छायावाद के प्रवर्तक जयशंकर प्रसाद: जीवन परिचय, साहित्यिक योगदान, रचनाएँ और PYQs
हिंदी साहित्य में छायावाद के चार स्तंभों (प्रसाद, निराला, पंत, महादेवी) में शीर्ष स्थान पर विराजमान जयशंकर प्रसाद एक युगप्रवर्तक कवि, नाटककार, उपन्यासकार और निबंधकार थे। UPP (UP Police Constable/SI/ASI), UPSI, UPSSSC (PET/VDO/Lekhpal/Junior Assistant), UPTET, TGT/PGT आदि परीक्षाओं में इनके जीवन, ऐतिहासिक नाटकों और कामायनी महाकाव्य से संबंधित 2 से 4 प्रश्न सीधे पूछे जाते हैं।
1. एक नज़र में: जयशंकर प्रसाद (Quick Revision Table)
| तथ्य | विवरण |
| पूरा नाम | जयशंकर प्रसाद |
| जन्म तिथि | 30 जनवरी 1889 |
| जन्म स्थान | काशी (वाराणसी, उत्तर प्रदेश) |
| पिता का नाम | बाबू देवी प्रसाद (सूंघनी साहू परिवार) |
| काव्य भाषा | परिमार्जित खड़ी बोली हिंदी (प्रारंभिक रचनाएँ ब्रजभाषा में) |
| साहित्यिक युग | छायावादी युग (छायावाद के प्रवर्तक/जनक) |
| प्रथम कविता | 'चित्ररेखा' (1906) |
| प्रसिद्ध महाकाव्य | कामायनी (1935–36) |
| प्राप्त पुरस्कार | मंगलाप्रसाद पारितोषिक ('कामायनी' हेतु) |
| निधन तिथि | 15 नवंबर 1937 (वाराणसी) |
2. जीवन परिचय (Biography)
जयशंकर प्रसाद का जन्म 30 जनवरी 1889 को काशी (वाराणसी, उत्तर प्रदेश) के प्रसिद्ध व्यवसाई परिवार में हुआ था, जो 'सूंघनी साहू' परिवार के नाम से जाना जाता था। इनके पिता बाबू देवी प्रसाद एक साहित्य-प्रेमी व्यक्ति थे।
शिक्षा एवं स्वाध्याय: बचपन में ही माता-पिता का छत्रछाया उठ जाने के कारण इनकी औपचारिक शिक्षा नियमित रूप से नहीं हो सकी। इन्होंने घर पर ही स्वाध्याय से हिंदी, संस्कृत, फारसी, पाली और अंग्रेजी भाषाओं का गहन अध्ययन किया।
साहित्यिक यात्रा: 12 वर्ष की अल्पायु से ही इन्होंने काव्य-रचना प्रारंभ कर दी थी। इनकी पहली कविता 'चित्ररेखा' वर्ष 1906 में प्रकाशित हुई थी।
छायावाद के प्रवर्तक: प्रसाद जी को हिंदी साहित्य में छायावाद का प्रवर्तक (जनक) माना जाता है। इन्होंने खड़ी बोली को ललित और मधुर रूप प्रदान कर काव्य-भाषा के पद पर प्रतिष्ठित किया।
बहुमुखी प्रतिभा: ये केवल कवि ही नहीं, बल्कि उच्च कोटि के नाटककार, कहानीकार, उपन्यासकार और निबंधकार भी थे।
निधन: 15 नवंबर 1937 को क्षय रोग (टीबी) के कारण मात्र 48 वर्ष की आयु में वाराणसी में इनका निधन हो गया।
3. साहित्यिक योगदान एवं कृतियों का वर्गीकरण
जयशंकर प्रसाद ने हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं में कालजयी रचनाएँ की हैं:
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│जयशंकर प्रसाद का संपूर्ण साहित्य │
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1. महाकाव्य 2. काव्य संग्रह 3. प्रसिद्ध नाटक 4. उपन्यास 5. कहानी संग्रह
└── कामायनी ├── आँसू ├── चंद्रगुप्त ├── कंकाल ├── आकाशदीप
├── लहर ├── स्कंदगुप्त ├── तितली ├── आंधी
└── झरना └── ध्रुवस्वामिनी └── इरावती (अधूरा) └── इंद्रजाल
(A) महाकाव्य (Epic)
कामायनी (1935-36): हिंदी साहित्य का अनमोल रत्न और छायावाद का सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य। इसमें कुल 15 सर्ग (चिंता, आशा, श्रद्धा, काम, वासना, लज्जा, कर्म, ईर्ष्या, इड़ा, स्वप्न, संघर्ष, निर्वेद, दर्शन, रहस्य, आनंद) हैं।
मुख्य पात्र: मनु (मन का प्रतीक), श्रद्धा (हृदय का प्रतीक), इड़ा (बुद्धि का प्रतीक)।
(B) प्रमुख काव्य संग्रह (Poetry Collections)
झरना (1918): छायावाद की प्रथम प्रयोगशाला/प्रथम छायावादी काव्य संग्रह।
आँसू (1925): करुणा, विरह और शोक से परिपूर्ण प्रसिद्ध विरह-काव्य।
लहर (1933): प्रेम, सौंदर्य और आनंद की सजीव अभिव्यक्ति।
अन्य काव्य रचनाएँ: उर्वशी, प्रेमपथिक, कानन कुसुम, वनमिलन, अयोध्या का उद्धार, प्रेमराज्य, महाराणा का महत्व।
(C) ऐतिहासिक एवं अन्य नाटक (Plays / Drama)
जयशंकर प्रसाद हिंदी के सर्वश्रेष्ठ ऐतिहासिक नाटककार माने जाते हैं:
प्रसिद्ध ऐतिहासिक नाटक: चंद्रगुप्त, स्कंदगुप्त, अजातशत्रु, ध्रुवस्वामिनी (अंतिम नाटक), विशाख, राज्यश्री, जन्मेजय का नागयज्ञ।
अन्य नाटक: कल्याणी परिणय, प्रायश्चित, कामना, एक घूँट (हिंदी की प्रथम एकांकी मानी जाती है)।
(D) उपन्यास (Novels)
कंकाल (1929): यथार्थवादी सामाजिक उपन्यास।
तितली (1934): ग्रामीण जीवन पर आधारित उपन्यास।
इरावती (1938): ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित अधूरा (अपूर्ण) उपन्यास।
(E) कहानी संग्रह (Story Collections)
प्रसाद जी ने लगभग 69 कहानियाँ लिखी हैं, जो 5 प्रमुख संग्रहों में संकलित हैं:
छाया (1912): हिंदी का पहला कहानी संग्रह।
प्रतिध्वनि, आकाशदीप, आंधी, इंद्रजाल।
प्रसिद्ध कहानियाँ: आकाशदीप, पुरस्कार, गुंडा, सुनहरा सांप, देवरथ, ममता, छोटा जादूगर।
4. भाषा-शैली एवं पुरस्कार (Language Style & Awards)
भाषा शैली: इनकी भाषा संस्कृतनिष्ठ, तत्सम शब्दावली से युक्त, परिमार्जित और काव्यात्मक है। इनकी भाषा में चित्रात्मकता और लाक्षणिकता का सुंदर समावेश है।
पुरस्कार एवं सम्मान: इनकी कालजयी रचना 'कामायनी' के लिए इन्हें हिंदी साहित्य का प्रतिष्ठित 'मंगलाप्रसाद पारितोषिक' पुरस्कार प्रदान किया गया।
5. विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्न (Previous Year Solved MCQs)
Q1. 'कामायनी' महाकाव्य के रचनाकार कौन हैं? (UP Police Constable)
(A) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
(B) सुमित्रानंदन पंत
(C) जयशंकर प्रसाद
(D) महादेवी वर्मा
उत्तर: (C) जयशंकर प्रसाद
Q2. निम्नलिखित में से कौन सा उपन्यास जयशंकर प्रसाद का 'अधूरा उपन्यास' है? (UPSSSC PET / VDO)
(A) कंकाल
(B) तितली
(C) इरावती
(D) गबन
उत्तर: (C) इरावती
Q3. 'चंद्रगुप्त' और 'स्कंदगुप्त' नाटकों के लेखक कौन हैं? (UPSI)
(A) भारतेंदु हरिश्चंद्र
(B) जयशंकर प्रसाद
(C) मोहन राकेश
(D) धर्मवीर भारती
उत्तर: (B) जयशंकर प्रसाद
Q1. प्रसिद्ध पुस्तक "कंकाल" के लेखक कौन हैं?
A) केतन भगत
B) महेश राव
C) निर्मल वर्मा
D) जयशंकर प्रसाद
उत्तर: D (जयशंकर प्रसाद)
Q2. जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित अंतिम नाटक (Last Drama) कौन सा है?
A) चंद्रगुप्त
B) अजातशत्रु
C) स्कंदगुप्त
D) ध्रुवस्वामिनी
उत्तर: D
व्याख्या:
- हालांकि इनमें से कई नाटक प्रसिद्ध हैं, लेकिन ऐतिहासिक तथ्यों और साहित्यिक इतिहास के अनुसार, प्रसाद जी का अंतिम नाटक ध्रुवस्वामिनी (Dhruvswamini) है ।
Q3. "कामायनी" महाकाव्य की नायिका (या प्रमुख स्त्री पात्र) कौन है?
(Who is the main female character in the epic Kamayani?)
A) उर्वशी
B) शकुंतला
C) श्रद्धा
D) यशोधरा
उत्तर: C (श्रद्धा)
Q4. जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के किस काल/वाद के कवि थे?
(Jaishankar Prasad was a poet of which literary school?)
A) द्विवेदी युग
B) भक्तिकाल
C) प्रगतिवाद
D) छायावाद
उत्तर: D (छायावाद)
Q5. पुरस्कार कहानी के लेखक कौन है?
A) महादेवी वर्मा
B) जय शंकर प्रसाद √
C) सुभद्राकुमारी चौहान
D) रामधारी सिंह दिनकर
Q6. जयशंकर प्रसाद जी की महाकाव्य है?
A) साकेत
B) आनंदमठ
C) कामायनी √
D) गोदान
6. अभ्यास प्रश्नोत्तरी (Practice Quiz for Exams)
कामायनी महाकाव्य में कुल कितने सर्ग हैं और इसके तीन प्रमुख पात्रों के नाम लिखिए।
छायावाद का प्रथम काव्य संग्रह (प्रयोगशाला) किसे माना जाता है?
जयशंकर प्रसाद के तीन प्रसिद्ध कहानी संग्रहों के नाम बताइए।
उत्तर कुंजी (Self Check):
कुल 15 सर्ग; मुख्य पात्र: मनु, श्रद्धा और इड़ा।
'झरना' (1918)।
आकाशदीप, छाया और इंद्रजाल।
निष्कर्ष (Conclusion)
जयशंकर प्रसाद भारतीय संस्कृति, इतिहास और दर्शन के महान उन्नायक थे। इन्होंने अपने नाटकों, काव्यों और उपन्यासों से हिंदी भाषा को एक नया गौरव प्रदान किया। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से इनकी कृतियाँ 'कामायनी', 'ध्रुवस्वामिनी', 'स्कंदगुप्त' और 'आकाशदीप' विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। इस संपूर्ण नोट्स को अपनी तैयारी के लिए संभालकर रखें।