बुधवार, 23 सितंबर 2026

बेरोजगारी (Unemployment) in Hindi: अर्थ, प्रकार, कारण, मापन (PLFS), सरकारी योजनाएं एवं 20+ MCQs


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बेरोजगारी (Unemployment): अवधारणा, प्रकार, मापन (PLFS/NSSO), कारण, निवारण हेतु सरकारी योजनाएं एवं संपूर्ण परीक्षा उपयोगी नोट्स

भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) और सामाजिक-आर्थिक मुद्दों (Socio-Economic Issues) में "बेरोजगारी" (Unemployment) एक अत्यंत महत्वपूर्ण, संवेदनशील और निरंतर प्रासंगिक विषय है। किसी भी देश के मानव संसाधन (Human Resource) के अनुकूलतम उपयोग, समावेशी विकास और गरीबी उन्मूलन के लिए बेरोजगारी की गतिशीलता को समझना अनिवार्य है।

UPSC, State PSCs (BPSC, UPPCS, MPPSC, RAS), SSC CGL, Banking (RBI Grade B, NABARD, IBPS PO/Clerk), Railways, UGC NET, Teaching (CTET/STET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में बेरोजगारी के प्रकार (Disguised, Structural, Seasonal, Frictional), श्रम बल भागीदारी दर (LFPR), आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS), बेरोजगारी के कारण, परिणाम और मनरेगा (MGNREGA), दीनदयाल अंत्योदय योजना जैसी प्रमुख सरकारी योजनाओं पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं।

इस विस्तृत लेख में हम बेरोजगारी का अर्थ, मापन की विधियां, इसके विभिन्न रूप, कारण, भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदम, प्रमुख तथ्य तालिका, Quick Revision नोट्स, 20+ बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) तथा FAQ का गहन अध्ययन करेंगे।

1. बेरोजगारी क्या है? (What is Unemployment?)

(i) परिभाषा एवं अवधारणा (Definition & Concept):

सामान्य शब्दों में, बेरोजगारी वह स्थिति है जिसमें एक व्यक्ति जो कार्य करने में सक्षम है, कार्य करने की इच्छा रखता है और प्रचलित मजदूरी दर पर काम करने को तैयार है, फिर भी उसे कोई उत्पादक कार्य/रोजगार प्राप्त नहीं होता।

अर्थशास्त्र में बेरोजगारी की गणना करते समय दो प्रमुख बातों का ध्यान रखा जाता है:

  1. कार्य करने की अनिच्छा: यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से काम नहीं करना चाहता (जैसे- विद्यार्थी, स्वेच्छा से घर पर रहने वाले लोग), तो उसे बेरोजगार नहीं माना जाता। इसे स्वैच्छिक बेरोजगारी (Voluntary Unemployment) कहते हैं, जो अर्थशास्त्र में बेरोजगारी की श्रेणी में नहीं आती।

  2. श्रम बल (Labor Force): बेरोजगारी की गणना केवल उसी जनसंख्या वर्ग में की जाती है जो कार्य करने की आयु (सामान्यतः 15 से 59 वर्ष) में आते हैं और काम की तलाश में हैं।

2. प्रमुख तथ्य तालिका (Key Facts Table: Unemployment at a Glance)

पहलू / बिंदुविवरण / मुख्य तथ्य
मूल परिभाषाकाम करने में सक्षम व इच्छुक व्यक्ति को प्रचलित दरों पर रोजगार न मिलना।
कार्यशील आयु वर्ग (Working Age Group)15 से 59 वर्ष (अंतर्राष्ट्रीय मानक के अनुसार 15 से 64 वर्ष)
श्रम बल (Labor Force)रोजगार प्राप्त व्यक्ति + कार्य की तलाश में लगे बेरोजगार व्यक्ति
कार्य बल (Work Force)वास्तव में रोजगार में लगे हुए व्यक्तियों की संख्या
बेरोजगारी दर सूत्र (Unemployment Rate Formula)$\text{Unemployment Rate} = \left(\frac{\text{बेरोजगारों की संख्या}}{\text{कुल श्रम बल}}\right) \times 100$
भारत में मापन संस्थाराष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI)
मापन का प्रमुख सर्वेक्षणआवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (Periodic Labour Force Survey - PLFS)
कृषि क्षेत्र की मुख्य बेरोजगारीप्रच्छन्न/अदृश्य बेरोजगारी (Disguised Unemployment) एवं मौसमी बेरोजगारी
औद्योगिक/शहरी क्षेत्र की मुख्य बेरोजगारीसंरचनात्मक (Structural) एवं घर्षणात्मक (Frictional) बेरोजगारी
प्रमुख ऐतिहासिक समितिभगवती समिति (1973) - बेरोजगारी मापन की अवधारणाएं दीं

3. बेरोजगारी के प्रमुख प्रकार (Types of Unemployment)

भारत जैसे विकासशील देश में बेरोजगारी विभिन्न स्वरूपों में देखने को मिलती है। इसे दो मुख्य श्रेणियों (ग्रामीण और शहरी) तथा अन्य तकनीकी प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:

                                  ┌─────────────────────────────────────────┐
                                  │         बेरोजगारी के मुख्य प्रकार        │
                                  └────────────────────┬────────────────────┘
                                                       │
         ┌──────────────────────────────┬──────────────┴──────────────┬──────────────────────────────┐
         ▼                              ▼                             ▼                              ▼
┌──────────────────┐           ┌──────────────────┐          ┌──────────────────┐           ┌──────────────────┐
│ ग्रामीण बेरोजगारी │           │  शहरी बेरोजगारी  │          │  तकनीकी/आर्थिक   │           │   अन्य रूप       │
│  (Rural Types)   │           │  (Urban Types)   │          │  (Economic)      │           │  (Other Forms)   │
└────────┬─────────┘           └────────┬─────────┘          └────────┬─────────┘           └────────┬─────────┘
         │                              │                             │                              │
 ┌───────┴───────┐              ┌───────┴───────┐             ┌───────┴───────┐              ┌───────┴───────┐
 ▼               ▼              ▼               ▼             ▼               ▼              ▼               ▼
प्रच्छन्न        मौसमी          संरचनात्मक        शिक्षित        घर्षणात्मक       चक्रिय         अदृश्य/अल्प      ऐच्छिक व
(Disguised)   (Seasonal)     (Structural)     (Educated)    (Frictional)    (Cyclical)     (Underemp.)     अनैच्छिक

1. ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी (Rural Unemployment):

  1. प्रच्छन्न या अदृश्य बेरोजगारी (Disguised Unemployment):

    • अवधारणा: जब किसी कार्य में आवश्यकता से अधिक लोग लगे होते हैं, और यदि उनमें से कुछ लोगों को हटा भी दिया जाए, तो कुल उत्पादन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।

    • सीमांत उत्पादकता (Marginal Productivity): इस स्थिति में श्रमिक की सीमांत उत्पादकता शून्य ($0$) या ऋणात्मक होती है।

    • उदाहरण: कृषि क्षेत्र में एक छोटे खेत पर 5 सदस्यों का काम करना, जबकि काम केवल 2 सदस्यों का हो।

  2. मौसमी बेरोजगारी (Seasonal Unemployment):

    • जब व्यक्तियों को वर्ष के केवल कुछ ही महीनों (जैसे- बुआई, कटाई या फसल चक्र के समय) में काम मिलता है और शेष समय वे बेकार रहते हैं।

2. शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी (Urban Unemployment):

  1. संरचनात्मक बेरोजगारी (Structural Unemployment):

    • यह अर्थव्यवस्था के ढांचे/संरचना में परिवर्तन के कारण उत्पन्न होती है। जब उपलब्ध नौकरियों के लिए आवश्यक कौशल (Skills) और श्रम बल के पास मौजूद कौशल में बेमेल (Mismatch) स्थिति हो।

    • यह विकासशील देशों में सबसे अधिक पाई जाने वाली दीर्घकालिक बेरोजगारी है।

  2. शिक्षित बेरोजगारी (Educated Unemployment):

    • जब डिग्री और योग्यता प्राप्त युवा उनकी योग्यता के अनुसार उपयुक्त रोजगार प्राप्त करने में असमर्थ होते हैं।

3. आर्थिक एवं तकनीकी आधार पर बेरोजगारी:

  1. घर्षणात्मक बेरोजगारी (Frictional Unemployment):

    • एक नौकरी छोड़कर दूसरी नई नौकरी में जाने के बीच की अवधि में जो अस्थायी बेरोजगारी उत्पन्न होती है। यह विकसित देशों में अधिक देखी जाती है।

  2. चक्रीय बेरोजगारी (Cyclical Unemployment):

    • यह व्यापार चक्र (Business Cycle) के उतार-चढ़ाव, मंदी (Recession) और अवसाद से उत्पन्न होती है। मांग घटने से कंपनियां छंटनी करने लगती हैं।

  3. अल्प-रोजगार (Underemployment):

    • जब किसी व्यक्ति को उसकी क्षमता, शैक्षणिक योग्यता या समय से कम स्तर का काम मिलता है (उदा. पीएच.डी. धारक का चतुर्थ श्रेणी पद हेतु आवेदन करना)।

  4. ऐच्छिक बनाम अनैच्छिक बेरोजगारी (Voluntary vs Involuntary Unemployment):

    • ऐच्छिक: स्वेच्छा से काम न करना।

    • अनैच्छिक: काम करने की पूर्ण इच्छा होने पर भी काम न मिलना (यही वास्तविक अर्थशास्त्र में बेरोजगारी है)।

4. भारत में बेरोजगारी का मापन (Measurement of Unemployment in India)

भारत में बेरोजगारी के आंकड़े एकत्रित और प्रकाशित करने का कार्य मुख्य रूप से राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO - National Statistical Office) द्वारा किया जाता है।

(i) आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (Periodic Labour Force Survey - PLFS):

  • MoSPI ने 2017 में NSSO के पुराने पंचवार्षिक सर्वेक्षणों के स्थान पर PLFS की शुरुआत की।

  • यह दो समय-मापदंडों पर आधारित है:

    1. शहरी क्षेत्रों में: 3 महीने (तिमाही) के आधार पर केवल वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (CWS) का मापन।

    2. ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में: वार्षिक आधार पर सामान्य स्थिति (Principal & Subsidiary Status) और CWS दोनों का मापन।

(ii) भगवती समिति (1973) द्वारा दी गई 3 अवधारणाएं:

मापन की स्थितिमापदंड / अवधिउपयोग
1. सामान्य स्थिति (Usual Principal Status - UPS)पिछले 365 दिनों (1 वर्ष) में व्यक्ति लंबे समय तक बेरोजगार रहा हो।दीर्घकालिक बेरोजगारी मापने हेतु
2. वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (Current Weekly Status - CWS)सर्वेक्षण वाले सप्ताह के दौरान यदि व्यक्ति को 1 घंटे का भी काम न मिला हो।अल्पकालिक मौसमी/साप्ताहिक रुझान
3. वर्तमान दैनिक स्थिति (Current Daily Status - CDS)प्रत्येक दिन के आधार पर मापन (यदि 1 दिन में 4 घंटे काम मिला तो आधा दिन, 4+ घंटे तो पूरा दिन)।बेरोजगारी का सबसे सटीक/व्यापक मापदंड

5. भारत में बेरोजगारी के मुख्य कारण (Causes of Unemployment in India)

भारत में बेरोजगारी किसी एक कारण से नहीं, बल्कि बहुआयामी संरचनात्मक समस्याओं का परिणाम है:

  1. तीव्र जनसंख्या वृद्धि: श्रम बल में प्रतिवर्ष शामिल होने वाले युवाओं की तुलना में रोजगार के अवसरों का सृजन अत्यंत धीमा है।

  2. कृषि पर अत्यधिक निर्भरता: भारत की लगभग 45% से अधिक कार्यशील आबादी कृषि पर निर्भर है, जहां प्रच्छन्न और मौसमी बेरोजगारी व्याप्त है।

  3. कौशल विकास (Skill Gap) की कमी: हमारी शिक्षा प्रणाली व्यावहारिक और व्यावसायिक कौशल (Vocational Skills) के स्थान पर सैद्धांतिक ज्ञान पर अधिक केंद्रित है।

  4. धीमा औद्योगिक विकास: विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) का जीडीपी में योगदान उस गति से नहीं बढ़ा है जो अतिरिक्त कृषि श्रम को खपा सके।

  5. कुटीर एवं लघु उद्योगों का पतन: मशीनीकरण और भूमंडलीकरण के कारण पारंपरिक हस्तशिल्प और एमएसएमई (MSME) क्षेत्र प्रभावित हुआ है।

  6. पूंजी-गहन प्रौद्योगिकियों का बढ़ता उपयोग: उद्योगों में श्रम-गहन (Labor-Intensive) तकनीकों के स्थान पर ऑटोमेशन और एआई का प्रयोग।

6. बेरोजगारी निवारण हेतु प्रमुख सरकारी योजनाएं (Government Schemes)

भारत सरकार ने बेरोजगारी कम करने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की हैं:

1. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA):

  • शुरुआत: 2006 (अधिनियम 2005)।

  • विशेषता: ग्रामीण परिवारों के अकुशल वयस्क सदस्यों को प्रति वित्तीय वर्ष कम से कम 100 दिनों के सवेतन रोजगार की कानूनी गारंटी।

2. दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM):

  • उद्देश्य: ग्रामीण गरीबों को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) में संगठित करके स्थायी आजीविका और स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना।

3. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY):

  • शुरुआत: 2015 (कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा)।

  • उद्देश्य: भारतीय युवाओं को उद्योग-संबंधित कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना ताकि वे बेहतर रोजगार प्राप्त कर सकें।

4. प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना (PM SVANidhi):

  • उद्देश्य: रेहड़ी-पटरी (Street Vendors) वालों को अपना व्यवसाय पुनः शुरू करने के लिए रियायती दर पर सूक्ष्म ऋण (Micro-credit) उपलब्ध कराना।

5. मेक इन इंडिया एवं पीएलआई (PLI) योजना:

  • उद्देश्य: भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाना और विनिर्माण क्षेत्र में करोड़ों नए रोजगार सृजित करना।

योजना का नामप्रारंभ वर्षमुख्य क्षेत्रमुख्य उद्देश्य
मनरेगा (MGNREGA)2006ग्रामीण100 दिन की सवेतन रोजगार गारंटी
PMKVY2015कौशल विकासयुवाओं का मुफ्त कौशल प्रशिक्षण
पीएम मुद्रा योजना (PMMY)2015स्वरोजगारसूक्ष्म/लघु उद्यमों हेतु ₹10 लाख तक ऋण
दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना2014ग्रामीण युवाग्रामीण निर्धन युवाओं का कौशल प्रशिक्षण व प्लेसमेंट
PM-EGP2008सूक्ष्म उद्यमगैर-कृषि क्षेत्र में नए सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना

7. Quick Revision Notes (प्रतियोगी परीक्षा हेतु त्वरित पुनरीक्षण)

  • बेरोजगारी की परिभाषा: प्रचलित मजदूरी दर पर काम करने में सक्षम व इच्छुक व्यक्ति को काम न मिलना।

  • प्रच्छन्न बेरोजगारी (Disguised Unemployment): इसमें श्रमिकों की सीमांत उत्पादकता शून्य ($0$) होती है। मुख्यतः कृषि क्षेत्र में पाई जाती है।

  • संरचनात्मक बेरोजगारी: नौकरियों के लिए आवश्यक कौशल और उपलब्ध श्रम बल के कौशल में बेमेल होना। भारत की सबसे प्रमुख दीर्घकालिक समस्या।

  • घर्षणात्मक बेरोजगारी: एक नौकरी छोड़ कर दूसरी नौकरी में जाने के बीच का समय।

  • श्रम बल (Labor Force): $\text{श्रम बल} = \text{रोजगार प्राप्त व्यक्ति} + \text{बेरोजगार व्यक्ति}$

  • मापन संस्था: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा PLFS सर्वेक्षण के माध्यम से।

  • भगवती समिति (1973): भारत में बेरोजगारी मापन की 3 अवधारणाएं (UPS, CWS, CDS) दीं।

  • मनरेगा: 100 दिनों के अकुशल शारीरिक श्रम रोजगार की कानूनी गारंटी देता है।

8. विगत वर्षों के 20+ महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (Previous Years MCQs)

Q1. भारत में कृषि क्षेत्र में मुख्यतः किस प्रकार की बेरोजगारी पाई जाती है?

(a) चक्रीय बेरोजगारी

(b) घर्षणात्मक बेरोजगारी

(c) प्रच्छन्न/अदृश्य बेरोजगारी

(d) केवल संरचनात्मक बेरोजगारी

उत्तर: (c)

Q2. प्रच्छन्न बेरोजगारी (Disguised Unemployment) का क्या अर्थ है?

(a) लोग पूरी तरह से बेकार बैठे हैं

(b) श्रमिकों की सीमांत उत्पादकता शून्य होती है

(c) केवल मौसमी रूप से काम मिलना

(d) उच्च डिग्री धारकों का कम वेतन पर काम करना

उत्तर: (b)

Q3. 'संरचनात्मक बेरोजगारी' (Structural Unemployment) का मुख्य कारण क्या है?

(a) कच्चे माल की कमी

(b) भारी उद्योग की अवनति

(c) बाजार में मंदी की स्थिति

(d) नौकरियों के लिए आवश्यक कौशल और उपलब्ध कौशल में असंतुलन

उत्तर: (d)

Q4. एक व्यक्ति जो अपनी नौकरी छोड़कर दूसरी नौकरी की तलाश कर रहा है, इस बीच की बेरोजगारी को क्या कहते हैं?

(a) चक्रीय बेरोजगारी

(b) घर्षणात्मक बेरोजगारी (Frictional Unemployment)

(c) मौसमी बेरोजगारी

(d) ऐच्छिक बेरोजगारी

उत्तर: (b)

Q5. भारत में बेरोजगारी और गरीबी के आंकड़े एकत्रित व प्रकाशित करने के लिए कौन सी संस्था उत्तरदायी है?

(a) नीति आयोग

(b) राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO)

(c) भारतीय रिजर्व बैंक

(d) श्रम मंत्रालय

उत्तर: (b)

Q6. बेरोजगारी की गणना के लिए श्रम बल (Labor Force) में किस आयु वर्ग के लोगों को शामिल किया जाता है?

(a) 0 से 14 वर्ष

(b) 15 से 59 वर्ष

(c) 18 से 65 वर्ष

(d) 60 वर्ष से अधिक

उत्तर: (b)

Q7. भारत में बेरोजगारी दर की गणना के लिए 'PLFS' का पूर्ण रूप क्या है?

(a) Public Labour Force Survey

(b) Periodic Labour Force Survey

(c) Permanent Labour Force System

(d) Primary Labour Force Scheme

उत्तर: (b)

Q8. 'भगवती समिति' (1973) का संबंध निम्नलिखित में से किस विषय से है?

(a) कर सुधार

(b) बेरोजगारी के मापन और आंकलन से

(c) बैंकिंग सुधार

(d) गरीबी रेखा का निर्धारण

उत्तर: (b)

Q9. व्यापार चक्र में मंदी और अवसाद के समय उत्पन्न होने वाली बेरोजगारी को क्या कहा जाता है?

(a) संरचनात्मक बेरोजगारी

(b) चक्रीय बेरोजगारी (Cyclical Unemployment)

(c) प्रच्छन्न बेरोजगारी

(d) घर्षणात्मक बेरोजगारी

उत्तर: (b)

Q10. जब कोई व्यक्ति अपनी शैक्षणिक योग्यता से बहुत नीचे के स्तर का काम करता है, तो उसे क्या कहते हैं?

(a) पूर्ण रोजगार

(b) अल्प-रोजगार (Underemployment)

(c) स्वैच्छिक बेरोजगारी

(d) खुली बेरोजगारी

उत्तर: (b)

Q11. मनरेगा (MGNREGA) के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम कितने दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाती है?

(a) 50 दिन

(b) 100 दिन

(c) 150 दिन

(d) 200 दिन

उत्तर: (b)

Q12. कार्य बल (Work Force) और श्रम बल (Labor Force) के बीच क्या अंतर है?

(a) कार्य बल = श्रम बल + बेरोजगार

(b) श्रम बल = कार्य बल + बेरोजगार

(c) दोनों समान हैं

(d) कार्य बल में केवल कृषि क्षेत्र शामिल है

उत्तर: (b)

Q13. निम्नलिखित में से कौन सी स्थिति स्वैच्छिक बेरोजगारी (Voluntary Unemployment) को दर्शाती है?

(a) काम की तलाश करने पर भी काम न मिलना

(b) अपनी इच्छा से प्रचलित दरों पर काम न करना

(c) केवल कृषि क्षेत्र में काम न मिलना

(d) बीमारी के कारण काम छोड़ना

उत्तर: (b)

Q14. 'श्रम बल भागीदारी दर' (LFPR) का क्या अर्थ है?

(a) कुल जनसंख्या में केवल कार्यरत लोगों का प्रतिशत

(b) कुल जनसंख्या में श्रम बल (कार्यरत + बेरोजगार) का प्रतिशत

(c) केवल शिक्षित बेरोजगारों का प्रतिशत

(d) केवल कृषि क्षेत्र के श्रमिकों का प्रतिशत

उत्तर: (b)

Q15. भारत में किस प्रकार की बेरोजगारी सर्वाधिक पाई जाती है?

(a) चक्रीय बेरोजगारी

(b) घर्षणात्मक बेरोजगारी

(c) संरचनात्मक बेरोजगारी

(d) अति-रोजगार

उत्तर: (c)

Q16. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) किस मंत्रालय की प्रमुख पहल है?

(a) गृह मंत्रालय

(b) श्रम एवं रोजगार मंत्रालय

(c) कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE)

(d) शिक्षा मंत्रालय

उत्तर: (c)

Q17. अर्थशास्त्र में 'पूर्ण रोजगार' (Full Employment) का क्या अर्थ है?

(a) देश में शून्य बेरोजगारी होना

(b) अनैच्छिक बेरोजगारी का न होना (केवल प्राकृतिक/घर्षणात्मक बेरोजगारी होना)

(c) सभी बच्चों को काम मिलना

(d) कृषि क्षेत्र में सभी को काम मिलना

उत्तर: (b)

Q18. बेरोजगारी मापन की 'वर्तमान दैनिक स्थिति' (Current Daily Status - CDS) की अवधारणा में न्यूनतम कितने घंटे कार्य करने पर व्यक्ति को आधे दिन के लिए कार्यरत माना जाता है?

(a) 1 घंटा

(b) 2 घंटे

(c) 4 घंटे

(d) 8 घंटे

उत्तर: (a) (नोट: 1 से 4 घंटे तक काम मिलने पर आधा दिन और 4 घंटे से अधिक मिलने पर पूरा दिन माना जाता है)

Q19. विकसित देशों में सामान्यतः किस प्रकार की बेरोजगारी अधिक देखने को मिलती है?

(a) प्रच्छन्न और मौसमी बेरोजगारी

(b) घर्षणात्मक और चक्रीय बेरोजगारी

(c) केवल प्रच्छन्न बेरोजगारी

(d) केवल तकनीकी बेरोजगारी

उत्तर: (b)

Q20. रेहड़ी-पटरी वालों (Street Vendors) को आर्थिक सहायता देने के लिए शुरू की गई 'PM SVANidhi' योजना का संबंध किस प्रकार के रोजगार संवर्धन से है?

(a) केवल कृषि रोजगार

(b) असंगठित क्षेत्र हेतु स्वरोजगार व सूक्ष्म ऋण

(c) भारी उद्योगों में रोजगार

(d) आईटी क्षेत्र में रोजगार

उत्तर: (b)

Q21. 'ओकुन का नियम' (Okun's Law) किन दो आर्थिक चरों के बीच संबंध को दर्शाता है?

(a) मुद्रास्फीति और बेरोजगारी

(b) बेरोजगारी दर और वास्तविक जीडीपी विकास दर

(c) कर दर और राजस्व

(d) आय और बचत

उत्तर: (b)

9. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions - FAQs)

Q1. बेरोजगारी और अल्प-रोजगार में क्या अंतर है?

उत्तर: बेरोजगारी में व्यक्ति को काम की पूर्ण इच्छा होने के बावजूद बिल्कुल काम नहीं मिलता। जबकि अल्प-रोजगार में व्यक्ति को काम तो मिलता है, लेकिन वह उसकी क्षमता, शैक्षणिक योग्यता या समय उपलब्धता से कम स्तर का होता है।

Q2. प्रच्छन्न बेरोजगारी में सीमांत उत्पादकता शून्य क्यों होती है?

उत्तर: क्योंकि प्रच्छन्न बेरोजगारी में किसी कार्य में लगे अतिरिक्त श्रमिकों का कुल उत्पादन में कोई योगदान नहीं होता। यदि उन अतिरिक्त श्रमिकों को हटा भी दिया जाए, तो भी कुल उत्पादन में कोई कमी नहीं आती।

Q3. भारत में बेरोजगारी मापने के लिए NSO द्वारा जारी PLFS क्या है?

उत्तर: PLFS (Periodic Labour Force Survey) यानी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक सर्वेक्षण है, जो शहरी क्षेत्रों के लिए तिमाही आधार पर और पूरे देश (ग्रामीण + शहरी) के लिए वार्षिक आधार पर बेरोजगारी और श्रम बल के आंकड़े जारी करता है।

Q4. कौशल विकास योजनाएं बेरोजगारी दूर करने में कैसे सहायक हैं?

उत्तर: भारत में मुख्य रूप से संरचनात्मक बेरोजगारी है, जहां उद्योगों को जिस कौशल (Skills) की आवश्यकता है, युवाओं के पास उसकी कमी है। कौशल विकास योजनाएं युवाओं को प्रासंगिक उद्योग-आधारित कौशल सिखाकर उनके रोजगार योग्य (Employable) बनने में मदद करती हैं।

10. निष्कर्ष (Conclusion)

बेरोजगारी (Unemployment) केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह देश के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को प्रभावित करने वाली एक गंभीर चुनौती है। भारत जैसे जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) वाले देश में युवाओं की ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग करने के लिए रोजगार सृजन अत्यंत आवश्यक है।

केवल सरकारी नौकरियों के भरोसे बेरोजगारी की समस्या का समाधान संभव नहीं है; इसके लिए विनिर्मित क्षेत्र (Manufacturing) को मजबूती देना, MSMEs को बढ़ावा देना, शिक्षा प्रणाली में व्यवसायिक/तकनीकी कौशल का समावेश करना और स्वरोजगार (Entrepreneurship) को प्रेरित करना अनिवार्य है।

प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थियों के लिए बेरोजगारी के प्रकार, इसके मापन के तरीके (PLFS, NSSO), भगवती समिति की सिफारिशें और प्रमुख सरकारी योजनाओं पर स्पष्ट समझ विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। यह लेख आपकी आगामी सभी परीक्षाओं के लिए एक संपूर्ण और प्रामाणिक अध्ययन सामग्री के रूप में कार्य करेगा।

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