भारतीय संवैधानिक विकास का इतिहास (Constitutional History of India): ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन से स्वतंत्रता तक का क्रमिक विकास, अधिनियम, Quick Revision & 20+ MCQs
भारतीय प्रशासनिक सेवा (UPSC CSE), राज्य लोक सेवा आयोग (UPPCS, BPSC, MPPSC, RAS), SSC CGL, Banking, Railways, Defense (CDS/NDA) और अन्य सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में "भारतीय संवैधानिक विकास का इतिहास" (Constitutional History of India) भारतीय राजव्यवस्था (Polity) और आधुनिक भारत के इतिहास (Modern History) दोनों का अति-महत्वपूर्ण एवं निर्णायक विषय है।
भारत का वर्तमान संविधान 26 जनवरी 1950 को पूरी तरह लागू हुआ, लेकिन इसकी नींव ब्रिटिश शासन काल के दौरान पारित विभिन्न कानूनों, चार्टर एक्ट्स और भारत सरकार अधिनियमों में रखी जा चुकी थी। इस गहन एवं परीक्षा-उन्मुख गाइड में हम कंपनी शासन (1773-1858) और ताज शासन (1858-1947) के सभी अधिनियमों, प्रमुख विशेषताओं, तुलनात्मक तालिकाओं, Quick Revision नोट्स, 20+ विगत वर्षों के MCQs और प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्नों (FAQs) का क्रमबद्ध अध्ययन करेंगे।
1. संवैधानिक विकास का विभाजन एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1757 के प्लासी के युद्ध और 1764 के बक्सर के युद्ध में ईस्ट इंडिया कंपनी की विजय के बाद भारत में ब्रिटिश राजनीतिक सत्ता की नींव पड़ी। 1765 में इलाहाबाद की संधि द्वारा कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की 'दीवानी' (राजस्व वसूलने का अधिकार) प्राप्त हुई।
इसके बाद कंपनी के कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगाने तथा भारत में एक केंद्रीकृत प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने के लिए ब्रिटिश संसद ने समय-समय पर विभिन्न कानून पारित किए। भारतीय संवैधानिक विकास के इतिहास को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया जाता है:
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│ भारतीय संवैधानिक विकास का विभाजन │
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│ ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन │ │ब्रिटिश क्राउन का शासन │
│ (1773 - 1858) │ │ (1858 - 1947) │
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│ │
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• 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट • 1813 का चार्टर एक्ट • 1858 का भारत सरकार अधिनियम • 1919 का मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड
• 1784 का पिट्स इंडिया एक्ट • 1833 का चार्टर एक्ट • 1861 का भारत परिषद अधिनियम • 1935 का भारत सरकार अधिनियम
• 1793 का चार्टर एक्ट • 1853 का चार्टर एक्ट • 1909 का मार्ले-मिंटो सुधार • 1947 का स्वतंत्रता अधिनियम
2. ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन (1773 – 1858)
(i) 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट (Regulating Act of 1773):
यह ब्रिटिश संसद द्वारा भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के कार्यों को नियंत्रित और नियमित करने का पहला प्रयास था।
बंगाल का गवर्नर-जनरल: बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पदनाम दिया गया और उसकी सहायता के लिए 4 सदस्यीय परिषद का गठन किया गया। वारेन हेस्टिंग्स बंगाल के प्रथम गवर्नर-जनरल बने।
मद्रास और बॉम्बे का अधीन होना: मद्रास एवं बॉम्बे के गवर्नरों को बंगाल के गवर्नर-जनरल के अधीन कर दिया गया।
उच्चतम न्यायालय की स्थापना: 1774 में कोलकाता (फोर्ट विलियम) में एक उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना हुई, जिसमें एक मुख्य न्यायाधीश (सर एलिजा इम्पे) तथा 3 अन्य न्यायाधीश थे।
निजी व्यापार पर रोक: कंपनी के कर्मचारियों के निजी व्यापार करने और भारतीय लोगों से रिश्वत या उपहार लेने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया।
(ii) 1781 का एक्ट ऑफ सेटलमेंट (Act of Settlement):
1773 के एक्ट की कमियों को दूर करने के लिए पारित किया गया। इसने गवर्नर-जनरल और उसकी परिषद को उच्चतम न्यायालय के क्षेत्राधिकार से मुक्त कर दिया।
(iii) 1784 का पिट्स इंडिया एक्ट (Pitt's India Act of 1784):
द्वैध शासन (Dual Government) की शुरुआत: कंपनी के राजनीतिक और व्यापारिक कार्यों को अलग-अलग किया गया।
कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स (Court of Directors): व्यापारिक मामलों के प्रबंधन हेतु।
बोर्ड ऑफ कंट्रोल (Board of Control): राजनीतिक मामलों के प्रबंधन एवं नियंत्रण हेतु 6 सदस्यीय नए निकाय का गठन।
पहली बार कंपनी के अधीन क्षेत्र को "भारत में ब्रिटिश संपत्ति का क्षेत्र" कहा गया।
(iv) 1793 का चार्टर एक्ट (Charter Act of 1793):
बोर्ड ऑफ कंट्रोल के सदस्यों और कर्मचारियों के वेतन को भारतीय राजस्व से देना तय किया गया।
कंपनी के व्यापारिक अधिकार को अगले 20 वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया।
(v) 1813 का चार्टर एक्ट (Charter Act of 1813):
व्यापारिक एकाधिकार की समाप्ति: कंपनी के भारत के साथ व्यापारिक एकाधिकार (Trade Monopoly) को समाप्त कर दिया गया, केवल चाय के व्यापार और चीन के साथ व्यापार पर एकाधिकार बना रहा।
शिक्षा हेतु प्रावधान: भारत में शिक्षा के प्रसार के लिए प्रतिवर्ष 1 लाख रुपये खर्च करने का प्रावधान किया गया।
ईसाई मिशनरियों को अनुमति: भारत में धर्म प्रचार करने के लिए ईसाई मिशनरियों को भारत आने की छूट मिली।
(vi) 1833 का चार्टर एक्ट (Charter Act of 1833) - केंद्रीकरण का चरम:
भारत का गवर्नर-जनरल: बंगाल के गवर्नर-जनरल को 'भारत का गवर्नर-जनरल' बना दिया गया। लॉर्ड विलियम बेंटिक भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल बने।
पूर्ण व्यापारिक एकाधिकार समाप्त: चाय और चीन के साथ व्यापार पर भी कंपनी का एकाधिकार समाप्त हो गया। कंपनी अब पूर्णतः प्रशासनिक एवं राजनीतिक निकाय बन गई।
विधि सदस्य का शामिल होना: गवर्नर-जनरल की परिषद में चौथे सदस्य के रूप में एक कानूनी सदस्य (Legal Member) को जोड़ा गया (लॉर्ड मैकाले प्रथम विधि सदस्य बने)।
दास प्रथा के उन्मूलन का निर्देश: दास प्रथा को गैर-कानूनी घोषित किया गया (जिसे 1843 में समाप्त कर दिया गया)।
(vii) 1853 का चार्टर एक्ट (Charter Act of 1853):
खुली प्रतियोगिता परीक्षा: सिविल सेवकों की चयन प्रक्रिया के लिए खुली प्रतियोगिता (Open Competition) का शुभारंभ हुआ। इसके लिए 1854 में 'मैकाले समिति' की नियुक्ति की गई।
विधायी और कार्यकारी कार्यों का पृथक्करण: गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी एवं प्रशासनिक कार्यों को अलग किया गया और 6 नए विधान पार्षदों को जोड़कर 'केंद्रीय विधान परिषद' (भारतीय मिनी संसद) की स्थापना हुई।
3. ब्रिटिश क्राउन का शासन (1858 – 1947)
1857 की महान क्रांति के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर दिया गया और भारत का प्रत्यक्ष शासन ब्रिटिश ताज (Crown) के हाथों में चला गया।
(i) 1858 का भारत सरकार अधिनियम (Government of India Act 1858):
शासन का हस्तांतरण: भारत का शासन सीधे महारानी विक्टोरिया के अधीन आ गया।
वायसराय का पद: 'भारत का गवर्नर-जनरल' अब 'भारत का वायसराय' (Crown का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि) कहलाया। लॉर्ड कैनिंग भारत के प्रथम वायसराय बने।
भारत सचिव का पद: बोर्ड ऑफ कंट्रोल और कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स को समाप्त कर 'द्वैध शासन' का अंत किया गया। भारत के प्रशासनिक नियंत्रण के लिए 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) का नया पद सृजित हुआ (जिसकी सहायता हेतु 15 सदस्यीय 'भारत परिषद' का गठन हुआ)।
(ii) 1861 का भारत परिषद अधिनियम (Indian Councils Act 1861):
प्रतिनिधि संस्थाओं की शुरुआत: पहली बार विधायी प्रक्रिया में भारतीयों को शामिल करने की शुरुआत हुई (1862 में लॉर्ड कैनिंग ने बनारस के राजा, पटियाला के महाराज और सर दिनकर राव को विधान परिषद में मनोनीत किया)।
विभागीय प्रणाली (Portfolio System): लॉर्ड कैनिंग द्वारा शुरू की गई पोर्टफोलियो प्रणाली को मान्यता मिली।
अध्यादेश जारी करने की शक्ति: वायसराय को आपातकाल में बिना काउंसिल की सहमति के अध्यादेश (Ordinance) जारी करने की शक्ति मिली (अवधि: 6 माह)।
विकेंद्रीकरण की शुरुआत: बॉम्बे और मद्रास प्रेसीडेंसियों को पुनः विधायी शक्तियां देकर विधायी विकेंद्रीकरण की नींव रखी गई।
(iii) 1892 का भारत परिषद अधिनियम (Indian Councils Act 1892):
विधान परिषदों के कार्यों में वृद्धि की गई और उन्हें बजट पर बहस करने तथा कार्यपालिका से प्रश्न पूछने का अधिकार मिला।
सीमित एवं अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली की शुरुआत हुई (यद्यपि 'चुनाव' शब्द का प्रयोग नहीं किया गया था)।
(iv) 1909 का मार्ले-मिंटो सुधार (Morley-Minto Reforms):
सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व (Communal Representation): मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल (Separate Electorate) की व्यवस्था की गई। लॉर्ड मिंटो को 'सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक' कहा जाता है।
कार्यपालिका में भारतीय: वायसराय की कार्यपालिका परिषद में शामिल होने वाले प्रथम भारतीय सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा थे (उन्हें विधि सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया था)।
अनुपूरक प्रश्न (Supplementary Questions) पूछने और बजट पर संकल्प रखने की अनुमति मिली।
(v) 1919 का मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (Montagu-Chelmsford Reforms):
प्रांतों में द्वैध शासन (Dyarchy in Provinces): प्रांतीय विषयों को दो भागों में बांटा गया:
हस्तांतरित विषय (Transferred Subjects): गवर्नर और मंत्रियों की सलाह पर।
आरक्षित विषय (Reserved Subjects): गवर्नर और उसकी कार्यकारिणी परिषद के अधीन।
केंद्र में द्विस्तरीय विधायिका: पहली बार केंद्र में द्विसदनीय व्यवस्था (राज्य परिषद/उच्च सदन तथा केंद्रीय विधानसभा/निम्न सदन) और प्रत्यक्ष निर्वाचन की शुरुआत हुई।
लोक सेवा आयोग का गठन: 1926 में 'ली आयोग' की सिफारिश पर केंद्रीय लोक सेवा आयोग (CPSC) का गठन हुआ।
पृथक निर्वाचक मंडल का विस्तार सिखों, भारतीय ईसाइयों, एंग्लो-इंडियंस और यूरोपियनों तक किया गया।
(vi) 1935 का भारत सरकार अधिनियम (Government of India Act 1935) - संविधान का मुख्य स्रोत:
यह भारतीय संविधान का सबसे बड़ा स्रोत है। इसमें 321 अनुच्छेद और 10 अनुसूचियां थीं।
अखिल भारतीय संघ (All-India Federation): राज्यों और रियासतों को मिलाकर एक संघ स्थापित करने का प्रस्ताव (जो कभी अस्तित्व में नहीं आ सका क्योंकि रियासतों ने शामिल होने से मना कर दिया)।
प्रांतीय स्वायत्तता (Provincial Autonomy): प्रांतों से द्वैध शासन समाप्त कर दिया गया और उन्हें स्वायत्तता दी गई।
केंद्र में द्वैध शासन: केंद्र में हस्तांतरित और आरक्षित विषयों के साथ द्वैध शासन लागू करने का प्रावधान।
शक्तियों का विभाजन (तीन सूचियां):
संघ सूची: 59 विषय
राज्य सूची: 54 विषय
समवर्ती सूची: 36 विषय (अवशिष्ट शक्तियां वायसराय को दी गईं)।
संघीय न्यायालय (Federal Court): 1937 में दिल्ली में एक संघीय न्यायालय की स्थापना हुई।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI): देश की मुद्रा और साख पर नियंत्रण हेतु RBI की स्थापना का प्रावधान।
(vii) 1947 का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम (Indian Independence Act 1947):
माउंटबेटन योजना (3 जून 1947): इसके आधार पर ब्रिटिश संसद में विधेयक प्रस्तुत किया गया।
दो डोमिनियन की स्थापना: 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र अधिराज्यों का सृजन हुआ।
ब्रिटिश भारत पर प्रभुत्व समाप्त: भारत में ब्रिटेन के शासन का अंत हुआ और वायसराय का पद समाप्त कर 'गवर्नर-जनरल' का पद बनाया गया।
संविधान सभा को शक्ति: दोनों देशों की संविधान सभाओं को अपने देश का संविधान बनाने और किसी भी ब्रिटिश कानून को रद्द करने का अधिकार मिला।
4. प्रमुख तथ्य तुलनात्मक तालिका (Comparative Chart of Major Acts)
| अधिनियम / कानून | प्रमुख परिवर्तन / लैंडमार्क प्रावधान | महत्वपूर्ण पद / व्यक्तित्व |
| 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट | बंगाल का गवर्नर-जनरल, 1774 में कोलकाता में उच्चतम न्यायालय | वारेन हेस्टिंग्स (प्रथम गवर्नर-जनरल), सर एलिजा इम्पे |
| 1784 का पिट्स इंडिया एक्ट | द्वैध शासन (बोर्ड ऑफ कंट्रोल + कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स) | विलियम पिट (ब्रिटिश प्रधानमंत्री) |
| 1813 का चार्टर एक्ट | व्यापारिक एकाधिकार समाप्त (चाय/चीन को छोड़कर), शिक्षा हेतु ₹1 लाख | ईसाई मिशनरियों का आगमन |
| 1833 का चार्टर एक्ट | भारत का गवर्नर-जनरल, व्यापारिक एकाधिकार पूर्णतः समाप्त | लॉर्ड विलियम बेंटिक (प्रथम भारत के गवर्नर-जनरल) |
| 1853 का चार्टर एक्ट | सिविल सेवाओं के लिए खुली प्रतियोगिता, मैकाले समिति (1854) | लॉर्ड मैकाले |
| 1858 का भारत सरकार अधिनियम | क्राउन का शासन, भारत सचिव का पद, वायसराय का पद | लॉर्ड कैनिंग (प्रथम वायसराय) |
| 1861 का भारत परिषद अधिनियम | पोर्टफोलियो प्रणाली, अध्यादेश जारी करने की शक्ति | लॉर्ड कैनिंग |
| 1909 का मार्ले-मिंटो सुधार | मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल, कार्यपालिका में प्रथम भारतीय | लॉर्ड मिंटो (सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक), सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा |
| 1919 का मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड | प्रांतों में द्वैध शासन, ली आयोग की सिफारिश पर PSC (1926) | मोंटेग्यू (भारत सचिव), चेम्सफोर्ड (वायसराय) |
| 1935 का भारत सरकार अधिनियम | प्रांतीय स्वायत्तता, केंद्र में द्वैध शासन, 1937 में संघीय न्यायालय | लॉर्ड विलिंगडन / लॉर्ड लिनलिथगो |
| 1947 का स्वतंत्रता अधिनियम | भारत और पाकिस्तान का विभाजन, ब्रिटिश शासन का अंत | लॉर्ड माउंटबेटन (स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल) |
5. Quick Revision Notes (परीक्षा हेतु त्वरित पुनरीक्षण)
कोलकाता उच्चतम न्यायालय: स्थापना 1774 (1773 के एक्ट के तहत)।
भारत का प्रथम गवर्नर-जनरल: लॉर्ड विलियम बेंटिक (1833 का एक्ट)।
भारत का प्रथम वायसराय: लॉर्ड कैनिंग (1858 का एक्ट)।
कंपनी का व्यापारिक एकाधिकार समाप्त: आंशिक रूप से 1813 में; पूर्णतः 1833 में।
सिविल सेवा खुली प्रतियोगिता: 1853 का चार्टर एक्ट।
सांप्रदायिक निर्वाचन की शुरुआत: 1909 का मार्ले-मिंटो सुधार (मुसलमानों हेतु)।
प्रांतों में द्वैध शासन लागू: 1919 का अधिनियम।
प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त एवं स्वायत्तता: 1935 का अधिनियम।
केंद्र में द्वैध शासन का प्रावधान: 1935 का अधिनियम।
वायसराय की कार्यपालिका में प्रथम भारतीय: सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा (1909)।
अध्यादेश जारी करने की शक्ति: 1861 का अधिनियम।
बजट पर बहस की शक्ति: 1892 का अधिनियम।
संवैधानिक ढांचे का सबसे बड़ा स्रोत: 1935 का भारत सरकार अधिनियम (लगभग 250+ प्रावधान यहीं से प्रेरित हैं)।
6. विगत वर्षों के 20+ महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (Previous Years MCQs)
Q1. किस अधिनियम द्वारा बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' नाम दिया गया था?
(a) 1784 का पिट्स इंडिया एक्ट
(b) 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट
(c) 1813 का चार्टर एक्ट
(d) 1833 का चार्टर एक्ट
उत्तर: (b)
Q2. कोलकाता में उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना किस अधिनियम के अंतर्गत की गई थी?
(a) 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट
(b) 1784 का पिट्स इंडिया एक्ट
(c) 1813 का चार्टर एक्ट
(d) 1833 का चार्टर एक्ट
उत्तर: (a) (स्थापना वर्ष 1774 था)
Q3. ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत के साथ व्यापारिक एकाधिकार को किस चार्टर एक्ट द्वारा पूर्णतः समाप्त कर दिया गया?
(a) 1813 का चार्टर एक्ट
(b) 1833 का चार्टर एक्ट
(c) 1853 का चार्टर एक्ट
(d) 1793 का चार्टर एक्ट
उत्तर: (b)
Q4. निम्नलिखित में से किसे 'भारत का प्रथम गवर्नर-जनरल' बनाया गया?
(a) वारेन हेस्टिंग्स
(b) लॉर्ड कैनिंग
(c) लॉर्ड विलियम बेंटिक
(d) लॉर्ड डलहौजी
उत्तर: (c)
Q5. किस अधिनियम ने पहली बार भारत में शिक्षा पर प्रतिवर्ष ₹1 लाख खर्च करने का प्रावधान किया?
(a) 1793 का चार्टर एक्ट
(b) 1813 का चार्टर एक्ट
(c) 1833 का चार्टर एक्ट
(d) 1853 का चार्टर एक्ट
उत्तर: (b)
Q6. सिविल सेवकों की भर्ती हेतु खुली प्रतियोगिता परीक्षा का शुभारंभ किस अधिनियम द्वारा किया गया?
(a) 1833 का चार्टर एक्ट
(b) 1853 का चार्टर एक्ट
(c) 1858 का भारत सरकार अधिनियम
(d) 1861 का भारत परिषद अधिनियम
उत्तर: (b)
Q7. भारत के गवर्नर-जनरल को 'वायसराय' की उपाधि पहली बार किस अधिनियम के तहत दी गई?
(a) 1833 का चार्टर एक्ट
(b) 1858 का भारत सरकार अधिनियम
(c) 1861 का भारत परिषद अधिनियम
(d) 1909 का मार्ले-मिंटो सुधार
उत्तर: (b)
Q8. किस अधिनियम को 'मार्ले-मिंटो सुधार' के नाम से भी जाना जाता है?
(a) 1892 का भारत परिषद अधिनियम
(b) 1909 का भारत परिषद अधिनियम
(c) 1919 का भारत सरकार अधिनियम
(d) 1935 का भारत सरकार अधिनियम
उत्तर: (b)
Q9. 'सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक' (Father of Communal Electorate) किसे कहा जाता है?
(a) लॉर्ड कर्जन
(b) लॉर्ड मिंटो
(c) लॉर्ड चेम्सफोर्ड
(d) लॉर्ड हार्डिंग
उत्तर: (b)
Q10. प्रांतीय स्तर पर 'द्वैध शासन' (Dyarchy in Provinces) किस अधिनियम द्वारा लागू किया गया था?
(a) 1909 का अधिनियम
(b) 1919 का भारत सरकार अधिनियम
(c) 1935 का भारत सरकार अधिनियम
(d) 1892 का अधिनियम
उत्तर: (b)
Q11. प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त कर 'प्रांतीय स्वायत्तता' (Provincial Autonomy) किस अधिनियम द्वारा दी गई?
(a) 1909 का अधिनियम
(b) 1919 का अधिनियम
(c) 1935 का भारत सरकार अधिनियम
(d) 1947 का स्वतंत्रता अधिनियम
उत्तर: (c)
Q12. वायसराय की कार्यपालिका परिषद में सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा को किस रूप में नियुक्त किया गया था?
(a) गृह सदस्य
(b) वित्त सदस्य
(c) विधि सदस्य
(d) विदेश मंत्री
उत्तर: (c)
Q13. 1935 के अधिनियम के तहत स्थापित 'संघीय न्यायालय' (Federal Court) की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
(a) 1935
(b) 1936
(c) 1937
(d) 1950
उत्तर: (c)
Q14. 1919 के अधिनियम के तहत केंद्रीय लोक सेवा आयोग का गठन किस आयोग की सिफारिश पर 1926 में हुआ था?
(a) मैकाले आयोग
(b) साइमन कमीशन
(c) ली आयोग (Lee Commission)
(d) हंटर आयोग
उत्तर: (c)
Q15. किस अधिनियम द्वारा पहली बार भारत में विधान परिषदों को बजट पर बहस करने का अधिकार दिया गया?
(a) 1861 का अधिनियम
(b) 1892 का अधिनियम
(c) 1909 का अधिनियम
(d) 1919 का अधिनियम
उत्तर: (b)
Q16. वायसराय को आपातकाल में 'अध्यादेश' (Ordinance) जारी करने की शक्ति किस अधिनियम द्वारा मिली?
(a) 1858 का अधिनियम
(b) 1861 का भारत परिषद अधिनियम
(c) 1892 का अधिनियम
(d) 1909 का सुधार
उत्तर: (b)
Q17. भारतीय संविधान का सबसे बड़ा भाग या स्रोत निम्नलिखित में से कौन सा माना जाता है?
(a) नेहरू रिपोर्ट (1928)
(b) 1919 का अधिनियम
(c) 1935 का भारत सरकार अधिनियम
(d) 1947 का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम
उत्तर: (c)
Q18. बोर्ड ऑफ कंट्रोल और कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स को समाप्त कर 'द्वैध शासन' का अंत किस अधिनियम द्वारा किया गया?
(a) 1858 का भारत सरकार अधिनियम
(b) 1833 का चार्टर एक्ट
(c) 1853 का चार्टर एक्ट
(d) 1861 का अधिनियम
उत्तर: (a)
Q19. 1935 के अधिनियम में अवशिष्ट शक्तियां (Residuary Powers) किसे सौंपी गई थीं?
(a) संघीय विधायिका
(b) प्रांतीय विधायिका
(c) वायसराय/गवर्नर-जनरल
(d) प्रांतीय गवर्नर
उत्तर: (c)
Q20. '3 जून 1947 की योजना' को किस अन्य नाम से भी जाना जाता है?
(a) वेवेल योजना
(b) कैबिनेट मिशन योजना
(c) माउंटबेटन योजना
(d) डिकी बर्ड प्लान
उत्तर: (c)
Q21. भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन किस वर्ष समाप्त हुआ?
(a) 1857
(b) 1858
(c) 1947
(d) 1833
उत्तर: (b)
7. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions - FAQs)
Q1. 1813 और 1833 के चार्टर एक्ट में कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को लेकर क्या मुख्य अंतर था?
उत्तर: 1813 के चार्टर एक्ट द्वारा कंपनी के भारत में व्यापारिक एकाधिकार को समाप्त कर दिया गया था, लेकिन चाय के व्यापार और चीन के साथ व्यापार पर एकाधिकार बना रहा। वहीं 1833 के चार्टर एक्ट द्वारा चाय और चीन के साथ व्यापारिक एकाधिकार को भी समाप्त कर दिया गया और कंपनी पूरी तरह से एक प्रशासनिक संस्था बन गई।
Q2. प्रांतीय स्वायत्तता (Provincial Autonomy) से क्या तात्पर्य है और यह किस एक्ट से मिली?
उत्तर: प्रांतीय स्वायत्तता का अर्थ है प्रांतों को अपने क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से शासन चलाने और कानून बनाने का अधिकार मिलना, जिस पर केंद्र का अनुचित हस्तक्षेप न हो। यह अधिकार 1935 के भारत सरकार अधिनियम द्वारा दिया गया, जिसके तहत प्रांतों से द्वैध शासन हटाकर उन्हें स्वायत्त दर्जा दिया गया।
Q3. 'सांप्रदायिक निर्वाचन' (Communal Electorate) क्या था और इसकी शुरुआत कब हुई?
उत्तर: सांप्रदायिक निर्वाचन व्यवस्था का अर्थ था धर्म के आधार पर चुनाव क्षेत्रों का बंटवारा करना, जहां किसी विशेष धर्म के उम्मीदवार का चुनाव केवल उसी धर्म के मतदाता कर सकते थे। इसकी शुरुआत 1909 के मार्ले-मिंटो सुधार में मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल बनाकर की गई थी।
Q4. भारतीय संविधान के निर्माण में 1935 के भारत सरकार अधिनियम का क्या योगदान है?
उत्तर: 1935 का अधिनियम वर्तमान भारतीय संविधान का सबसे बड़ा संरचनात्मक स्रोत है। संघात्मक ढांचा, न्यायपालिका की व्यवस्था, लोक सेवा आयोग, आपातकालीन प्रावधान, और शक्तियों का त्रि-स्तरीय विभाजन (संघ, राज्य व समवर्ती सूची) जैसे लगभग 200 से अधिक अनुच्छेद सीधे या आंशिक परिवर्तनों के साथ 1935 के एक्ट से ही लिए गए हैं।
8. निष्कर्ष (Conclusion)
भारतीय संवैधानिक विकास का इतिहास (Constitutional History of India) 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट से लेकर 1947 के भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम तक निरंतर सुधारों, प्रशासनिक प्रयोगों और जन-आकांक्षाओं की क्रमिक यात्रा है।
ब्रिटिश शासकों ने यद्यपि ये कानून अपने औपनिवेशिक हितों और प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत करने के लिए बनाए थे, किंतु इन्हीं अधिनियमों ने भारत में आधुनिक संसदीय प्रणाली, स्वतंत्र न्यायपालिका, सिविल सेवाओं, कानून के शासन (Rule of Law) और संघात्मक व्यवस्था का आधार तैयार किया।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए इन सभी अधिनियमों की तिथियों, प्रमुख प्रावधानों, प्रमुख व्यक्तित्वों और क्रमिक सुधारों की स्पष्ट समझ होना अति-आवश्यक है। यह लेख आपको त्वरित पुनरीक्षण (Quick Revision) करने, जटिल अवधारणाओं को आसानी से समझने और परीक्षा में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने में पूर्णतः मदद करेगा।
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