वर्ष 1991 के आर्थिक सुधार (Economic Reforms of 1991 in India): इतिहास, LPG नीति, प्रभाव एवं संपूर्ण परीक्षा उपयोगी तथ्य
वर्ष 1991 का वर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास में एक ऐतिहासिक और निर्णायक मोड़ माना जाता है। इस वर्ष भारत ने अपने गंभीर आर्थिक संकट से उबरने के लिए अपनी आर्थिक नीतियों में बुनियादी बदलाव किए, जिसे 'एलपीजी सुधार' (LPG Reforms) यानी उदारीकरण (Liberalisation), निजीकरण (Privatisation) और वैश्वीकरण (Globalisation) के नाम से जाना जाता है।
प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC, State PSC (UPPCS, BPSC, MPPSC, RAS), SSC CGL, Railways, Banking (IBPS, RBI) आदि की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए भारतीय अर्थशास्त्र (Indian Economy) के अंतर्गत यह टॉपिक अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस विस्तृत लेख में हम 1991 के आर्थिक संकट के कारण, LPG मॉडल की व्याख्या, राव-मनमोहन मॉडल, प्रमुख नीतिगत बदलाव, अर्थव्यवस्था पर इसके सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव, प्रमुख तथ्य तालिका, 20+ बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) और त्वरित पुनरीक्षण (Quick Revision) नोट्स का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
1. वर्ष 1991 के आर्थिक संकट के मुख्य कारण (Background & Causes of 1991 Crisis)
1991 में भारत के पास केवल 2 सप्ताह (लगभग 15 दिन) के आयात के लिए विदेशी मुद्रा भंडार बचा था। इस संकट के मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
भुगतान संतुलन का संकट (Balance of Payments - BoP Crisis): भारत का चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बहुत बढ़ गया था। आयात व्यय बहुत अधिक और निर्यात आय बहुत कम थी।
खाड़ी युद्ध (Gulf War - 1990-91): खाड़ी युद्ध के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें बहुत बढ़ गईं। इसके अतिरिक्त, मध्य पूर्व में काम करने वाले भारतीयों द्वारा भेजे जाने वाले धन (Remittances) में भारी कमी आई।
वित्तीय कुप्रबंधन एवं राजकोषीय घाटा: 1980 के दशक में सरकार का व्यय उसकी आय से बहुत अधिक था, जिससे राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) बढ़कर जीडीपी का लगभग 8.4% हो गया।
उच्च मुद्रास्फीति (High Inflation): वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ रही थीं और मुद्रास्फीति की दर 12% से 13% के स्तर तक पहुँच गई थी।
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) का असंतोषजनक प्रदर्शन: अधिकांश सरकारी कंपनियां घाटे में चल रही थीं और अर्थव्यवस्था पर बोझ बन चुकी थीं।
लाइसेंस-परमिट राज (Licence-Permit Raj): अत्यधिक लालफीताशाही और नियंत्रण के कारण निजी क्षेत्र का विकास रुका हुआ था।
2. 1991 के आर्थिक सुधारों से जुड़े प्रमुख तथ्य (Key Facts Table)
| विशेषता (Parameter) | विवरण (Details) |
| सुधारों का वर्ष (Year of Reforms) | 1991 (24 जुलाई 1991 को नई औद्योगिक नीति की घोषणा) |
| तत्कालीन प्रधानमंत्री (Then Prime Minister) | पी. वी. नरसिम्हा राव (P. V. Narasimha Rao) |
| तत्कालीन वित्त मंत्री (Then Finance Minister) | डॉ. मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh) |
| आर्थिक मॉडल (Economic Model) | राव-मनमोहन मॉडल (Rao-Manmohan Model) |
| सुधारों का मूल आधार (Core Basis) | LPG नीति (Liberalisation, Privatisation, Globalisation) |
| अंतर्राष्ट्रीय सहायता (International Help) | IMF (अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष) और विश्व बैंक (World Bank) |
| ऋण की शर्त (Condition for Loan) | संरचनात्मक समायोजन कार्यक्रम (Structural Adjustment Program - SAP) |
| गिरवी रखा गया सोना (Gold Pledged) | भारत ने बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ स्विट्जरलैंड के पास सोना गिरवी रखकर ऋण लिया |
3. LPG मॉडल का विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis of LPG Model)
LPG सुधारों को मुख्य रूप से तीन भागों में वर्गीकृत किया गया है:
┌────────────────────────┐
│ 1991 के आर्थिक सुधार │
│ (LPG Model) │
└───────────┬────────────┘
│
┌──────────────────────┼──────────────────────┐
▼ ▼ ▼
┌──────────────┐ ┌──────────────┐ ┌──────────────┐
│ L - उदारीकरण │ │ P - निजीकरण │ │ C - वैश्वीकरण│
│Liberalisation│ │ Privatisation│ │Globalisation │
└──────────────┘ └──────────────┘ └──────────────┘
1. उदारीकरण (Liberalisation):
उदारीकरण का अर्थ है अर्थव्यवस्था पर लगे अनावश्यक सरकारी नियंत्रणों, नियमों और प्रतिबंधों को हटाना ताकि निजी क्षेत्र स्वतंत्र रूप से कार्य कर सके।
लाइसेंस राज की समाप्ति: केवल 18 उद्योगों (वर्तमान में केवल कुछ संवेदनशील क्षेत्रों) को छोड़कर अन्य सभी के लिए औद्योगिक लाइसेंसिंग समाप्त कर दी गई।
MRTP अधिनियम में संशोधन: एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार (MRTP) अधिनियम के तहत परिसंपत्ति सीमा को समाप्त कर दिया गया।
वित्तीय क्षेत्र में सुधार: ब्याज दरों को नियंत्रण मुक्त किया गया और RBI की भूमिका को 'नियंत्रक' से बदलकर 'सुविधादाता' (Facilitator) कर दिया गया।
कर सुधार: प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों की दरों में कटौती की गई।
2. निजीकरण (Privatisation):
निजीकरण का अर्थ है सरकारी स्वामित्व और प्रबंधन वाली संपत्तियों या उपक्रमों को निजी क्षेत्र को सौंपना।
सार्वजनिक क्षेत्र का आरक्षण कम करना: सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित उद्योगों की संख्या 17 से घटाकर 8 (और बाद में 2 - परमाणु ऊर्जा व रेलवे) कर दी गई।
विनिवेश (Disinvestment): घाटे में चल रहे सरकारी उपक्रमों (PSUs) के शेयरों को निजी निवेशकों और जनता को बेचा गया।
नवरत्न एवं महारत्न का दर्जा: सरकारी कंपनियों को अधिक स्वायत्तता देने के लिए नवरत्न और महारत्न दर्जा योजना शुरू की गई।
3. वैश्वीकरण (Globalisation):
वैश्वीकरण का अर्थ है देश की अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ना और माल, सेवाओं, पूंजी तथा प्रौद्योगिकी के मुक्त प्रवाह की अनुमति देना।
आयात शुल्कों में कटौती: आयात पर लगे उच्च टैरिफ और कोटे (Quota) को समाप्त या कम किया गया।
FDI और FII को बढ़ावा: प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FII) की सीमा में छूट दी गई।
रुपये का अवमूल्यन एवं परिवर्तनशीलता: 1991 में रुपये का लगभग 18-20% तक अवमूल्यन (Devaluation) किया गया और चालू खाते पर रुपये को पूर्ण परिवर्तनीय (Fully Convertible) बनाया गया।
4. 1991 के आर्थिक सुधारों का प्रभाव (Impact of Economic Reforms)
सकारात्मक प्रभाव (Positive Impacts):
जीडीपी वृद्धि दर में तेजी: भारत की जीडीपी वृद्धि दर 1990 के दशक के बाद औसतन 6% से 8% प्रतिवर्ष हो गई।
विदेशी मुद्रा भंडार में भारी वृद्धि: 1991 में जो विदेशी भंडार 1.2 अरब डॉलर था, वह बढ़कर सैकड़ों अरब डॉलर हो गया।
सेवा क्षेत्र (Service Sector) का विकास: IT, टेलीकॉम और बैंकिंग क्षेत्र में भारत दुनिया का प्रमुख केंद्र बना।
ग्राहकों को लाभ: बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से गुणवत्तापूर्ण वस्तुएं और सेवाएं सस्ती दरों पर उपलब्ध हुईं।
FDI में वृद्धि: विदेशी कंपनियों (MNCs) ने भारत में बड़े पैमाने पर निवेश किया।
नकारात्मक प्रभाव (Negative Impacts):
कृषि क्षेत्र की उपेक्षा: सुधारों का मुख्य ध्यान उद्योग और सेवा क्षेत्र पर रहा, जिससे कृषि विकास दर धीमी रही।
आर्थिक असमानता में वृद्धि: अमीर और गरीब तथा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच की खाई चौड़ी हुई।
रोजगार विहीन विकास (Jobless Growth): जीडीपी तो बढ़ी, लेकिन उस अनुपात में संगठित क्षेत्र में रोजगार के अवसर नहीं बढ़े।
5. त्वरित पुनरीक्षण नोट्स (Quick Revision Notes for Exams)
सुधार की तिथि: 24 जुलाई 1991 (नई औद्योगिक नीति)।
प्रधानमंत्री: पी. वी. नरसिम्हा राव | वित्त मंत्री: डॉ. मनमोहन सिंह।
LPG का फुल फॉर्म: Liberalisation, Privatisation, Globalisation.
1991 के संकट का कारण: भुगतान संतुलन (BoP) संकट, खाड़ी युद्ध, उच्च राजकोषीय घाटा।
अंतर्राष्ट्रीय सहायता संस्थाएं: IMF और World Bank।
रुपये का अवमूल्यन: जुलाई 1991 में दो चरणों में किया गया।
MRTP Act: इसके स्थान पर 2002 में प्रतिस्पर्धा अधिनियम (Competition Act) लाया गया।
6. विगत वर्षों के 20+ महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (Previous Years MCQ Questions)
Q1. भारत में वर्ष 1991 के आर्थिक सुधारों की घोषणा के समय भारत के प्रधानमंत्री कौन थे?
(a) राजीव गांधी
(b) पी. वी. नरसिम्हा राव
(c) वी. पी. सिंह
(d) अटल बिहारी वाजपेयी
उत्तर: (b)
Q2. 1991 में नई आर्थिक नीति (NEP) लागू करते समय भारत के वित्त मंत्री कौन थे?
(a) प्रणब मुखर्जी
(b) पी. चिदंबरम
(c) डॉ. मनमोहन सिंह
(d) यशवन्त सिन्हा
उत्तर: (c)
Q3. LPG मॉडल में 'LPG' का सही अर्थ क्या है?
(a) Liquid Petroleum Gas
(b) Liberalisation, Privatisation, Globalisation
(c) Licensing, Privatisation, Growth
(d) Liberalisation, Production, Globalisation
उत्तर: (b)
Q4. 1991 की नई औद्योगिक नीति की घोषणा किस तिथि को की गई थी?
(a) 15 अगस्त 1991
(b) 24 जुलाई 1991
(c) 1 अप्रैल 1991
(d) 31 दिसंबर 1991
उत्तर: (b)
Q5. 1991 के आर्थिक संकट का मुख्य तत्काल कारण क्या था?
(a) भुगतान संतुलन का संकट (BoP Crisis)
(b) भारत-चीन युद्ध
(c) बैंक घोटाला
(d) सूखा
उत्तर: (a)
Q6. 1991 में आर्थिक संकट से उबरने के लिए भारत ने किस अंतर्राष्ट्रीय संस्था से ऋण लिया था?
(a) एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB)
(b) अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक
(c) न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB)
(d) BRICS बैंक
उत्तर: (b)
Q7. 1991 के सुधारों में भारतीय रुपये का अवमूल्यन कितने चरणों में किया गया था?
(a) एक चरण
(b) दो चरण
(c) तीन चरण
(d) चार चरण
उत्तर: (b)
Q8. उदारीकरण का मुख्य उद्देश्य क्या था?
(a) सरकारी नियंत्रणों और लाइसेंसिंग को कम करना
(b) सभी उद्योगों को सरकारी बनाना
(c) विदेशी व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना
(d) कृषि पर कर लगाना
उत्तर: (a)
Q9. 1991 के आर्थिक सुधारों को किस नाम से भी जाना जाता है?
(a) नेहरू-महालनोबिस मॉडल
(b) राव-मनमोहन मॉडल
(c) गांधीवादी मॉडल
(d) बॉम्बे प्लान मॉडल
उत्तर: (b)
Q10. 1991 में लाइसेंसिंग प्रणाली को अधिकांश उद्योगों के लिए समाप्त कर दिया गया, इसे क्या कहा जाता था?
(a) कोटा राज
(b) लाइसेंस-परमिट राज का अंत
(c) लालफीताशाही
(d) निजीकरण
उत्तर: (b)
Q11. 'विनिवेश' (Disinvestment) का अर्थ क्या है?
(a) नए सरकारी उद्योग खोलना
(b) सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में सरकारी शेयर बेचना
(c) विदेशी कंपनियों को भारत से बाहर करना
(d) निजी कंपनियों का राष्ट्रीयकरण करना
उत्तर: (b)
Q12. MRTP अधिनियम को किस नए कानून से प्रतिस्थापित किया गया?
(a) कंपनी अधिनियम 2013
(b) प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 (Competition Act)
(c) FEMA अधिनियम
(d) SEBI अधिनियम
उत्तर: (b)
Q13. FERA (Foreign Exchange Regulation Act) को हटाकर किस कानून को लागू किया गया?
(a) FEMA (Foreign Exchange Management Act)
(b) PMLA
(c) SARFAESI Act
(d) FRBM Act
उत्तर: (a)
Q14. 1991 के आर्थिक संकट के समय भारत के पास कितने समय का आयात कवर (Import Cover) बचा था?
(a) 6 महीने
(b) 3 महीने
(c) लगभग 2 सप्ताह (14-15 दिन)
(d) 1 वर्ष
उत्तर: (c)
Q15. वैश्वीकरण का मुख्य घटक क्या है?
(a) आयात शुल्क में वृद्धि
(b) विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) की अनुमति एवं व्यापार में बाधाओं को हटाना
(c) विदेशी यात्रा पर प्रतिबंध
(d) केवल देशी उत्पादों को प्रोत्साहन
उत्तर: (b)
Q16. 1991 के सुधारों के बाद भारत का कौन सा क्षेत्र सबसे तेजी से बढ़ा?
(a) कृषि क्षेत्र
(b) प्राथमिक क्षेत्र
(c) सेवा क्षेत्र (Service Sector)
(d) खनन क्षेत्र
उत्तर: (c)
Q17. 1990-91 में किस युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया था?
(a) वियतनाम युद्ध
(b) खाड़ी युद्ध (Gulf War)
(c) कोरियाई युद्ध
(d) शीत युद्ध
उत्तर: (b)
Q18. 1991 के सुधारों के बाद RBI की भूमिका में क्या परिवर्तन आया?
(a) नियंत्रक से सुविधादाता (Facilitator) के रूप में
(b) केवल वाणिज्यिक बैंक के रूप में
(c) ऋण देना बंद करना
(d) विदेशी व्यापार पर पूर्ण नियंत्रण
उत्तर: (a)
Q19. चालू खाते में रुपये की पूर्ण परिवर्तनीयता (Full Convertibility) किस वर्ष लागू की गई?
(a) 1991
(b) 1994
(c) 1998
(d) 2000
उत्तर: (b)
Q20. 1991 के सुधारों का निम्नलिखित में से कौन सा एक नकारात्मक प्रभाव माना जाता है?
(a) विदेशी मुद्रा भंडार में कमी
(b) कृषि क्षेत्र की उपेक्षा एवं आर्थिक असमानता
(c) निर्यात में गिरावट
(d) IT क्षेत्र का पतन
उत्तर: (b)
Q21. 'संरचनात्मक समायोजन कार्यक्रम' (SAP) किस संस्था की शर्त का हिस्सा था?
(a) संयुक्त राष्ट्र संघ
(b) विश्व बैंक एवं IMF
(c) एशियाई विकास बैंक
(d) WIPO
उत्तर: (b)
7. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions - FAQs)
Q1. 1991 के आर्थिक सुधार क्या थे?
उत्तर: 1991 के आर्थिक सुधार भारत द्वारा अपनाई गई वह नीतियां थीं जिनके तहत अर्थव्यवस्था को नियंत्रित प्रणाली से हटाकर उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) की ओर मोड़ा गया।
Q2. 1991 के आर्थिक संकट का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: मुख्य कारण भारी राजकोषीय घाटा, चालू खाते का घाटा, खाड़ी युद्ध के कारण तेल की बढ़ी कीमतें और विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट (केवल 2 सप्ताह का आयात कवर) थे।
Q3. राव-मनमोहन मॉडल क्या है?
उत्तर: तत्कालीन प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा संयुक्त रूप से तैयार और लागू किए गए एलपीजी (LPG) सुधारों को 'राव-मनमोहन मॉडल' कहा जाता है।
Q4. FERA और FEMA में क्या अंतर है?
उत्तर: FERA (1973) विदेशी मुद्रा के उल्लंघन को आपराधिक अपराध मानता था और बहुत सख्त था, जबकि FEMA (1999) इसे नागरिक अपराध मानता है और विदेशी व्यापार को सुविधाजनक बनाने पर केंद्रित है।
8. निष्कर्ष (Conclusion)
वर्ष 1991 के आर्थिक सुधार भारत के आधुनिक आर्थिक इतिहास की सबसे युगांतरकारी घटना थे। संकट के समय उठाए गए इन साहसिक कदमों ने न केवल भारत को दिवालिया होने से बचाया, बल्कि भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने का मार्ग भी प्रशस्त किया।
यद्यपि कृषि क्षेत्र में सुस्त विकास और आय असमानता जैसी चुनौतियां आज भी बनी हुई हैं, परंतु उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) नीति के बिना आज के डिजिटल और आधुनिक भारत की कल्पना करना असंभव है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए 1991 के सुधारों के कारण, नीतियां और इसके प्रभाव के तथ्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
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