भक्ति आंदोलन का इतिहास: आलवार, नयनार, निर्गुण एवं सगुण संत, दर्शन व PYQs MCQs (UPSC, PCS Notes)
भक्ति आंदोलन (Bhakti Movement): इतिहास, प्रमुख संत, धार्मिक दर्शन एवं Previous Year MCQs Notes
भारतीय मध्यकालीन इतिहास और कला एवं संस्कृति (Art & Culture) में भक्ति आंदोलन सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पुनर्जागरण का एक ऐसा महासमुद्र था, जिसने समाज में व्याप्त रूढ़िवादिता और जातिगत असमानता पर करारा प्रहार किया। UPSC, State PCS (UPPSC, BPSC, MPPSC, RAS), SSC CGL, UGC-NET और अन्य भर्ती परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह टॉपिक अत्यंत महत्वपूर्ण है।
1. भक्ति आंदोलन का उद्भव एवं विकास
प्रारंभिक उत्पत्ति: भक्ति आंदोलन का जन्म 6वीं-7वीं शताब्दी में दक्षिण भारत (तमिलनाडु) में हुआ।
प्रसिद्ध उक्ति: "भक्ति द्राविड़ ऊजी, लाये रामानंद" (अर्थात भक्ति आंदोलन द्राविड़ देश में जन्मा और रामानंद इसे उत्तर भारत लाये)।
मुख्य उद्देश्य: ईश्वर की व्यक्तिगत भक्ति पर बल देना, जाति-पांत का खंडन करना और क्षेत्रीय लोकभाषाओं (Vernacular Languages) का विकास करना।
दक्षिण भारत में आंदोलन के दो प्रमुख स्तंभ:
आलवार (Alvars): ये विष्णु (वैष्णव) के उपासक थे। इनकी कुल संख्या 12 थी (केवल 1 महिला संत थीं—आंडाल, जिन्हें 'दक्षिण की मीरा' कहा जाता है)।
नयनार (Nayanars): ये शिव (शैव) के उपासक थे। इनकी कुल संख्या 63 थी (प्रसिद्ध संत: अप्पार, संबंदर, सुंदरर और माणिकवाचगर)।
2. भक्ति आंदोलन के प्रमुख दर्शन एवं संप्रदाय (UPSC / State PCS स्पेशल)
मध्यकालीन संतों ने ईश्वर और जीव के संबंध की व्याख्या करने के लिए अलग-अलग दार्शनिक सिद्धांत दिए, जो परीक्षा में बार-बार मिलान करने हेतु पूछे जाते हैं:
| दर्शन / सिद्धांत (Philosophy) | प्रवर्तक (Founder) | संप्रदाय (Sect) |
| अद्वैतवाद (Advaita Vedanta) | शंकराचार्य (788–820 ई.) | स्मृति संप्रदाय |
| विशिष्टिकाद्वैतवाद (Vishishtadvaita) | रामानुजाचार्य | श्री संप्रदाय |
| द्वैतवाद (Dvaitavada) | मध्वाचार्य | ब्रह्म संप्रदाय |
| शुद्धाद्वैतवाद (Shuddhadvaita) | वल्लभाचार्य | रुद्र संप्रदाय |
| द्वैताद्वैतवाद (Dvaitadvaita) | निम्बार्काचार्य | सनक संप्रदाय |
3. सगुण और निर्गुण भक्ति धारा में अंतर
14वीं-15वीं शताब्दी में उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन दो प्रमुख धाराओं में विभाजित हो गया:
(i) निर्गुण भक्ति धारा (Formless God)
ईश्वर को निराकार, सर्वव्यापी और गुणरहित माना गया। मूर्तिपूजा और बाह्य आडंबरों का कड़ा विरोध।
ज्ञानमार्गी शाखा: संत कबीर दास, गुरु नानक देव, दादू दयाल, रैदास (रविदास)।
प्रेममार्गी (सूफी) शाखा: मलिक मोहम्मद जायसी, मुल्ला दाऊद।
(ii) सगुण भक्ति धारा (God with Form)
ईश्वर को मानव रूप (साकार) में अवतार मानकर उनकी पूजा की गई।
रामाश्रयी शाखा: गोस्वामी तुलसीदास, स्वामी रामानंद।
कृष्णाश्रयी शाखा: सूरदास, मीराबाई, चैतन्य महाप्रभु, रसखान, वल्लभाचार्य।
4. प्रमुख भक्ति संतों का संक्षिप्त योगदान
1. स्वामी रामानंद (14वीं शताब्दी)
उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने वाले प्रथम संत।
इन्होंने अपने उपदेश संस्कृत के स्थान पर हिंदी भाषा में देना प्रारंभ किया।
इनके 12 प्रमुख शिष्य थे, जिनमें सभी जातियों के लोग शामिल थे (जैसे कबीर-जुलाहा, रैदास-चर्मकार, सेना-नाई, पीपा-राजपूत)।
2. संत कबीर दास (1398–1518 ई.)
सिकंदर लोदी के समकालीन।
हिंदू-मुस्लिम एकता के समर्थक और मूर्तिपूजा, कर्मकांडों के कट्टर विरोधी।
इनकी रचनाओं का संग्रह 'बीजक' (साखी, सबद, रमैनी) कहलाता है।
3. गुरु नानक देव (1469–1539 ई.)
सिख धर्म के संस्थापक। जन्म: तलवंडी (अब ननकाना साहिब, पाकिस्तान)।
'लंगर' (निःशुल्क सामुदायिक रसोई) की शुरुआत की और ऊंच-नीच के भेद को समाप्त किया।
4. चैतन्य महाप्रभु (1486–1533 ई.)
बंगाल में वैष्णव भक्ति का प्रसार किया और 'संकीर्तन प्रथा' (कीर्तन) की शुरुआत की।
इनका दार्शनिक सिद्धांत 'अचिंत्य भेदाभेदवाद' कहलाता है।
5. महाराष्ट्र धर्म के संत (वारकरी एवं धारकरी)
ज्ञानदेव (ज्ञानेश्वर): महाराष्ट्र में भक्ति आंदोलन के जनक; 'भावार्थ दीपिका' (ज्ञानेश्वरी) लिखी।
संत नामदेव: निर्गुण एवं सगुण दोनों के समर्थक; इनके कई पद सिख ग्रंथ 'गुरु ग्रंथ साहिब' में शामिल हैं।
संत तुकाराम: छत्रपति शिवाजी महाराज के समकालीन; 'अभंग' पदों की रचना की।
सामर्थ रामदास: शिवाजी महाराज के आध्यात्मिक गुरु; 'दासग्रंथ' की रचना की।
5. पिछली परीक्षाओं में पूछे गए MCQ प्रश्न (Previous Years MCQs)
Q1. भक्ति आंदोलन का प्रारंभ निम्नलिखित में से किसके द्वारा किया गया था? [UPSC CSE / UPPSC]
(A) आलवार संतों द्वारा
(B) सूफी संतों द्वारा
(C) सूरदास द्वारा
(D) तुलसीदास द्वारा
उत्तर: (A) आलवार संतों द्वारा
Q2. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सही उत्तर चुनिए: [UPPSC / MPPSC]
(a) अद्वैतवाद — 1. रामानुजाचार्य
(b) विशिष्टाद्वैतवाद — 2. शंकराचार्य
(c) द्वैतवाद — 3. वल्लभाचार्य
(d) शुद्धाद्वैतवाद — 4. मध्वाचार्य
कूट:
(A) a-2, b-1, c-4, d-3
(B) a-1, b-2, c-3, d-4
(C) a-2, b-4, c-1, d-3
(D) a-4, b-3, c-2, d-1
उत्तर: (A) a-2, b-1, c-4, d-3
Q3. निम्नलिखित में से कौन-सी महिला आलवार संत थीं? [BPSC / UGC-NET]
(A) आंडाल
(B) अक्का महादेवी
(C) मीराबाई
(D) गार्गी
उत्तर: (A) आंडाल ('दक्षिण की मीरा')
Q4. प्रसिद्ध भक्ति संत कबीर दास किस दिल्ली सुल्तान के समकालीन थे? [SSC CGL / Railway]
(A) अलाउद्दीन खिलजी
(B) मुहम्मद बिन तुगलक
(C) सिकंदर लोदी
(D) इब्राहिम लोदी
उत्तर: (C) सिकंदर लोदी
Q5. अपने उपदेशों के प्रचार के लिए हिंदी का प्रयोग करने वाले प्रथम भक्ति संत कौन थे? [UPPCS / RAS]
(A) कबीर दास
(B) रामानंद
(C) दादू दयाल
(D) तुलसीदास
उत्तर: (B) रामानंद
Q6. छत्रपति शिवाजी महाराज के समकालीन मराठा संत कौन थे? [UPSC CAPF / SSC]
(A) संत ज्ञानेश्वर
(B) संत नामदेव
(C) संत तुकाराम
(D) संत चोखामेला
उत्तर: (C) संत तुकाराम
6. निष्कर्ष (Conclusion)
मध्यकालीन भारत में भक्ति आंदोलन केवल एक धार्मिक सुधार आंदोलन नहीं था, बल्कि इसने एक सामाजिक क्रांति का रूप ले लिया। इसने समाज के शोषित और वंचित वर्गों को ईश्वर की भक्ति का समान अधिकार दिया और भाषा के स्तर पर क्षेत्रीय भाषाओं (हिंदी, मराठी, बांग्ला, उड़िया, तमिल) का अत्यधिक विकास किया।
प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, State PCS, SSC) के लिहाज से विभिन्न संप्रदायों के दार्शनिक सिद्धांत (जैसे अद्वैतवाद, विशिष्टाद्वैतवाद), संतों के कालक्रम (Chronology), सगुण-निर्गुण शाखाएं और महाराष्ट्र के संत सबसे महत्वपूर्ण विषय हैं।
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