गुरुवार, 10 सितंबर 2026

संत मीराबाई का जीवन परिचय, रचनाएँ व PYQs | Mirabai Biography in Hindi

कृष्ण-प्रेम और भक्ति की अमर साधिका संत मीराबाई: जीवन परिचय, रचनाएँ और PYQs | प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए संपूर्ण मार्गदर्शिका


हिंदी साहित्य के भक्ति काल (सगुण भक्ति धारा - कृष्णभक्ति शाखा) की महान कवयित्री और साधिका संत मीराबाई को 'राजस्थानी मीरा' तथा कृष्ण-प्रेम की अनन्य साधिका माना जाता है। उन्होंने लोक-लाज, कुल की मर्यादा और राजसी वैभव का त्याग कर भगवान श्रीकृष्ण को ही अपना एकमात्र पति और सर्वस्व स्वीकार किया। उनकी भक्ति मुख्य रूप से 'माधुर्य भाव' (कांता भाव) की है।

UPP (UP Police Constable/SI), UPSI, UPSSSC (PET/VDO/Lekhpal), UPTET, CTET, TGT/PGT, UGC NET आदि प्रतियोगी परीक्षाओं में मीराबाई के जीवन, उनके गुरु (संत रविदास), भक्ति-भाव, मुख्य रचनाओं (नरसी जी का मायरा, राग गोविंद, पद) तथा उनकी भाषा से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

आपकी परीक्षा तैयारी को दृष्टिगत रखते हुए संत मीराबाई का संपूर्ण विवरण व्याकरणिक शुद्धि, मानक ऐतिहासिक तथ्यों, सारणीबद्ध प्रस्तुतीकरण और प्रतियोगी परीक्षा उपयोगी प्रारूप में नीचे प्रस्तुत है।

1. एक नज़र में: संत मीराबाई (Quick Revision Table)

तथ्यविवरण
नामसंत मीराबाई
जन्म वर्ष/तिथिसन 1498 ई. (संवत् 1555 - अनुमानित)
जन्म स्थानकुड़की/कुड़की गाँव, पाली जिला (मेवाड़/मारवाड़, राजस्थान)
पिता का नामराव रत्न सिंह राठौड़
दादा का नामराव दूदा जी (मेड़ता के शासक)
पति का नाममहाराणा भोजराज (चित्तौड़ के महाराणा सांगा के ज्येष्ठ पुत्र)
गुरु का नामसंत रविदास (संत रैदास)
भक्ति धारा/शाखासगुण भक्ति धारा — कृष्णभक्ति शाखा
भक्ति का भावमाधुर्य भाव / कांता भाव (पति रूप में उपासना)
प्रमुख काव्य भाषाराजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा (गुजराती और पंजाबी का प्रभाव)
प्रमुख रचनाएँनरसी जी का मायरा, राग गोविंद, राग सोरठ के पद, मीराबाई की पदावली
निधन वर्ष/स्थानसन 1546 ई. (डाकोर/द्वारका, गुजरात में रणछोड़ जी की मूर्ति में लीन)

2. जीवन परिचय एवं पृष्ठभूमि (Biography)

संत मीराबाई का जन्म सन 1498 ई. के लगभग राजस्थान में पाली जिले के कुड़की गाँव में हुआ था। इनके पिता राव रत्न सिंह जोधपुर के संस्थापक राव जोधा जी के प्रपौत्र थे।

  • प्रारंभिक जीवन एवं संस्कार: मीराबाई का बाल्यकाल अपने दादा राव दूदा जी के पास मेड़ता में बीता। उनके दादा धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे, जिससे मीरा के मन में बाल्यकाल से ही कृष्णभक्ति के संस्कार पड़ गए। बचपन में एक साधु द्वारा दी गई कृष्ण की मूर्ति को ही उन्होंने अपना सब कुछ मान लिया था।

  • विवाह और पारिवारिक विपत्तियाँ: सन 1516 ई. में इनका विवाह मेवाड़ के महाराणा संग्राम सिंह (महाराणा सांगा) के बड़े पुत्र कुंवर भोजराज के साथ हुआ। किंतु विवाह के कुछ ही वर्षों (लगभग 7 वर्ष) पश्चात भोजराज का निधन हो गया। इसके बाद इनके पिता और ससुर भी युद्धों में वीरगति को प्राप्त हुए।

  • साधु-संगत और प्रताड़ना: वैधव्य के बाद मीराबाई राजसी जीवन त्याग कर मंदिर में साधु-संतों के साथ कीर्तन और नृत्य करने लगीं। उनके देवर (राणा विक्रमादित्य) को मीरा का यह आचरण कुल-मर्यादा के विपरीत लगा। उन्हें विष देकर मारने और सर्प का पिटारा भेजने जैसे प्रयास किए गए, किंतु कृष्ण-कृपा से मीरा का बाल भी बाँका न हुआ।

  • गुरु दीक्षा: मीराबाई ने काशी के प्रसिद्ध निर्गुण संत संत रविदास (रैदास) को अपना गुरु बनाया, जिसका उल्लेख उन्होंने अपने पदों में भी किया है:

    "गुरु रैदास मिले मोहि पूरे, धुर से बंध्यो मधानी।"

  • अंतिम समय: मेवाड़ त्यागकर मीराबाई वृंदावन गईं और फिर गुजरात के द्वारका चली गईं। सन 1546 ई. में द्वारका के रणछोड़ मंदिर में कृष्ण की मूर्ति में लीन होकर वे भौतिक संसार से विदा हो गईं।

3. प्रमुख रचनाएँ (Literary Works)

मीराबाई ने किसी विस्तृत ग्रंथ की रचना स्वयं नहीं की; उनकी वाणियाँ पदों के रूप में मौखिक रूप से गाई जाती थीं, जिन्हें बाद में संकलित किया गया:

┌─────────────────────────────────────────────────────────────────────────────┐
│                          संत मीराबाई की प्रमुख कृतियाँ                      │
└──────────────────────────────────────┬──────────────────────────────────────┘
                                       │
   ┌───────────────────┬───────────────┴───────────────┬───────────────────┐
   ▼                   ▼                               ▼                   ▼
1. नरसी जी का मायरा   2. राग गोविंद                  3. राग सोरठ के पद   4. मीराबाई की पदावली
   └── (रत्ना खाती की     └── जयदेव के 'गीत गोविंद'       └── गेय पद (संगीतबद्ध) └── मुख्य संकलन
        सहायता से रचित)        पर टीका

(A) रचनाओं का विस्तृत विवरण

रचनामुख्य विषय-वस्तु / विशेष तथ्य
नरसी जी का मायरागुजरात के प्रसिद्ध संत नरसी मेहता के जीवन प्रसंग पर आधारित। (यह रचना रत्ना खाती के सहयोग से लिखी मानी जाती है)।
राग गोविंदजयदेव की प्रसिद्ध कृति 'गीत गोविंद' के आधार पर रचित भावपूर्ण पद।
राग सोरठ के पदभक्ति और वैराग्य के भावों से युक्त सोरठ राग में गाए गए पद।
मीराबाई की पदावलीमीरा के संपूर्ण प्रामाणिक पदों का सबसे मुख्य और प्रसिद्ध संग्रह।
गीत गोविंद की टीका'गीत गोविंद' ग्रंथ पर लिखी गई विस्तृत काव्यात्मक टीका।
गरबा गीतगुजराती लोक-शैली में रचित भक्ति पद।

4. साहित्यिक एवं काव्यगत विशेषताएँ

  • माधुर्य भाव की भक्ति: मीराबाई श्रीकृष्ण को 'गिरधर गोपाल' के रूप में अपना पति मानती थीं:

    "मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई।

    जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई।।"

  • भाषा एवं शैली: इनकी भाषा मुख्यतः राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा है। इसमें गुजराती, खड़ी बोली, पंजाबी और अवधी के शब्दों का भी सुंदर समावेश है। इनकी शैली गेय (गाए जाने योग्य) और गीति-काव्य की उत्तम मिसाल है।

  • विरह और समर्पण: मीरा के पदों में विरह की पीड़ा, अनन्य समर्पण और लोक-लाज के त्याग का तीव्र स्वर है:

    "पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।।"

    "हे री मैं तो प्रेम-दिवाणी, मेरो दर्द न जाणे कोई।।"

5. विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्न (Previous Year Solved MCQs)

Q1. संत मीराबाई के गुरु कौन थे? (UP Police Constable / UPSSSC PET)

  • (A) स्वामी रामानंद

  • (B) महाप्रभु वल्लभाचार्य

  • (C) संत रविदास (रैदास)

  • (D) गुरु नानक

    उत्तर: (C) संत रविदास (रैदास)

Q2. मीराबाई की भक्ति किस भाव की मानी जाती है? (UPSI / UPTET)

  • (A) दास्य भाव

  • (B) सख्य भाव

  • (C) माधुर्य भाव (कांता भाव)

  • (D) वात्सल्य भाव

    उत्तर: (C) माधुर्य भाव (कांता भाव)

Q3. 'नरसी जी का मायरा' किसकी प्रसिद्ध रचना है? (UPSSSC VDO / UP TGT)

  • (A) सूरदास

  • (B) मीराबाई

  • (C) रसखान

  • (D) कबीरदास

    उत्तर: (B) मीराबाई

6. अभ्यास प्रश्नोत्तरी (Practice Quiz)

  1. मीराबाई का जन्म राजस्थान के किस स्थान पर हुआ था?

  2. मीराबाई के पति का नाम क्या था और वे कहाँ के राजकुमार थे?

  3. मीराबाई की रचनाओं में मुख्य रूप से किस भाषा का प्रभाव देखने को मिलता है?

उत्तर कुंजी (Self Check):

  1. कुड़की गाँव (पाली जिला, राजस्थान)।

  2. कुंवर भोजराज (मेवाड़ के महाराणा सांगा के पुत्र)।

  3. राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा (गुजराती का भी प्रभाव)।

निष्कर्ष (Conclusion)

संत मीराबाई हिंदी साहित्य की उन विरली साधिकाओं में से हैं जिनकी पंक्तियाँ आज भी भारत के जन-जन के कंठ में बसी हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं (विशेषकर UPP, UPSI, UPSSSC, TGT/PGT) में मीराबाई के गुरु (रविदास), उनकी भक्ति का भाव (माधुर्य), तथा उनकी कृतियों (नरसी जी का मायरा, राग गोविंद, पदावली) से संबंधित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। इन्हें अपने नोट्स में अवश्य संकलित रखें।

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