंत आवश्यक है।

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